Karnataka Election Result: कांग्रेस के पंजे की पांच गलतियां, जिन्होंने दिया हार का ये बड़ा दर्द
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नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है। कांग्रेस का आखिरी किला कर्नाटक भी उसके हाथ से फिसल गया है। एक और चुनाव में फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी का जलवा देखने को मिला है। उनकी रणनीति ने कमाल किया और दक्षिण भारत में कमल खिला है। बीजेपी अकेले बहुमत हासिल करती हुई नजर आ रही है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव को 2019 से पहले सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इस मुकाबले में बीजेपी के प्रदर्शन से साफ हो गया कि मोदी की लहर अभी भी कायम है। माना जा रहा है कि 2019 के आम चुनाव में इसका असर जरूर नजर आएगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कर्नाटक में कांग्रेस से कहां गलती हुई, वो 5 फैक्टर जो कांग्रेस के लिए बैकफायर कर गए...

लिंगायत फैक्टर
लिंगायत फैक्टर इस बार के विधानसभा चुनाव में अहम माना जा रहा था। कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित कर बड़ा दांव चला था। उस समय ये कयास लगाए जा रहे थे कि अगर कांग्रेस पार्टी का ये दांव सफल रहा और बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले लिंगायत वोटर अगर कांग्रेस की ओर शिफ्ट हुए तो कांग्रेस एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर सकती है। हालांकि अब तक के नतीजों से साफ नजर आ रहा है कि लिंगायत वोटरों ने बीजेपी पर ही भरोसा जताया। इसका असर चुनाव नतीजों में भी नजर आ रहा है, जहां बीजेपी सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने में सफल रही। कहीं न कहीं कांग्रेस का ये दांव कामयाब नहीं हो सका।

आंतरिक गुटबाजी, मंत्रियों का प्रदर्शन
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस की हार हुई इसमें अहम फैक्टर पार्टी के अंदर जारी गुटबाजी भी रही। दरअसल जिस तरह से सिद्धारमैया को कांग्रेस नेतृत्व ने फ्री हैंड दिया इससे पार्टी नेताओं में नाराजगी नजर आ रही थी। चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे में भी सिद्धारमैया की ही चली। इतना ही नहीं सिद्धारमैया सरकार के कई मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड भी जनता की नजर में सही नहीं था। मंत्रियों पर अपना काम ठीक से नहीं करने के आरोप लग रहे थे। इन सभी फैक्टर ने चुनाव में असर दिखाया और नतीजे कांग्रेस के खिलाफ गए।

बीएसपी-एनसीपी को साथ लेकर जेडीएस का मैदान में आना
कर्नाटक में कांग्रेस की हार में अहम वजह जेडीएस की मजबूत उपस्थिति भी रहा। जिस तरह से जेडीएस ने इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और एनसीपी से गठबंधन किया। इसका असर चुनाव में नजर आया। जेडीएस ने इस बार पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें दर्ज की। हालांकि उनकी इस बढ़त का नुकसान कहीं न कहीं कांग्रेस को ही उठाना पड़ा। बीजेपी ने उनके बीच की लड़ाई का फायदा उठाया। खास तौर से एनसीपी और बीएसपी का कांग्रेस छिटकना कर्नाटक में कांग्रेस की हार की अहम वजह बना।

एंटी इन्कमबेंसी फैक्टर
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार में एक फैक्टर एंटी इन्कमबेंसी भी रहा। सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के हित में कई काम किए। इंदिरा कैंटीन समेत कई अहम योजनाओं की शुरूआत की। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में भी कई अहम वादों का जिक्र किया, हालांकि पार्टी का ये दांव सफल नहीं हो सका। बीजेपी ने जिस तरह से चुनाव में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार की योजनाओं और फंड का राज्य में ठीक से इस्तेमाल नहीं करने का आरोप लगाया। ये सभी दावे पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुए।

चुनाव प्रचार की रणनीति
कर्नाटक चुनाव के नतीजों से एक बार फिर साबित हो गया कि कांग्रेस के रणनीतिकारों का कैंपेन लोगों के बीच जगह बना सका। खास तौर से राहुल गांधी और सिद्धारमैया जनता की नब्ज पकड़ने में असफल रही। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जो चुनावी रणनीति बनाई, और जिन मुद्दों को उठाकर कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार को घेरा। उसका असर चुनाव नतीजों में साफ नजर आया। चुनाव के आखिरी दौर में पीएम मोदी का चुनाव प्रचार के लिए उतरना भी कांग्रेस की रणनीति में सेंध लगाने में सफल रहा।












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