ATS के कब्जे में दो आरोपी, विष्णु-वामन कोड वर्ड का करते थे इस्तेमाल, देसी बम को लड्डू कहते थे
मुंबई। पालघर जिले के करीब नल्लासोपारा इलाके में विस्फोटक पाए जाने के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जोकि विष्णु और वामन जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल आपसी बातचीत के दौरान करते थे। इस मामले में गिरफ्तार एक आरोपी ने एटीएस को बताया है कि वह सीधे तौर पर 20 अगस्त 2013 में नरेंद्र दाभोलकर हत्या में लिप्त है। । इससे पहले 10 अगस्त को वैभव राउत, शरद कालस्कर और सुधानवा गोंडेलकर को एटीएस ने पालघर और पुणे से बड़ी मात्रा में विस्फोटक और हथियार रखने के मामले में गिरफ्तार किया था।

कई कोड वर्ड का इस्तेमाल
अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि कालस्कर कोड वर्ड विष्णु था, जबकि वैभव राउत का कोड वर्ण वामन था और गोंडलेकर का नाम पांडेजी था। इन तीनों पर आरोप है कि ये देसी बम बनाते हैं और ये लोग इसे लड्डू के नाम से बुलाते थे। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा भी कई कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता था, ये तमाम नाम हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट में पाए गए हैं, हम कोशिश कर रहे हैं कि इन कोड वर्ड को डीकोड किया जाए।
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सचिन संग मिलकर दाभोलकर को मारी गोली
पूछताछ के दौरान कालस्कर ने बताया कि उसने औरंगाबाद के निवासी सचिन अंदूरे के साथ मिलकर दाभोलकर को गोली मारी थी। अंदूरे को पुणे से 19 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। आपको बता दें कि दाभोलकर की हत्या की सीबीआई जांच कर रही है, सीबीआई ने दावा किया है कि दाभोलकर की हत्या की साजिश सनातन संस्था के मुखिया वीरेंद्र तावड़े ने रची थी, उसी ने कालस्कर और अंदूरे को दाभोलकर को मारने के लिए भेजा था।
छापेमारी में मिले थे सुराग
इससे पहले सीबीआई ने दावा किया था कि उसने 1 जून 2016 को रायगढ़ जिले के करीब पनवल में सनातन संस्था के आश्रम छापेमारी के दौरान एक हार्ड डिस्क बरामद की है, जिसमे एक फोल्डर था और उसपर धर्मद्रोही लिखा हुआ था। इस फोल्डर में दाभोलकर की तस्वीर भी थी। इसके अलावा दो पुलिस अधिकारी, कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की भी तस्वीर इसमे थी।
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