Telangana Election में तकनीक के आगे मात खा रहा चुनाव आयोग?

तेलंगाना चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए कुछ उम्मीदवार तकनीक से तिकड़म लगा रहे हैं। मतदाताओं को प्रलोभन देने के लिए वह उन्हें सीधे पैसे या सामान नहीं दे सकते, क्योंकि, इसपर चुनाव आयोग का सख्त पहरा है। लेकिन, उन्होंने तकनीक के दम पर इसकी भी काट निकाल ली है।

जानकारी के मुताबिक कई उम्मीदवार अब वोटरों को ऑनलाइन गिफ्ट कूपन उपलब्ध कराने लगे हैं। इस तरह से वह चुनाव आयोग के रडार पर आने से बच जा रहे हैं। उम्मीदवारों का टारगेट खासकर युवा वोटर हैं, जो टेक्नो-फ्रेंडली है और वह आसानी से ऑनलाइन गिफ्ट कूपन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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वोटरों को ऑनलाइन गिफ्ट कूपन बांट रहे हैं उम्मीदवार!
जानकारी के मुताबिक यह उम्मीदवारों के ऐसे टारेगट वोटर हैं, जो ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। उनके लिए वह 2 हजार रुपए से लेकर 4 हजार रुपए के ऑनलाइन गिफ्ट कूपन उपलब्ध करा रहे हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, 'करीब 100 कूपन कंपनियां हैं, जिनका ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ तालमेल है। कुछ कंपनियां थोक खरीदारी के लिए उम्मीदवारों से बातचीत कर रही हैं.....'

कूपन देकर वोटरों को रिझाना इतना आसान लग रहा है कि कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर प्रचार का बजट घटाकर उसका इस्तेमाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चुनावी रेवड़ियां बांटने में करने लगे हैं।

दिवाली से पहले बढ़ सकता है ट्रेंड
सूत्रों का कहना है कि 'खासकर के हैदराबाद और आसपास के इलाकों में यह ट्रेंड बढ़ने लगा है। जैसे-जैसे चुनावों की तारीख (30 नवंबर) नजदीक आएगी अन्य शहरी क्षेत्रों में भी उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर सकते हैं।' जानकारी के मुताबिक दशहरे के मौके पर एक राउंड कूपन बांटा भी जा चुका है और दिवाली आते-आते इसमें और तेजी आने की संभावना है।

बहुत ही नए अंदाज में चल रहा है यह कारोबार
वोटरों को प्रलोभन देने के लिए ऑनलाइन गिफ्ट कूपन देने का तरकीब जितना नायाब है, उतना ही यह खेल जिस तरह से खेला जा रहा है, उसका तरीका भी काफी दिलचस्प है। मसलन, एक सूत्र ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक, '500 से 1000 लोगों का ग्रुप किसी उम्मीदवार के लिए यह कूपने खरीद लेता है। फिर उसे लोगों (संभावित वोटरों) को गिफ्ट कर दिया जाता है। इसकी वजह से यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कूपन कौन और किसके लिए खरीद रहा है।'

ऐसे उम्मीदवारों की ओर से जिन संभावित वोटरों को मुख्य तौर पर लक्ष्य बनाया जाता है, उनमें से अधिकतर वे मतदाता होते हैं, जो या तो स्टूडेंट हैं या फिर जिनके पास राशन कार्ड नहीं है।

अपना मोबाइल ऐप भी बना रहे हैं उम्मीदवार
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में इस बार तकनीक से जुड़ा एक और ट्रेंड देखा जा रहा है। इस बार उम्मीदवार गूगल प्लेस्टोर पर अपना खुद का मोबाइल ऐप्लिकेशन तैयार कर रहे हैं। वैसे इसकी शुरुआत 2019 के लोकसभा चुनावों में ही हो गई थी, लेकिन अबकी बार विधानसभा के उम्मीदवार भी अपना खुद का मोबाइल ऐप बनाने के लिए एजेंसियों से संपर्क कर रहे हैं।

उम्मीदवारों की इस मांग को देखकर मोबाइल ऐप बनाने वाली एजेंसियों की भी बहार आ गई है। वह उम्मीदवारों की जरूरत के हिसाब से ऐप बना रही हैं और 3 से 8 लाख रुपए तक वसूल रही हैं। इन ऐप पर उम्मीदवारों की ओर से मतदाताओं को तमाम तरह के विकल्प दिए जा रहे हैं। इसपर वोटर अपने एरिया की समस्याओं को भी रख सकते हैं और संबंधित उम्मीदवारों के चुनाव कार्यक्रमों का पूरा अपडेट भी ले सकते हैं।

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