मदरसों में गीता पढ़ाने से लेकर मुस्लिम इमामों से किन मुद्दों पर हुई बात ? RSS नेता ने बताया
नई दिल्ली, 23 सितंबर: आरएसएस नेताओं की मुस्लिम इमामों के साथ कई मसलों पर विस्तृत चर्चा हुई है। गौरतलब है कि गुरुवार को खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इमामों के चीफ उमर इलियासी से मुलाकात की थी, जिन्होंने उन्हें 'राष्ट्रपिता' तक कहकर संबोधित किया था। शुक्रवार को मुस्लिम इमामों के साथ आरएसएस नेताओं की हुई चर्चा के बारे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने अंदर की और काफी डिटेल में जानकारी दी है। गौरलतब है कि गुरुवार की बातचीत को बंद कमरे की बातचीत बताया गया था। इस दौरान संघ के नेताओं और इमामों ने मदरसों में पवित्र गीता पढ़ाए जाने को लेकर भी मंथन किया है।

संघ प्रमुख ने गुरुवार को किया था मदरसे का दौरा
मुस्लिम इमामों के साथ हुई चर्चा में किन मुद्दों पर बातचीत की गई है, इसकी विस्तृत जानकारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने दी है। गुरुवार को आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने दिल्ली के आजाद मार्केट स्थित मदरसा ताजवीदुल कुरान का दौरा किया था और वहां पढ़ने वाले बच्चों से भी बातचीत की थी। गौरतलब है कि कल सर संघचालक ने ऑल इंडिया मुस्लिम इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ उमर इलियासी से खास मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान चीफ इमाम ने संघ प्रमुख को ना सिर्फ 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था, बल्कि उन्हें 'सबसे बड़े सामाजिक संगठन' का प्रमुख भी कहा था।

भागवत ने चीफ इमाम से कहा-हम मात्र राष्ट्र के बच्चे हैं
न्यूज एजेंसी एएनआई से आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने शुक्रवार को कहा है, 'डॉक्टर इलियासी ने मोहन भागवत से कहा कि वह 'राष्ट्र ऋषि' हैं, इसका स्वागत है, लेकिन जब उन्होंने भागवत को राष्ट्रपिता कहा, तो मोहन भागवत जी ने तत्काल कहा कि हम मात्र राष्ट्र के बच्चे हैं।' उन्होंने कहा, 'इलियासी ने ये कहा कि ईश्वर की पूजा करने का हमारा तरीका अलग है, लेकिन यह सच है कि सबसे बड़ा धर्म मानवता है। हम सभी भारतीय हैं और तब हमारा धर्म, भाषा या पार्टी आता है। इसलिए, अगर हम भारतीय बन जाते हैं, तभी हम अच्छे नागरिक बन सकते हैं।'

संघ को सीधी बातचीत से समझना चाहते हैं इमाम- आरएसएस नेता
इंद्रेश कुमार का कहना है कि मुस्लिम इमाम आरएसएस को राजनीतिज्ञों के माध्यम से नहीं, बल्कि संगठन के साथ सीधी बातचीत के माध्यम से जानना चाहते हैं। वो बोले, 'मुस्लिम इमामों ने कहा है कि वह आरएसएस को राजनीतिज्ञों या मीडिया के माध्यम से नहीं समझना चाहते हैं, वह हमारे साथ सीधी चर्चा करना चाहते हैं, क्योंकि वह देशभक्त और अनुशासित हैं।' उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मों के धर्मोपदेशक मानते हैं कि धार्मिक नेता, राजनेता और मीडिया 'लोगों को धर्म और जाति की लाइन पर उकसाते हैं।'

'उपासना के सभी तरीकों का सम्मान करने पर चर्चा हुई'
संघ के नेता ने कहा है कि मुस्लिम धर्मोपदेशक का यह भी मानना है कि धार्मिक नेता ही मुसलमानों को 'भारतीयों की तरह नहीं रहने' देते हैं। इंद्रेश कुमार बोले- 'मुस्लिम धर्मवक्ताओं का विश्वास है कि धार्मिक नेता उन्हें भारतीयों की तरह नहीं रहने देते, बल्कि उन्हें सिर्फ मुसलमान रहने देना चाहते हैं और उनका शोषण करते हैं। वह उनका वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। उनको भरोसा है कि उनके धर्म को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि वह कुछ भी करने और प्रार्थना करने को स्वतंत्र हैं।' संघ नेताओं और मुस्लिम इमामों के बीच बैठक में हुई चर्चा के बारे में उन्होंने कहा, 'उपासना के सभी तरीकों का सम्मान करने पर चर्चा हुई। यह राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाएगा और भाईचारा मजबूत होगी। महिलाओं के सम्मान और समाज के कई समस्याओं को भी खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई।'

मदरसों में गीता पढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई- आरएसएस नेता
एक बड़ी बात इंद्रेश कुमार ने मदरसों में पवित्र गीता पढ़ाए जाने को लेकर हुई चर्चा के बारे में बताई। उन्होंने कहा, 'इमामों ने कहा कि वे मदरसों को आधुनिक बनाना चाहते हैं, जैसा कि देवबंद के मदनी साहब ने कहा कि मदरसों का सर्वे उनके हित में है और उन्हें इसको लेकर किसी तरह का संदेह नहीं है। वे चाहते हैं कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनें। मदरसों में गीता पढ़ाए जाने और हिंदी सीखने को लेकर भी चर्चा हुई, जो कि देश को एक करता है।' इस मौके पर कुमार ने भागवत के बारे में बताया कि उन्होंने अपने संदेश में सभी धर्मों और महिलाओं का सम्मान करने को कहा।












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