तेलंगाना चुनाव: पार्टियां जो असंतुष्ट नेताओं को पद देने का कर रही रही वादा, उसे कैसे करेंगी पूरा?
तेलंगाना की सत्तारूढ़ बीआरएस हो या प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों ही विधानसभा चुनाव के बीच अपनी पार्टी के अंदर के मतभेदों को सुलझाने, टिकट से वंचित असंतुष्टों को मनाने के लिए एमएलसी/राज्यसभा पद या निगम अध्यक्ष पद की पेशकश कर रहे हैं।

वो चाहे उम्मीदवारों के साथ समझौता करवाना हो या पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करना हो विभिन्न नेताओं और असंतुष्टों को पदों की पेशकश की जा रही। राजनीतिक विश्लेषकों को आश्रर्य है कि ये पार्टिंयां चुनाव के बाद अपने वादों को पूरा कैसे करेंगी।
इसकी वजह है कि तेलंगाना की दो एमएलसी सीटें खाली हैं जिनमें से आने वाले दो सालों के लिए प्रवेशकों को तत्काल जगह देने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। स्थिति के अनुसार विधानस परिषद में 40 सदस्यों वाली कुछ सीटें 2025 और 2026 में खाली हो जाएंगी और बहुमत 2029 में खाली हो जाएंगी। गवर्नर कोटे की चार सीटें 2026 और 2027 तक पहले से ही भरी हुई हैं।
बता दें एमएलसी पदों में से दो रिक्तियां राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए एमएलसी के अंतर्गत आती हैं। तेलंगाना की बीआरएस सरकार की कैबिनेट ने 3 माह पहले इन पदों के लिए दासोजू श्रवण और कुर्रा सत्यनारायण की सिफारिश की थी लेकिन राज्यपाल ने नामांकित कोटा के तहत उन्हें गौर पात्र बताकर नियुक्तियां खारिज कर दी थी।
40 सीटों में से 14 स्थानीय अधिकारियों के तहत आती हैं, इनमें से मात्र दो सीटें 2025 में खाली होंगी। वहीं विधानसभा कोटे में अन्य 14 सीटें हैं जिनमें से पांच 2025 में और छह 2027 में और शेष तीन सीटें 2029 में खाली होगी। स्नातक और शिक्षक कोटे के तहत छह एमएलसी सीटों के लिए, तीन 2025 में, दो 2027 में और एक 2029 में खाली हो जाएंगी।












Click it and Unblock the Notifications