• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

सहारनपुरः वीडियो में दिखी पुलिस की बर्बरता, पीड़ितों के परिजनों ने सुनाया दर्द

By BBC News हिन्दी
Google Oneindia News
मुसलमानों की पिटाई के वीडियो का स्क्रीनशॉट
BBC
मुसलमानों की पिटाई के वीडियो का स्क्रीनशॉट

एक वीडियो जिसमें भारतीय पुलिस मुसलमानों के एक समूह को पीटती हुई दिख रही है. इसको सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विधायक के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद लाखों लोगों ने देखा. विधायक ने वीडियो पोस्ट करते हुए इसे 'रिटर्न गिफ़्ट' बताया है.

इस वीडियो में दिख रहे पुलिसवालों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. वीडियो में पिटते हुए दिख रहे लोगों के परिवार वालों का कहना है कि उनके प्रियजन बेग़ुनाह हैं और उन्हें रिहा किया जाना चाहिए.

"ये मेरा भाई है जिसे इतनी बेरहमी से माराजा रहा है. वो बहुत चीख रहा है." अपने छोटे भाई सैफ़ की पिटाई का ये ख़ौफनाक़ वीडियो देखते हुए ज़ेबा की आंखों से आंसू बहने लगते हैं, मोबाइल थामते हुए उनके हाथ कांप रहे थे.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ज़ेबा के घर में पड़ोसी और रिश्तेदारों की भीड़ है. वो उन्हें ढांढस बंधाने आए हैं. ज़ेबा कहती हैं, "मैं इस वीडियो को देख भी नहीं पा रही हूं. उसे कितनी बुरी तरह से मारा जा रहा है."

इस परेशान करने वाले वीडियो में दो पुलिसकर्मी दीवार से सटे मुसलमानों के समूह पर लाठियां मारते दिखाई दे रहे हैं. लाठियां खा रहे इन युवाओं में ज़ेबा का भाई सैफ़ भी है.

{image-_125434226_zebasaif'ssister.jpg hindi.oneindia.com}

पुलिसकर्मियों को इन लोगों को लाठियों से पीटते हुए देखा जा सकता है. वो बेसबॉल के बल्ले की तरह लाठी घुमाते हैं और हर लाठी की आवाज़ में पिट रहे लोगों की चीखें मिल जाती हैं.

डर के मारे दुबक रहे, सिमट रहे और दीवार से सट रहे कुछ युवा कहते हैं, "बहुत दर्द हो रहा है, बहुत दर्द हो रहा है"

लेकिन लाठियां नहीं रुकती, हरी टीशर्ट पहने एक व्यक्ति दुआं में अपने हाथ जोड़ रहा है. सफ़ैद कुर्ता पहने सैफ़ को कोने में हाथ ऊपर उठाते देखा जा सकता है, मानों वो आत्मसमर्पण कर रहे हों.

24 साल के सैफ़ उन दर्जनों मुसलमान युवाओं में शामिल हैं जिन्हें बीते शक्रवार पुलिस ने हिरासत में लिया था.

शहर की जामा मस्जिद में नमाज़ के बाद हज़ारों मुसलमानों ने पैगंबर मोहम्मद पर बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा की भड़काऊ टिप्पणी के ख़िलाफ़ देश के बाक़ी हिस्सों के मुसलमानों की तरह ही प्रदर्शन किया था.

नुपुर शर्मा के बयान पर विवाद और कई मुसलमान देशों के इसकी आलोचना करने के बाद भारत सरकार ने नुपुर शर्मा को पार्टी से निकाल दिया था और कहा था कि वह किसी भी धर्म के अपमान के ख़िलाफ़ है.

सहारनपुर में हुआ प्रदर्शन अधिकतर शांतिपूर्ण था. भीड़ ने मस्जिद से लेकर शहर के घंटाकर चौक तक मार्च निकाला था.

लेकिन जब तनाव बढ़ा तो हिंदू कारोबारियों की कुछ दुकानों पर हमला किया गया जिसमें दो लोगों को मामूली चोट आई. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा.

पुलिस की तरफ़ से दर्ज एक एफ़आईआर में सैफ़ और तीस अन्य लोगों को दंगा भड़काने, हिंसा करने और अपना काम कर रहे पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उनके जीवन को ख़तरे में डालने के अलावा कई धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.

लेकिन किसी तरह गत्ता बेचकर गुज़ारा करने वाले सैफ़ के परिवार का कहना है कि वो बेग़ुनाह हैं और वो तो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं थे.

सहारनपुर पुलिस कोतवाली
BBC
सहारनपुर पुलिस कोतवाली

परिवार का दावा है कि सैफ़ घर से शाम पांच बजे के क़रीब एक दोस्त का बस का टिकट करवाने के लिए निकले थे जब रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और कोतवाली ले जाकर हवालात में डाल दिया.

ज़ेबा बताती हैं कि जब वो अपने भाई से मिलने कोतवाली गईं तो उनका भाई ज़ख़्मी हालत में था और उसके शरीर पर पिटाई के कारण नील पड़ गए थे.

ज़ेबा कहती हैं, "पिटाई की वजह से उसका शरीर नीला पड़ गया था, वो बैठ तक नहीं पा रहा था."

वीडियो जिसमें पुलिस की बर्बरता साफ़ तौर पर दिख रही है, भाजपा विधायक शलभ मणी त्रिपाठी के ट्विटर पर शेयर करने के बाद वायरल हो गया. शलभ मणी त्रिपाठी ने वीडियो के साथ लिखा था, "उपद्रवियों के लिए रिटर्न गिफ़्ट"

शलभ मणी त्रिपाठी, भारत के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में से एक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार रहे हैं. अभी तक भाजपा के किसी पदाधिकारी या बीजेपी सरकार में शामिल किसी व्यक्ति ने इस वीडियो की आलोचना नहीं की है.

बीबीसी ने सहारनपुर में ऐसे आधा दर्जन परिवारों से मुलाक़ात की है जिनका दावा है कि उनके परिजनों को शुक्रवार को हिरासत में लिए जाने के बाद सहारनपुर कोतवाली में पीटा गया था और वायरल वीडियो में उनके परिजन दिखाई दे रहे हैं.

रिश्तेदारों ने पुलिस की बर्बर पिटाई के वीडियो में उनकी पहचान भी की है. अन्य वीडियो में इन लोगों को हवालात से एक वैन में ले जाए जाते हुए देखा जा सकता है. ये वीडियो सहारनपुर कोतवाली में ही बनाया गया है. वीडियो में दिख रहे सहारनपुर कोतवाली के बोर्ड को आसानी से पहचाना जा सकता है.

सैफ
BBC
सैफ

पुलिस की रिपोर्ट में भी सहारनपुर कोतवाली का ज़िक्र है. बावजूद इसके सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक आकाश तोमर ने बीबीसी से बातचीत में साफ़ कहा कि ये वीडियो सहारनपुर का नहीं है.

वीडियो के बारे में बीबीसी के सवाल पर जवाब देते हुए आकाश तोमर ने कहा, "सहारनपुर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. सोशल मीडिया पर 2-3 वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं. अगर आप स्लोमोशन में एक वीडियो को देखें तो आपको एक दूसरे ज़िले का नाम लिखा भी दिखेगा"

हालांकि बाद में आकाश तोमर ने कहा है कि वो वीडियो की सत्यता की जांच कर रहे हैं और अगर कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

वीडियो में दिख रहे लोगों के परिजनों का कहना है कि वो हिरासत में लिए गए अपने रिश्तेदारों के बारे में थाने में पूछताछ करने गए थे लेकिन उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया.

फ़हमीदा के 19 वर्षीय बेटे सुब्हान अपने दोस्त आसिफ़ के बारे में जानकारी लेने के लिए थाने गए थे. पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया और बुरी तरह पीटा.

पीला कुर्ता पहने सुब्हान को पुलिस की लाठी से बचने के लिए फ़र्श पर गिरते हुए देखा जा सकता है. परिवार का दावा है कि सुब्हान शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने के लिए जामा मस्जिद में नहीं गए थे और ना ही उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

अपने आंसू पोछते हुए फहमीदा कहती हैं, "मेरे बेटे को बेरहमी से मारा गया है."

सहारनपुर के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार की हिंसा के बाद अब तक कुल 84 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बीबीसी से कहा, "सभी अभियुक्तों को सबूतों के आधार पर ही गिरफ़्तार किया गया है. जब हम किसी को गिरफ़्तार करते हैं तो पहले उसके हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने का वीडियो दिखाते हैं." हालांकि उनका ये बयान गिरफ़्तार किए गए कुछ लोगों के परिजनों के दावों से ठीक उलट है.

सहारनपुर में शासन की ताक़त अन्य तरीकों से भी दिखाई गई है. बुलडोज़र से उन दो मुसलमान युवाओं के घरों को आंशिक तौर पर तोड़ दिया गया जिन पर प्रदर्शन में शामिल होने और भीड़ को उकसाने के आरोप हैं.

भारत में करोड़ों लोग बिना नक्शा पास कराए या विकास प्राधिकरम से अनुमति हासिल किए बिना बनाए गए मकानों में रहते हैं लेकिन बीजेपी के शासन में अवैध निर्माण कहकर घरों को गिराना दंडित करने का चर्चित तरीक़ा बन गया है.

हाल ही में प्रदर्शनों में शामिल लोगों के 'अवैध तरीक़े से बनाए गए मकानों' को तोड़ने के आदेश को सत्ता के शीर्ष से समर्थन मिल रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ट्वीट में कहा है कि क़ानून तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ बुलडोज़र चलता रहेगा.

शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने वाले मुसलमानों की तरफ़ इशारा करते हुए योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बुलडोज़र की फोटो ट्वीट करते हुए लिखा, "शुक्रवार के बाद शनिवार आता है."

पिछले शनिवार को शहर के खत्ताखेड़ी इलाक़े की एक कच्ची कॉलोनी में किराए पर रहने वाले मुस्कान के परिवार के घर के बाहर बुलडोज़र पहुंचा और घर का मुख्य दरवाज़ा तोड़ दिया.

https://twitter.com/MrityunjayUP/status/1535507915414548481?s=20&t=YY6g4CXGmZqw6jmwsfz3uw


पुलिस मुस्कान के भाई की तस्वीर लेकर पहुंची थी और पूछा था कि क्या वो यहीं रहता है. 17 वर्षीय इस युवा को एक दिन पहले शुक्रवार को ही हिरासत में लिया गया था.

बीबीसी से बात करते हुए मुस्कान कहती हैं, "मेरे अब्बा ने पुलिस को बताया कि ये मेरा ही बेटा है और पूछा कि कुछ हुआ है क्या?"

मुस्कान कहती हैं, "उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया, बुलडोज़र चलाना शुरू कर दिया."

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस युवक ने शुक्रवार को भीड़ को भड़काया था. एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को वीडियो दिखाते हुए कहा, "यही भीड़ को भड़का रहा है."

इस वीडियो में ये युवा अपने इर्द-गिर्द इकट्ठा कम उम्र के लड़कों से कह रहा है, "इस देश का मुसलमान सो रहा है. इतिहास गवाह है कि जब भी मुसलमान उठा है, क़हर बनकर उठा है और इस बार भी क़हर बनकर उठेगा."

अपने भाई पर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए मुस्कान कहती हैं, "मेरे भाई ने कोई तोड़फोड़ नहीं की है, वो ऐसा बच्चा नहीं है जो तोड़फोड़ करता हो. ये सब झूठ है."

अधिकारियों ने बीबीसी से कहा है कि जो लोग गिरफ़्तार किए गए हैं उनके परिवारों को घर तोड़ने से पहले नोटिस दिया गया था और बतायया गया था कि उनके पास घर बनाने के लिए पर्याप्त अनुमति नहीं है.

सहारनपुर के एसपी सिटी राजेश कुमार ने बुलडोज़र से घर तोड़ने का बचाव करते हुए बीबीसी से कहा, "हमने जांच की तो पता चला कि उसका परिवार एक रिश्तेदार के अवैध निर्माण मकान में रह रहा था."

राजेश कुमार कहते हैं, "सख़्त पुलिस बंदोबस्त में नगर निगम की टीम ने घरों का दौरा किया और ये कार्रवाई की गई."

उन्होंने ये चेतावनी भी दी कि गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों के घरों को भी तोड़ा जा सकता है. वो कहते हैं, "अगर गिरफ़्तार किए गए लोगों के ख़िलाफ़ कुछ अवैध पाया जाता है तो बुलडोज़र फिर चलेगा."

प्रशासन ने मुस्कान और उनके नाबालिग भाई के किराये के घर पर बुलडोज़र चलाया और उसे आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया
BBC
प्रशासन ने मुस्कान और उनके नाबालिग भाई के किराये के घर पर बुलडोज़र चलाया और उसे आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार नवनीत सहगल ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "बुलडोज़र की कार्रवाई क़ानून के दायरे में की गई और प्रक्रिया का पालन किया गया है. इसमें कुछ भी क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं है."

भारत के शीर्ष क़ानून विशेषज्ञों, जिनमें पूर्व जज और कई चर्चित अधिवक्ता शामिल हैं, के समूह ने पुलिस के अभियुक्तों की पिटाई करने और बुलडोज़र से घर गिराए जाने के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा है.

उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर "प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से और ग़ैर क़ानूनी रूप से प्रताड़ित करने के लिए" पुलिस को प्रोत्साहित करने के आरोप लगाते हुए कहा है कि ताज़ा कार्रवाइयों ने "देश की अंतरआत्मा को झकझोर दिया है."

इस पत्र में कहा गया है, "सत्ताधारी प्रशासन द्वारा ऐसा बर्बर दमन क़ानून के शासन का अस्वीकार्य ध्वंस है और नागरिकों के अधिकारों का हनन है. ये राष्ट्र की ओर से मिले संवैधानिक और मूल अधिकारों का मखौल उड़ाना है."

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार पर हर तरह की विरोधी आवाज़ का दमन करने के आरोप लगाए हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया बोर्ड के चेयरमैन आकार पटेल ने एक बयान में कहा, "भारत सरकार चुनिंदा और शातिर तरीके से उन मुसलमानों पर नकेल कस रही है जो बोलने की हिम्मत करते हैं और अपने साथ हो रहे भेदभाव के ख़िलाफ़ शांतिपूर्वक तरीक़े से अपना विरोध व्यक्त करते हैं."

मुन्नी बेग़म का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को हिरासत में लिया और जब उनके पति पता करने थाने गए तो उन्हें भी गिरफ़्तार कर लिया गया
BBC
मुन्नी बेग़म का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को हिरासत में लिया और जब उनके पति पता करने थाने गए तो उन्हें भी गिरफ़्तार कर लिया गया

"प्रदर्शनकारियों का अत्याधिक बल प्रयोग कर दमन करना, इकतरफा गिरफ़्तारियां करना और प्रशासन का लोगों को उनके घर तोड़कर दंडित करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों और मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का खुला उल्लंघन है."

सहारनपुर की ही रहने वाली मुन्नी बेग़म परेशान हैं. उनके बेटे अब्दुल समद और पति फुरक़ान को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था. इन दोनों को भी पुलिस ने बेरहमी से पीटा था. मुन्नी को नहीं पता कि वो किस हालत में हैं.

मुन्नी को नहीं पता कि वो वापस लौटेंगे या नहीं या जब वो लौटेंगे तब क़र्ज़ लेकर बनाया गया उनका घर बचेगा या नहीं.

"मेरा मासूम बेटा और बेग़नाह पति जेल में हैं. इस घर में मैं अपनी बेटियों के साथ अकेली हूं. मुझे डर है कि अगर हमारे घर पर भी बुलडोजर चला दिया तो हमारा क्या होगा. इसी डर में मैं रात को सो भी नहीं पा रही हूं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

BBC Hindi
Comments
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
The families of the victims narrated the pain of saharanpur police viral video
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X