'चीन का नाम लेने से डर रहे हैं पीएम....' तवांग झड़प के बहाने मोदी सरकार पर बहुत कुछ बोल गए ओवैसी
तंवाग झड़प को लेकर हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया है कि वह चीन का नाम लेने से भी डर रहे हैं। उन्होंने सभी दलों के सांसदों को भिड़ंत वाली जगह ले जाने की मांग की है।

Asaduddin Owaisi on China,Tawang and PM Modi : AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने तवांग में चीन की गुस्ताखी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री राजनीतिक नेतृत्व दिखाने में पूरी तरह से असफल रहे हैं और अगर मीडिया में यह बात नहीं आती तो सरकार चुप ही रह जाती। उन्होंने पीएम मोदी पर यहां तक आरोप लगाया है कि वह चीन का नाम लेने से भी डर रहे हैं। इससे पहले ओवैसी ट्विटर के जरिए केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल चुके हैं और सभी दलों के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को उस झड़प वाली जगह पर ले चलने की भी मांग कर चुके हैं।
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पीएम चीन का नाम लेने से डर रहे हैं- ओवैसी
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी सेना की ओर से हुई घुसपैठ की कोशिशों को भारतीय सैनिकों ने भले ही माकूल जवाब दिया हो, लेकिन इस मसले पर भी जबर्दस्त राजनीति शुरू हो चुकी है। इस घटना को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ निशाना साधने वालों में कांग्रेस की तरह ही हैदराबाद के सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी पीछे नहीं हैं। इस मामले में ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि, 'पीएम राजनीतिक नेतृत्व दिखाने में नाकाम रहे हैं। झड़प 9 दिसंबर को हुई थी और आप आज बयान दे रहे हैं। अगर मीडिया ने रिपोर्ट नहीं दी होती तो आप नहीं बोले होते। सभी दलों को झड़प वाली जगह पर लेकर चलिए। पीएम चीन का नाम लेने से डर रहे हैं, उनकी सरकार चीन के बारे में बोलने से डर रही है।'

'अगस्त में ही 75 फीसदी सैनिक बढ़ा चुका था चीन'
संसद परिसर में मीडिया के सामने सरकार और खासकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने से पहले ओवैसी ने ट्विटर के जरिए तवांग झड़प का मसला उठाया। उन्होंने कहा कि चीन ने अपने पिछले अनुभवों से सीखा (डोकलाम, देसपांग,गलवान और डेमचोक), लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी भी इस आक्रमण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वह अपने करीबी मीडिया के जरिए भारतीय जमीन पर चीनी आक्रमण को दूसरी कहानी बनाकर पेश करेंगे। जबकि, चीन धीरे-धीरे गुपचुप तरीके से अपनी घुसपैठ जारी रखे हुए है। AIMIM नेता ने यह भी दावा किया चीन ने अरुणाचल प्रदेश में इस साल अगस्त में ही अपने जवानों की संख्या 75 फीसदी बढ़ा दी थी।

चीन ने पहले जैसा ही किया- ओवैसी
ओवैसी ने एक और ट्वीट किया और उसमें तवांग की घुसपैठ को लेकर कहा कि, 'यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा कि चीन ने 2017 में डोकलाम में और 2020 अप्रैल में लद्दाख में किया था। हमने अरुणाचल प्रदेश में अपनी ताकत क्यों नहीं बढ़ाई, क्योंकि मुझे बताया गया कि हम यह उम्मीद कर रहे थे कि वह अस्थाई था और चीनी अपनी पुरानी स्थिति में वापस लौट जाएंगे।'

'वजीर ए आजम आप एक मजबूत राजनीतिक फैसला लीजिए'
एक ट्वीट उन्होंने पीएमओ को टैग करके लिखा कि 'वजीर ए आजम आप एक मजबूत राजनीतिक फैसला लीजिए, आप स्वघोषित मजबूत पीएम हैं, हम भारतीय जमीन से पीएएल का कब्जा हटाने में आपका समर्थन करेंगे। संसद में पूरी चर्चा शुरू करवाइए और सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को लेकर ठीक 9 दिसंबर को झड़प वाली जगह पर ले चरिए, मैं आऊंगा......'

भारतीय सेना ने चीनी जवानों को खदेड़ा
भारतीय सेना ने बयान में कहा था कि 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय सैनिक और चीनी जवानों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर झड़प हुई थी। इस घटना में दोनों और के जवानों को 'हल्की चोटें' आई थीं। इस बीच संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब दिया कि तवांग के यांग्त्से क्षेत्र में PLA ने एकतरफा यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी। इस दौरान हाथापाई हुई और भारतीय सेना ने इसका मजबूती से सामना किया। इसमें अपना कोई भी सैनिक गंभीर रूप से जख्मी नहीं हुआ, फिर भारीतय सैन्य कमांडरों के दखल के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए।(LAC वाली तस्वीरें-फाइल)












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