'लकी चार्म' चुराना इन दो लोगों को पड़ा भारी, अब हो गई ऐसी हालत

नई दिल्ली। हर किसी का अपना-अपना लकी चार्म होता है। किसी का लकी चार्म कोई सिक्का होता है तो किसी का कोई पत्ता। या फिर कई लोग लाफिंग बुद्धा को भी लकी चार्म मानता है। लेकिन ये हर किसी के लिए लकी हो ये जरूरी नहीं। दरअसल दिल्ली में दो चोरों को उन्हीं के लकी चार्म ने जेल तक पहुंचा दिया है।

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ये कहानी है दो ऐसे दोस्तों की जो साथ में चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। बताया जाता है कि दोनों हरियाणा के भिवानी के रहने वाले थे। इनकी शादी बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में हो गई। फिर ये जब भी ससुराल आते तो कभी खाली हाथ नहीं जाते थे। ससुराल में ठहरने के दौरान ये नांगलोई से किशनगंज के बीच ट्रेन में सफर करते थे।

इन लोगों ने एक फोन चुराया था

इन लोगों ने एक फोन चुराया था

इस बीच दोनों सफर कर रहे अन्य यात्रियों का पर्स, फोन और अन्य कीमती सामान चुरा लिया करते थे। इस मामले में रेलवे के डीसीपी हरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बीते साल इन लोगों ने एक फोन चुराया था जिसके बाद से ये आज तक नहीं पकड़े गए।

लकी चार्म मानने लगे

लकी चार्म मानने लगे

ये मोबाइल सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास से चुराया गया था। इसके बाद से ये लोग कभी नहीं पकड़े गए और इनका धंधा भी चनक उठा। ये लोग मोबाइल चुराकर उसे तुरंत बेच दिया करते थे। लेकिन चुराए हुए पहले फोन को इन्होंने कभी नहीं बेचा और इसे लकी चार्म मानने लगे। यहां तक कि इस फोन को ये हर वारदात के दौरान अपने साथ ही रखते थे।

फोन गिरफ्तारी का जरिया बना

फोन गिरफ्तारी का जरिया बना

पुलिस के अनुसार इन चोरों ने इस फोन में कभी कोई सिम भी नहीं डाला और ना ही कभी इस्तेमाल किया। लेकिन इस बार इनके लकी चार्म ने ही इन्हें हवालात तक पहुंचाया। यही फोन इनकी गिरफ्तारी का जरिया भी बना। डीसीपी ने बताया कि बुधवार को दया बस्ती रेलवे स्टेशन पर पट्रोलिंग करते वक्त जीआरपी के पुलिसकर्मियों की एक टीम की नजर इन दोनों पर पड़ गई। दोनों अंधेरे में वहां खड़े थे, जब इनसे पूछताछ की गई तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

पुलिस ने इनकी तलाशी ली

पुलिस ने इनकी तलाशी ली

इसके बाद पुलिसवालों ने इनकी तलाशी ली, जिसमें एक मोबाइल फोन मिला। फोन में कोई सिम न देखकर कई सवाल पूछे। जब इसके पीछे की वजह पूछी गई तो इन्होंने कहा कि फोन खराब है। फिर पुलिस ने जांच में पाया कि मोबाइल तो चोरी का है। आईएमईआई नंबर के आधार पर रिकॉर्ड चेक किया गया, तो पता चला कि ये बीते साल अक्टूबर में चोरी हुआ था। इसके लिए एख एफआईआर भी दर्ज है। इन आरोपियों के खिलाफ कुल 29 मामले दर्ज हैं।

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