बस एक पल के लिए नरेंद्र मोदी से मिलना चाहती है ये महिला

कल दिल्ली रवाना होने से पहले यहां संवाददाताओं से बातचीत में शर्मिला ने कहा मैं प्रधानमंत्री से मिलने की कोशिश करूंगी और 1980 में राज्य में इस अधिनियम के लागू होने के बाद से लोगों के समक्ष आ रही समस्याओं को उजागर करूंगी. मणिपुर की 42 वर्षीय लौह महिला ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से इस अधिनियम को निरस्त करने का अनुरोध भी करेंगी।
जंतर मंतर पर 2006 में एक भूख हड़ताल करने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी किये जाने के बाद शर्मिला राष्ट्रीय राजधानी रवाना हुयी। नवंबर 2000 में इंफाल हवाई अड्डे के निकट असम राइफल के जवानों द्वारा दस नागरिकों की कथित हत्या के बाद, अधिनियम को निरस्त करने की मांग को लेकर शर्मिला ने अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
पोरोमपट के सरकारी अस्पताल में राज्य सरकार नाक के जरिए शर्मिला को खाना खिला रही है और इस अस्पताल को उनके लिए जेल में तब्दील कर दिया गया है। उनकी यह यातना ही उनका संघर्ष है, जो उन्हें देशहित में काम करने व अपने रास्ते पर अग्रसर रहने में मदद करता है।












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