• search

नाबालिग पत्नी से सेक्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी अनसुलझे हैं ये प्रश्न

Written By: प्रेम कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बहुत कठिन मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की है और ऐसा करते हुए धारा 375 के उस प्रावधान को असंवैधानिक ठहराया है जिसमें 15 से 18 साल के बीच की नाबालिग पत्नी से जबरदस्ती संबंध को बलात्कार नहीं माना गया था। जब बाल विवाह अपराध हो, तो बालिका वधू से जबरन शारीरिक संबंध बलात्कार क्यों न हो?- इसी सवाल से केन्द्र सरकार और मौजूदा कानून के पैरोकारों को निरुत्तर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इस एक सवाल का उत्तर खोजते हुए अदालत ने समाज में परंपरा, संस्कृति और मान्यताओं की धूलभरी परतों की भी सफाई की है। लेकिन ऐसा करते हुए कई और जटिल सवालों ने भी जन्म लिया है।

    Supreme Court
    नाबालिग को सेक्स के लिए ‘हां’ कहने का विवेक नहीं

    नाबालिग को सेक्स के लिए ‘हां’ कहने का विवेक नहीं

    अगर जबरदस्ती की परिस्थिति हटा दी जाए, तो क्या 15 से 18 साल के बीच की नाबालिग पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं होगा? सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद तब भी यह बलात्कार ही होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 15 से 18 साल के बीच यानी नाबालिग पत्नी को सेक्स के लिए सहमति देने का भी अधिकार नहीं है। वाकई जो नाबालिग है, सही-गलत की सोच जिसके पास नहीं है और जिसे वोट देने के लायक तक हम नहीं समझते, उसके पास सेक्स के लिए सहमति देने का विवेक कैसे हो सकता है?

      Supreme Court: अगर बनाया नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध तो माना जाएगा रेप । वनइंडिया हिंदी
      जो सेक्स के लिए सहमति नहीं दे सकती, उसका विवाह कैसे हो गया?

      जो सेक्स के लिए सहमति नहीं दे सकती, उसका विवाह कैसे हो गया?

      अगले क्षण ही यह सवाल खड़ा होता है कि जिस बालिका को सेक्स के लिए सहमति देने के लायक नहीं समझा जा रहा हो, उसे विवाह के लिए अनुमति देने के लायक कैसे समझ लिया गया? अगर बालिका ने सहमति दी भी है तो उसे विवाह के लिए सहमति क्यों मानी जाए? एक नाबालिग सहमति देने के लायक हो ही नहीं सकती। ऐसे में नाबालिग पत्नी से मैरिटल रेप का जो गुनाह हुआ है या होने वाला है, उसकी वजह तो यही विवाह है। ऐसे में इस विवाह के लिए जिम्मेदार लोगों को क्यों नहीं रेप घोषित की जा रही वारदात का जिम्मेदार ठहराया जाए? यह अपराध इतना भयावह है कि बलात्कारी पति को फांसी हो सकती है तो इस अपराध के लिए परिस्थितियां, बल्कि सुनिश्चित परिस्थितियां तैयार करने वाले लोगों को क्यों बख्शा जाए? न सिर्फ लड़की वाले, बल्कि लड़के पक्ष के लोगों को भी इस गुनाह की सज़ा मिलनी चाहिए। इस परिस्थिति पर विचार होना बाकी है।

      नाबालिग पति को भी क्यों न मिले रियायत?

      नाबालिग पति को भी क्यों न मिले रियायत?

      जरा सोचिए कि अगर पत्नी की ही तरह पति भी नाबालिग हो और वह अपनी पत्नी से बंद कमरे में जबरदस्ती कर बैठे, तो नाबालिग पति को भी कानून की नज़र में रियायत क्यों नहीं मिलनी चाहिए? नाबालिग पति के केस में खुद पति भी किशोर है। उसे भी सही-गलत की समझ एक एक बालिग के मुकाबले नहीं है और इसलिए वह वोट देने का अधिकार भी नहीं रखता। ऐसे में समाज ने उसे जिन परिस्थितियों में नाबालिग पत्नी के साथ सहवास सुलभ कराया है, उसका अंजाम वह बलात्कारी बनकर क्यों भुगते? क्यों उसे मौत की सज़ा दी जाए?

      क्यों किया जाए बलात्कार का इंतज़ार?

      क्यों किया जाए बलात्कार का इंतज़ार?

      अगर पति बालिग हो और पत्नी नाबालिग, उस मामले में भी सबसे पहले शादी को ही अवैध और अपराध मानना चाहिए। नाबालिग पत्नी की शिकायत तक इंतज़ार क्यों किया जाए? क्या कानून एक अपराध को होने देने तक इंतज़ार करने और तब उस पर अमल करने की प्रक्रिया है? कतई नहीं। पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध के दौरान कब ना-ना हां में बदल जाता है, इसका अंदाजा किसी को नहीं होता। कौन सी ना का मतलब विरोध है, कौन सी ना का मतलब विरोध नहीं है, यह समझते हुए पति की जिन्दगी बीत जाती है। ऐसे में एक नया नवेला दुल्हा अपनी नाबालिग दुल्हन के पास हो, गुनाह तो यही है। आगे जो कुछ होता है, होने वाला होता है उसे गुनाह कहा जाए, इससे पहले ये जरूरी है कि इस गुनाह की पृष्ठभूमि को ही उखाड़ फेंका जाए।

      दोष समाज का, दोषी सिर्फ दुल्हा कैसे?

      दोष समाज का, दोषी सिर्फ दुल्हा कैसे?

      जिस समाज में दुल्हन अपने पति की चिता में जिन्दा जल जाया करती थी, जिस समाज में माथे का सिन्दूर मिटने का मतलब आजीवन श्वेत वस्त्र, फर्श पर बिस्तर और पेट के लिए रूखा-सूखा होता हो, वहां एक नाबालिग न शादी के लिए सहमति दे सकती है, न सेक्स और न बच्चे पैदा करने के लिए ही। लेकिन, इस परम्परा का दोष उस दुल्हे पर डाला जाना, जिसने या तो थोड़े समय पहले नाबालिग उम्र की दहलीज को पार किया हो या खुद भी नाबालिग ही हो, कहां तक जायज है?

      सेक्स शिक्षा के बिना पत्नी को पत्नी समझें या बालिग-नाबालिग?

      सेक्स शिक्षा के बिना पत्नी को पत्नी समझें या बालिग-नाबालिग?

      जिस समाज में सेक्स शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती। जिस समांतर सामाजिक व्यवस्था से अधकचरा सेक्स ज्ञान मिलता है वह पत्नी को नाबालिग और बालिग के रूप में नहीं, सिर्फ और सिर्फ पत्नी के ही रूप में देखने का आदि होता है। ऐसे में नाबालिग पत्नी के आरोप मात्र से नये नवेले दुल्हे की ज़िन्दगी अभिशप्त हो जाए, यह ज्यादती नहीं तो और क्या है? अगर नाबालिग पत्नी आरोप न लगाए, तो यह मामला शुरू भी नहीं होता।

      कानून ने ही माना है सेक्स को पति का अधिकार

      कानून ने ही माना है सेक्स को पति का अधिकार

      बलात्कार चाहे शादी से पहले हो या बाद में, पति करे या कोई और, नाबालिग उम्र में हो या फिर बालिग उम्र में, बलात्कार हर हाल में बलात्कार होता है। अगर शादीशुदा पत्नी अपने पति पर बलात्कार का आरोप लगाए, उसे भी गम्भीरता से लेने की जरूरत है। पत्नी बालिग हो जाए तो पति को उसके साथ जबरदस्ती करने का अधिकार भी नहीं मिल जाता। मगर, दुर्भाग्य से सेक्स को पति का अधिकार मान लिया गया है। सेक्स के लिए मना करने को तलाक का आधार मानना इसी सोच का नतीजा है।

      बलात्कार की घटनाओं में फर्क होता है, सज़ा में भी हो फर्क

      बलात्कार की घटनाओं में फर्क होता है, सज़ा में भी हो फर्क

      बलात्कार जैसे वीभत्स शब्द का उपयोग करते समय हमें फर्क सीखना होगा। एक नाबालिग बच्ची से बलात्कार, पत्नी से बलात्कार, पड़ोसी से बलात्कार, छात्रा, रिश्तेदार और निर्बल नारी से बलात्कार हर मामला एक-दूसरे से जुदा है। सभी बलात्कार एक जैसे न हैं, न हो सकते हैं। कानून को अभी बलात्कारों में फर्क करना नहीं आया है। इससे स्थिति जटिल हो गयी है। आखिर निर्भया कांड में हुए बलात्कार को हम नाबालिग या बालिग पत्नी के साथ बलात्कार या फिर बुजुर्ग महिला से बलात्कार की घटनाओं के साथ कैसे देख सकते हैं? इसलिए नाबालिग पत्नी से संबंध बनाना बलात्कार की परिभाषा में भले आ जाए, लेकिन क्रूरतम बलात्कार से थोड़ा अलग जरूर है। इसलिए अपराधी के लिए सज़ा में भी फर्क होना चाहिए। सवाल सिर्फ सही या गलत का नहीं है, कितना सही और कितना गलत, कितनी बड़ी सज़ा और कितनी मोहलत से जुड़ा है ये सवाल।

      जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

      देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
      English summary
      Supreme Court on Tuesday rules the historic judgement by stating that sex with minor wife will count as rape. This judgement is welcomed by =everyone but some questions related to it is still unanswered.

      Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
      पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

      X
      We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more