महाराष्ट्र में किसी दुष्यंत का बाप जेल में ना होने के बावजूद ऐसे बन सकती है बीजेपी सरकार
नई दिल्ली- हरियाणा में महाराष्ट्र से ज्यादा फंसे हुए सियासी समीकरण के बावजूद दुष्यंत चौटाला की मदद से बीजेपी ने आसानी से सरकार बना ली। लेकिन, शिवसेना नेता संजय राउत कहते हैं कि महाराष्ट्र में किसी दुष्यंत का बाप जेल में नहीं है, जो भारतीय जनता पार्टी का काम आसान बना दे। शिवसेना जूनियर ठाकरे के लिए ढाई साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी की गारंटी मांग रही है, जिसे देने से बीजेपी ने दो टूक इनकार कर दिया है। शिवसेना, बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ पहले हुई किसी 50:50 डील का वास्ता दे रही है, जबकि फडणवीस ने साफ किया है कि ऐसा कोई फॉर्मूला तय ही नहीं हुआ था। ऐसे में क्या महाराष्ट्र राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है, फिलहाल लगता तो नहीं है। अभी भी वहां ऐसी संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में ही नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है।

संभावना-1: भाजपा-शिवसेना की सरकार
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच तल्खी चाहे कितनी भी बढ़ गई हो, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति को समझने वाले अभी भी मानकर चल रहे हैं कि आखिरकार सरकार देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में ही बनेगी और उसमें शिवसेना भी शामिल रहेगी। यह गठबंधन चुनाव से पहले का है और मतदाताओं ने उन्हें बहुमत (बीजेपी-105 और शिवसेना-56= 161) भी दिया है। जो लोग दोनों दलों की ओर से हो रही कड़वाहट भरी बयानबाजी को लेकर उलझन में हैं, वह जरा अपनी याददाश्त पर जोर डालें कि 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद कैसी परिस्थितियां पैदा हुई थीं। दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं थीं, फिर भी चुनाव के बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनाई, जो पांच साल तक बिना किसी दिक्कत के चली। इसबार तो दोनों पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ी हैं और उन दोनों को सरकार बनाने का मैनडेट भी मिला है। ऊपर से शिवसेना जितना शोर कर रही है उतना बीजेपी का साथ छोड़ना उसके लिए आसान भी नहीं है। क्योंकि, सिर्फ मुंबई की 36 सीटों के चुनाव नतीजे ही उसे ऐसा करने नहीं देंगे। यहां बीजेपी को 16 और शिवसेना को 14 सीटें मिली हैं। शिवसेना को मिली 14 में से भी 10 सीटों पर उसके उम्मीदवारों को वहां ज्यादा वोट मिले हैं, जहां के वार्ड में भाजपा के पार्षद हैं। ऐसे में शिवसेना जानती है कि अगर उसने भाजपा का साथ छोड़ा तो अगले बीएमसी चुनाव में उसे कितना बड़ा खतरा मोल लेना पड़ सकता है। पिछली बार भी बीजेपी उससे सिर्फ 2 सीट ही बीएमसी में पीछे रह गई थी। शिवसेना केरल से भी बड़े बजट वाले एशिया के सबसे कमाऊ निगमों में से एक बीएमसी की गद्दी को खतरे में डालेगी, ऐसा लगता तो नहीं है।
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संभावना-2: भाजपा-शिवसेना(अगर टूटी तो) और निर्दलीय
एक संभावना ये भी जताई जा रही है कि उद्धव ठाकरे की जिद को नकार कर शिवसेना के कुछ सांसद बीजेपी की सरकार में शामिल हो सकते हैं। क्योंकि, औपचारिक तौर पर सबसे बड़ी पार्टी के विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद देवेंद्र फडणवीस राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा ठोक सकते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ पहली मुलाकात में उद्धव ठाकरे ने जो बातें कही थीं, उससे भी लगता है कि उनके मन में भी इस बात का डर बैठा है कि कुछ विधायक उनका साथ न छोड़ जाएं। अब भाजपा सांसद संजय काकड़े ने दावा भी कर दिया है कि शिवसेना के 45 नवनिर्वाचित विधायक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संपर्क में हैं और वे चाहते हैं कि राज्य में उनके गठबंधन की सरकार बने। संजय काकड़े ने कहा है, 'मुझे लगता है कि इन 45 में से कुछ विधायक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को मनाएंगे और सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बनाएंगे। मुझे नहीं लगता है कि कोई दूसरा विकल्प भी है।' इन के अलावा भाजपा को 13 निर्दलीय विधायकों में से उन दो तिहाई के समर्थन का भी भरोसा है, जो उसी के बागी हैं। जानकारी के मुताबिक इनमें से अधिकतर ने सीएम फडणवीस को समर्थन देने का वादा भी किया है।

संभावना-3: शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस
शिवसेना और बीजेपी में जारी तकरार के बीच महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी भी अपनी संभावनाएं तलाशने में जुटी हुई हैं। खबरें हैं कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में कई ऐसे नेता हैं, जो बगैर-बीजेपी के शिवसेना की सरकार बनवाने की वकालत करने लगे हैं। अगर ये संभावना बनती है तो शिवसेना के 56, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक मिलकर आसानी से 288 विधानसभा सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में जादुई आंकड़े 145 को पार कर सकते हैं। लेकिन, यह फॉर्मूला जितना शिवसेना के लिए मुश्किल है, उतना ही एनसीपी और कांग्रेस के लिए भी कठिन है। इसलिए, यह फिलहाल दूर की कौड़ी ही लग रहा है।

संभावना-4: भाजपा-एनसीपी और निर्दलीय
एक अंतिम संभावना ये भी है कि बीजेपी और एनसीपी मिलकर सरकार बना ले, जिसमें निर्दलीय विधायक भी शामिल हो सकते हैं। अकेले बीजेपी (105) और एनसीपी (54) का आंकड़ा जरूरी विधायकों की संख्या 145 से कहां ज्यादा 159 तक पहुंचती है। लेकिन, महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक हालात में यह संभावना भी बहुत कम ही नजर आती है। इस चुनाव में एनसीपी ही मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी है और अगर वह भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाती है तो उसे राज्य में बहुत बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए, इस संभावना की गुंजाइश नहीं के बराबर है। इसलिए, मौजूदा परिस्थितियों में यह तय है कि समीकरण जो भी बने, अगर सरकार बनी तो फडणवीस की ही बनेगी।












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