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दिल्‍ली की चांदनी चौक सीट पर होगा रोचक मुकाबला

lok sabha election
नई दिल्‍ली। 10 अप्रैल को दिल्‍ली की चांदनी चौक सीट पर लोकसभा चुनावों के लिए वोट डाले जाएंगे और इस दौरान यहां पर चुनावों का शीर्ष मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट से कांग्रेस के कपिल सिब्‍बल, आप पार्टी के आशुतोष और बीजेपी के हर्षवर्धन एक दूसरे को टक्‍कर देते नजर आएंगे। साल 2009 में सिब्‍बल ने बीजेपी के विजेंद्र गुप्‍ता को 2,00,710 वोटों से हराया था।

पढ़ें-2014 के शीर्ष उम्मीदवार

कौन हैं कपिल सिब्‍बल
66 वर्षीय कपिल सिब्‍बल पेशे एक वकील हैं और वह यूपीए सरकार में कई मंत्रालयों की जिम्‍मेदारी संभाल चुके हैं जिनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास, कम्‍यूनिकेशन एवं आईटी और विधि एवं न्‍याय शमिल हैं। सिब्‍बल पहली बार साल 1998 में बिहार से राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए थे। इसके बाद साल 2004 में उन्‍होंने जब लोकसभा चुनाव लड़ा तो बीजेपी की स्‍मृति र्इरानी को करीब 80,000 वोटों से हराया था। वहीं साल 2009 के चुनावों में उन्‍होंने बीजेपी के विजेंद्र गुप्‍ता को दो लाख से ज्‍यादा वोटों से शिकस्‍त दी थी।

कौन हैं आशुतोष
आशुतोष हिन्‍दी पत्रकारिता जगत का एक मशहूर चेहरा हैं और उन पर अन्‍ना हजारे की अगुवाई में शुरू हुए जनलोकपाल आंदोलन का खासा प्रभाव है। इससे प्रभावित होकर ही आशुतोष ने एक किताब भी लिखी थी जिसका शीर्षक 'अन्‍ना:13 डेज दैड अवेकेंड इंडिया' था। आशुतोष पहले ऐसे गैर-अंग्रेजी पत्रकार हैं जिन्‍हें संयुक्‍त गणराज्‍य की ओर से दी जाने वाली प्रतिष्ठित छात्रवृत्रि हासिल हुई है। उत्‍तर प्रदेश के आशुतोष इस साल जनवरी में आप पार्टी में शामिल हुए थे और अब वह बतौर प्रवक्‍ता इस पार्टी के सदस्‍य हैं।

कौन हैं हर्षवर्धन
बीजेपी के नेता हर्षवर्धन पूर्व आरएसएस सदस्‍य भी रह चुके हैं और वह पेशे से एक डॉक्‍टर हैं। हर्ष वर्धन साल 2013 में हुए चुनावों के दौरान बीजेपी की ओर से मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार थे। साल 1993 और 1998 में जब दिल्‍ली में बीजेपी की सरकार थी तो हर्षवर्धन के पास कई अहम विभागों की जिम्‍मेदारी थी। 60 वर्षीय हर्षवर्धन ने एक भी विधानसभा चुनाव नहीं हारा है लेकिन वह दिल्‍ली में बीजेपी के बहुमत से बस कुछ ही कदम दूर रह जाने की वजह से सरकार नहीं बना सके थे।

क्‍या सोचते हैं विशेषज्ञ
कपिल सिब्‍बल को इस बार एंटी-इनकम्‍बेंसी की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन कांग्रेस के खिलाफ वोट हर्षवर्धन और आशुतोष के बीच बंट जाने से उन्‍हें हो सकता है आखिरी में कुछ फायदा हो जाए।

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