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कैसे किसानों और सिखों की नाराजगी दूर करने में पीएम मोदी की मदद कर रहा है IRCTC

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नई दिल्ली- पंजाब के किसान दिल्ली के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ आर-पार का आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन इस दौरान उन किसानों और सिखों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीधा संदेश पहुंचाने के काम में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरटीसी) जुटा है। आईआरसीटीसी पंजाब के किसानों और सिखों तक पीएम मोदी के खास संदेश वाला एक ईमेल भेज रहा है, जिसमें 47 पेज का एक पीडीएफ एटैचमेंट जुड़ा है, जिसका टाइटल है- 'पीएम मोदी एंड हिज गवर्मेंट्स स्पेशल रिलेशनशिप विद सिख'। इस बुकलेट में पंजाब और सिखों के लिए मोदी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र किया गया है और उसमें पीएम मोदी की खास भागीदारी बताने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इसको लेकर सवाल भी उठने शुरू हो चुके हैं।

किसानों और सिखों तक अपनी बात पहुंचने की कोशिश

किसानों और सिखों तक अपनी बात पहुंचने की कोशिश

आईआरसीटी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सिद्धार्थ सिंह ने कहा है कि 'पीएम मोदी एंड हिज गवर्मेंट्स स्पेशल रिलेशनशिप विद सिख' वाला बुकलेट कुछ दिन पहले ही जारी हुआ है और सरकार के सभी विभाग इसे लोगों को मेल कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह उन लोगों को भेजा जा रहा है जिनका सरनेम 'सिंह' है और जो पंजाब के रहने वाले हैं। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक यह मेल सरकार की ओर से जनता तक अपनी बात पहुंचाने की एक कोशिश है और इसका इससे ज्यादा कुछ भी मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। पंजाब के किसानों और सिख समुदाय के लोगों को यह मेल cim@irctc.-co.in मेल आईडी से भेजा गया है। यह मेल उन ईमेल आईडी पर भेजा गया है, जो लोगों ने आईआरसीटी से ट्रेनों के टिकट बुक कराने के लिए उसकी वेबसाइट पर रजिस्टर करवा रखा है।

आईआरसीटीसी किसानों तक पहुंचा रहा है पीएम मोदी का संदेश

आईआरसीटीसी किसानों तक पहुंचा रहा है पीएम मोदी का संदेश

ये मेल एक साथ हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में बतौर पीडीएफ एटैचमेंट भेजे गए हैं। इस मेल की शुरुआत पीएम मोदी को दी गई 'कौमी सेवा अवार्ड' के जिक्र से की गई है और इसमें सरकार की ओर से सिखों के लिए उठाए गए 13 प्रमुख कार्यों का जिक्र है। इसमें श्री हरमंदिर साहिब को एफसीआरए के लिए रजिस्ट्रेशन की मंजूरी, वैश्विक संगत भागीदारी की अनुमति, पहली बार लंगर पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगने, करतारपुर कॉरिडोर तक आसानी से पहुंच, तीन दशकों तक नजरअंदाज किए जाने के बाद सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाना, जालियांवाला बाग मेमोरियल बनाकर प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों का सम्मान, काली सूची से हटाकर कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने जैसी बातों का हवाला दिया गया है। इस बुकलेट का प्रकाशन सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने किया है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई तस्वीरें लगी हुई हैं।

'मेल' मुहिम पर अलग-अलग प्रतिक्रिया

'मेल' मुहिम पर अलग-अलग प्रतिक्रिया

हालांकि, आईआरसीटीसी की इस पहल पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। मसलन, जेपी सिंह ने ट्वीट कर कहा है, 'क्या आईआरसीटीसी को हमारा डेटा पार्टी के कैंपेन के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत है? यह सरकार की ओर से सिखों की सरकार-विरोधी भावनाओं को ठंडा करने की सोची-समझी मुहिम भी है। अच्छी रणनीति है।' चेन्नई के गुरु नानक एजुकेशनल सोसाइटी के राजिंदर सिंह भसीन कहते हैं कि सरकार अपनी भावनाएं लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का फायदा उठा रही है। उन्होंने कहा, 'मैं हैरान हूं कि सरकार किसानों की मांगों को सुन क्यों नहीं रही है।'

18 दिनों से आंदोलन पर डटे किसान

18 दिनों से आंदोलन पर डटे किसान

गौरतलब है तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का केंद्र फिलहाल दिल्ली का सिंघु और टिकरी बॉर्डर बना हुआ है, जहां 18 दिनों से हजारों किसान अपनीं मांगों लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सर्दी बढ़ गई है, लेकिन अपनी मांगों पर अड़े किसानों का हौसला नहीं टूटा है। शनिवार को किसानों ने देश के तकरीबन 60 फीसदी टॉल प्लाजा को फ्री कर दिया था और सोमवार को उन लोगों ने भूख हड़ताल की घोषणा कर रखी है। हालांकि, कई दिनों बाद नोएडा-दिल्ली के चिल्ला बॉर्डर पर रास्ता खोल दिया गया है। इस बीच सरकार किसानों की ओर से उसके प्रस्तावों को ठुकराने के बावजूद शांत नहीं बैठी है और बातचीत के लिए लगातार तैयार रहने के संदेश दे रही है। लेकिन, किसान तीनों कानूनों को वापस लेने से कम पर किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं हैं।

इसे भी पढ़ें- किसानों के समर्थन में कल AAP आईटीओ पर करेगी सामूहिक उपवास

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English summary
This is how IRCTC is helping PM Modi to overcome the displeasure of farmers and Sikhs
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