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राजनीति में तेजस्‍वी की 'ओप‍निंग' पिता लालू के लिए काफी अहम

पटना। राष्‍ट्रीय जनता दल यानी राजद प्रमुख और राज्‍य के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे और उनके उत्‍त‍राधिकारी तेजस्‍वी यादव भी नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। तेजस्‍वी राघोपुर से बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी किस्‍मत आजमा रहे हैं।

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फिलहाल वह इस सीट से आगे चल रहे हैं लेकिन कहते हैं कि राजनीति में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। राजनीति भी क्रिकेट की तरह अनिश्चितताओं का खेल है। क्रिकेट का जिक्र इसलिए क्‍यों तेजस्‍वी क्रिकेट के भी खिलाड़ी रहे हैं और इस बार उनकी जीत और हार दोनों ही उनके पिता के लिए काफी अहम साबित होने वाली है।

तेजस्‍वी की जीत के मायने

26 वर्ष के तेजस्‍वी ने वर्ष 2008 में आईपीएल के साथ क्रिकेट में अपना डेब्‍यू किया। दिल्‍ली की टीम के लिए खेलते हुए उन्‍होंने ज्‍यादा कमाल तो नहीं दिखाया लेकिन परिवार में क्रिकेट खेलने वाले पहले खिलाड़ी जरूर बन गए।

तेजस्‍वी की जीत लालू की उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं जो करीब चार दशक से जारी है। क्रिकेट की तरह ही यहां भी हो सकता है कि दिल्‍ली के लिए उनका रास्‍ता साफ हो सके। जब से बिहार में नीतीश कुमार ने सत्‍ता संभाली है कहीं न कहीं लालू का प्रभाव भी फीका पड़ गया है।

तेजस्‍वी की जीत यादव वंश के उस पुराने दबदबे को कायम करने में कामयाब हो सकेगी जिसे कभी उनके पिता ने बिहार और फिर देश की राजनीति में बरकरार रखा था।

हार के मायने

तेजस्‍वी की हार भी लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी के भविष्‍य को तय करने वाली होगी। तेजस्‍वी अगर हारे तो शायद राजद के सुनहरे राजनीतिक भविष्‍य पर भी कुछ वर्षों के लिए लगाम लग जाएगी।

साथ ही खुद तेजस्‍वी पर भी एक चूके हुए खिलाड़ी का टैग लग सकता है। यह टैग उनके भी पॉलिटिकल करियर को खतरे में डाल सकता है। तेजस्‍वी क्रिकेट में कुछ खास नहीं कर सके थे। उन्‍होंने वर्ष 2013 से राजनीति में सक्रियता दिखानी शुरू की जब उनके पिता को चारा घोटाले में जेल भेजा गया था।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लालू के लिए तेजस्‍वी की हार उनकी भी हार होगी क्‍योंकि फिर कहीं न कहीं उनकी विश्‍वसनीयता पर भी सवाल होगा। तेजस्‍वी की हार से यह संदेश साफ हो जाएगा कि लालू की राजनीति को अब बिहार के वोटर्स ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

ऐसे में राज्‍य की राजनीति में उनकी वापसी भी मुश्किल होगी। इन चुनावों के बाद शायद नीतीश कुमार यह सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि क्‍या लालू के साथ आना उनके लिए गलती साबित हुआ।

फिलहाल तो अभी नतीजे नहीं आए हैं लेकिन तेजस्‍वी यादव आगे चल रहे हैं। उनका आगे होना उनके पिता की विरासत के लिए काफी अहम है।

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