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त्रिपुरा: कोरोना अस्पतालों के लिए स्क्रैप से बनाया रोबोट, डॉक्टरों-नर्सों के लिए काम की चीज

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नई दिल्ली- त्रिपुरा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने स्क्रैप से बहुत ही किफायती रोबोट तैयार कर लिया है, जो फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स की जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। इसपर सिर्फ 25 हजार रुपये की लागत आई है, लेकिन कोविड अस्पतालों में इसके इस्तेमाल से डॉक्टरों-नर्सों के काम करने के तरीकों में काफी बदलाव लाया जा सकता है। हालांकि, रोबोट बनाने वाले को लॉकडाउन की वजह से कुछ जरूरी उपकरण नहीं मिल पाया, जिसके लगने से इसकी परफॉर्मेंस और बेहतर हो सकती है। इस रोबोट की मदद से डॉक्टरों और नर्सों को मरीजों के सीधे संपर्क में आने से बचाया जा सकता है।

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युवा प्रोफेसर ने स्क्रैप से बनाया रोबोट

युवा प्रोफेसर ने स्क्रैप से बनाया रोबोट

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक त्रिपुरा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर हरजीत नाथ ने स्क्रैप के इस्तेमाल से एक ऐसा किफायती रोबोट बनाया है जो कोविड अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों को मानव के सीधे संपर्क में आने से बचा सकता है। हरजीत नाथ ने ये रोबोट यह सोचकर तैयार किया है कि कई बार फ्रंटलाइन वर्क्स को पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट की किल्लत का सामना करना पड़ता रहा है। अब उन्होंने जो रोबोट तैयार किया है, उसकी मदद से कोविड अस्पतालों में मरीजों तक दवा और खाना पहुंचाने का काम आसानी से किया जा सकता है और उसके लिए किसी स्टाफ को मरीज के सीधे संपर्क में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 31 साल के युवा प्रोफेसर कहा कहना है कि, 'मैंने ये ड्रॉयड पूरी तरह से स्क्रैप मटेरियल से बनाया है, जो कि मेरे लैब के आसपास पड़े होते हैं। इसे जोड़कर तैयार करने में मुझे 25,000 रुपये लगे हैं और इसमें एक स्थानीय हार्डवेयर स्टोर के एक वर्कर ने मदद की है और यह सिर्फ एक हफ्ते में ही तैयार हो गया। '

कोविड-19 वॉरबोट दिया है रोबोट का नाम

कोविड-19 वॉरबोट दिया है रोबोट का नाम

प्रोफेसर ने अपने ड्रॉयड को ‘Covid-19 Warbot' नाम दिया है। इसमें 0.5 एचपी के 3 मोटर लगाए गए हैं और एक रिचार्जेबल बैटरी का पैक लगाया गया है। इसे कंट्रोल करने के लिए टॉय कार के ट्रांसमीटर और रिसीवर से जोड़ा गया है। फुल चार्ज रहने पर यह रोबोट 15 किलो का भार लेकर 1.5 घंटे तक चल सकता है। इसके ऊपर सामान रखने के लिए एक प्लास्टिक कि ट्रे फिट की गई है। हरजीत को उम्मीद है कि इसके जरिए पीपीई किट पर भी निर्भरता घट सकती है और यह कोरोना अस्पतालों में काम करने के तरीके को ज्यादा आसान बना सकता है।

(पहली दोनों तस्वीर सौजन्य- इंडियन एक्सप्रेस)

रोबोट को और बेहतर करने की गुंजाइश

रोबोट को और बेहतर करने की गुंजाइश

रोबोट को विकसित करने वाले प्रोफेसर का कहना है कि अभी इसमें कई और प्रोग्रामिंग की क्षमता है, जिससे इसके उपयोग को और बेहतर बनाया जा सकता है। इसके तहत इसकी ऐसी प्रोग्रामिंग की जा सकती है, जिससे इसके हर बेड को अटेंड करने के लिए एक वक्त निश्चित किया जा सकता है, थर्मल स्कैनिंग में भी इसकी मदद ली जा सकती है, जिससे कि मरीजों के तापमान की भी जांच कर सकता है और इसे सोलर एनर्जी से भी संचालित किया जा सकता है। बहुत करने की संभावना है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बहुत ही बेहतरीन गजेट्स का इस्तेमाल अभी नहीं हो सका है।

त्रिपुरा में अबतक कुल 251 मामले

त्रिपुरा में अबतक कुल 251 मामले

बता दें कि त्रिपुरा में स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार तक के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस के कुल 251 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 171 ठीक हो चुके हैं। राहत की बात ये है कि इस जानलेवा बीमारी से अभी तक यहां किसी की मौत नहीं हुई है। इस समय राज्य में 11,281 लोगों को निगरानी में रखा गया है, जिनमें 510 क्वारंटीन सेंटर में हैं, जबकि 10,771 को होम क्वारंटीन किया गया है।

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English summary
Tripura professor makes scraps robot for coronavirus hospitals
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