'आदिवासी कल्याण' मोदी सरकार की प्राथमिकता, केंद्र की इन योजनाओं से बदली छत्तीसगढ़ की तकदीर
जनजातीय आबादी भारतीय समाज का अभिन्न अंग रहा है। सदियों से यह समुदाय अपने जीवनयापन के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। सामान्य तौर पर यह समाज बहुतायत में दूर जंगलों में निवास करता है। शायद इस कारणवश, उन तक पर्याप्त स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसी आम नागरिक सुविधाएँ भी सही तरीके से नहीं पहुंच पाती थी।
भारत विश्व में दूसरा सबसे अधिक जनजातीय आबादी वाला देश है और भारत में छत्तीसगढ़ राज्य सर्वाधिक आदिवासियों का घर है। 2011 की जनगणना के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाती की आबादी 30.62 प्रतिशत थी। पिछले एक दशक से केंद्र सरकार आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

'पीएम जनमन' योजना के तहत, आदिवासी समुदायों को आवास, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और उचित पोषण की सुविधा पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा, 'प्रधानमंत्री-वनधन' योजना और 'महतारी वंदन योजना' जैसी पहलों ने आदिवासी समुदायों की आर्थिक सुरक्षा और समाजिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। 'प्रधानमंत्री-वनधन' योजना के तहत, आदिवासी समुदायों को वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उन्हें उत्पाद की अच्छी कीमत मिले। इसके साथ ही, उन्हें उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के लिए भी सहायता दी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए, सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और समाजिक उन्न्यन के लिए 'महतारी वंदन योजना' शुरू की है। इसके अंतर्गत, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके साथ ही आदिवासी स्वाभिमान को सम्मान देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल ही भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई उज्जवला योजना, जल जीवन, मनरेगा, राशन कार्ड और पीएम-किसान सम्मान निधी जैसी योजनाएं भी छत्तीसगढ़ की गरीब जनता के उत्थान के लिए अहम भूमिका निभा रही हैं। केंद्र सरकार की ये पहल न केवल छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों के उत्थान में मददगार साबित हो रही है, बल्कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिति में भी सुधार देखने को मिल रहा है।












Click it and Unblock the Notifications