तेलंगाना में कांग्रेस- बीआरएस का कड़ा मुकाबला, 2024 की तय होगी दिशा
तेलंगाना में कांग्रेस को पिछली बार विधानसभा चुनाव में कुल 28.4 प्रतिश वोट शेयर मिला था। जिसे अब बढ़ाने की प्रयास किए जा रहे हैं। तेलंगाना कांग्रेस उन क्षेत्रों में अधिक फोकस कर रही है, जहां बीआरएस कुछ नेता रूठे हैं। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि इस बार तेलंगाना चुनाव में स्थिति अलग हो सकती है। कांग्रेस और बीआरएस के बीच कड़ी टक्कर हो सकती है। तेलंगाना चुनाव कांग्रेस के लिए एक ऐसा मौका है, जिसके जरिए 2024 के लिए भाजपा को चुनौती दी जा सकती है।
बीआरएस के चुनावी रणनीतिकारों में शामिल एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि तेलंगाना में बीआरएस का कोई विकल्प फिलहाल नहीं है। ना तो भाजपा और ना ही कांग्रेस भारत राष्ट्र समति की जगह ले सकती हैं। हालांकि नौ साल के कार्यकाल के बाद सत्ता विरोधी लहर होना तय है। लेकिन ये केवल उन लोगों के लिए हो जो निरंतर बदलाव चाहते हैं। लेकिन तेलंगाना में इसका अधिक असर बीआरएस के प्रदर्शन पर नहीं दिखेगा।

कांग्रेस की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस बार तेलंगाना में एंटी इंकम्बेंसी (anti incumbency) हो सकती है। मुकाबला कड़ा होगा। हालांकि बीआरएस को इस बात की जानकारी है। लेकिन इससे बीआरएस को अधिक नुकसान नहीं होने वाला। बीआरएस की सीटें अधिक प्रभावित नहीं होंगी।
वहीं दूसरी ओर दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस को इस बार डबल फायदा होने वाला है। एंटी इंकम्बेंसी के अलावा टिकट को लेकर भी कांग्रेस काफी सोची समझी रणनीति से आगे बढ़ेगी। कैंडिडेट्स को नाम फाइनल करने में जाति और समुदाय के संतुलन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कांग्रेस पिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों पर भी फोकस कर रही है।
तेलंगाना में कांग्रेस ने अपनो घोषणा पत्र में 6 बड़े वादे किए हैं। कांग्रेस की गारंटियां विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए है। तेलंगाना कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक लोगों को यह बताना है कि इन गारंटी से उन्हें एक महीने में कितना फायदा होगा। उनके हाथ में कितनी अतिरिक्त नकदी होगी। अलग-अलग योजनाओं को एक साथ मिलाकर, एक परिवार प्रति माह 15,000 रुपए तक बचा सकता है।












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