'मेरे या सरकार खिलाफ लिखिए कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन......' इस मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से की सीधी बात
अगरतला, 21 सितंबर: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा ने पत्रकारों से सीधी बात की है और कहा है कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी सरकार या खुद उनके खिलाफ कुछ लिखने की आवश्यकता है तो जरूर लिखनी चाहिए। लेकिन, उन्होंने इसके साथ ही पत्रकारों को कुछ नसीहतें भी दी हैं। आज के समय में जब कुछ पत्रकार सरकारों पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने जैसे आरोप लगाते हैं, उसमें सीधे मुख्यमंत्री के स्तर पर पत्रकारों से सरकार और सीएम की कमियां उजागर करने का आह्वान करना बहुत ही बड़ी बात है, लेकिन इसके साथ ही पत्रकारों की जिम्मेदारी भी और बढ़ जाती है।

त्रिपुरा न्यूजपेपर सोसाइटी के सम्मेलन में बोले सीएम माणिक
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा ने बुधवार को पत्रकारों को आगाह किया कि वह सोशल मीडिया की वजह से जिस चीज का सामना कर रहे हैं, उसके प्रति सावधान रहें, क्योंकि खबरों को लोग परंपरागत तौर पर जिस तरीके से लेते आए थे, उस स्थिति में कमी आ गई है। साहा ने पत्रकारों को यह भी भरोसा दिया है कि अगर वह सरकार के खिलाफ कोई रिपोर्ट छापना चाहते हैं तो बेखौफ होकर रिपोर्टिंग करें। त्रिपुरा न्यूजपेपर सोसाइटी के पहले वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोग अखबार ज्यादा पढ़ते थे, लेकिन अब समय की कमी और सोशल मीडिया की वजह से इस ट्रेंड में बदलाव आ गया है।

'आपको विलुप्त हो जाने के बारे में चिंता करनी चाहिए'
त्रिपुरा के सीएम ने कहा, 'एक वक्ता अभी यहां कह रहे थे कि सिर्फ 25 फीसदी रीडरशिप ही अभी भी अखबारों के साथ जुड़ी हुई है। टीवी चैनलों की व्यूअरशिप में करीब 45 फीसदी की गिरावट आई है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। यह इसलिए क्योंकि पहले हमारे पास काफी वक्त होता था और कई न्यूज पेपरों को पढ़ने की आदत थी। लेकिन, अब वक्त की कमी के चलते लोग मोबाइल स्क्रीन पर चीजें देखते हैं। आपको विलुप्त हो जाने के बारे में चिंता करनी चाहिए। '

सीएम के सामने विज्ञापन नीति की भी उठी बात
मुख्यमंत्री की ओर से यह टिप्पणी वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों की ओर से यह आरोप लगाने के बाद आई कि पिछली लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौरान और 2018 में जब से पिछली बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार सत्ता में आई तब अखबारों और रिपोर्टरों को हमलों का सामना करना पड़ा। वरिष्ठ संपादक और त्रिपुरा न्यूजपेपर सोसाइट के अध्यक्ष सुबल कुमार डे ने आरोप लगाया कि पिछले 4.5 वर्षो में 42 पत्रकारों पर हमले हुए, लेकिन हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके मुताबिक त्रिपुरा में संशोधित सरकारी विज्ञापन नीति ने मीडिया के मालिकों को मुश्किल में डाल दिया है।

'आपको विचार देने हैं तो कृप्या संपादकीय लिखिए'
लेकिन, इसके साथ ही सीएम साहा ने एक प्रवृत्ति की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, 'कई बार समाचार विचार बन जाते हैं। कुछ शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं। हमारे रिश्ते के बीच में दरार आ जाती है। यह वांछित नहीं है। यदि आपको विचार देने हैं तो कृप्या संपादकीय लिखिए। लेकिन, सभी न्यूज आर्टिकल में व्यूज होते हैं और यह वांछनीय नहीं है। आपने 35 वर्ष की सरकार देखी है। हमें उससे आजादी मिली है। कृप्या यह सुनिश्चित करें कि चीजें वापस वहां ना जाएं।'

मेरे या सरकार के खिलाफ लिखें, लेकिन सच लिखें- सीएम साहा
लेकिन, मुख्यमंत्री ने एक ऐसी बात कह दी, जिसकी उम्मीद शायद ही आज देश में कहीं के भी पत्रकार करेंगे। उन्होंने पत्रकारों से सीधा कह दिया है कि आवश्यक हो तो उनके खिलाफ लिखें, उनकी सरकार के खिलाफ लिखें, लेकिन सच लिखें। त्रिपुरा के सीएम बोले, 'मेरे या हमारे (सरकार) खिलाफ लिखिए, कोई दिक्कत नहीं है। सकारात्मक लिखा होगा तो इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। मैं अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और कैबिनेट सदस्यों से कहूंगा कि उसी हिसाब से कार्य करें। आप हमारी गलतियों को सुधार सकते हैं। '












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