सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की तरुण तेजपाल की अर्जी, 6 महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश
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नई दिल्ली। अपने जूनियर सहकर्मी के साथ रेप के आरोपी और तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। तरुण तेजपाल की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और ये पीड़िता की निजता था हमला था। दरअसल तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया जाए।

याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने न केवल उनके अनुरोध को खारिज कर दिया, बल्कि गोवा की अदालत को छह महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश भी दिया है क्योंकि इसमें देरी हुई थी। तहलका के संस्थापक-संपादक रहे तरुण तेजपाल पर साल 2013 में गोवा में एक न्यूजमैगजीन द्वारा आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक महिला कर्मचारी के साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। पीड़िता ने तरुण तेजपाल के खिलाफ होटल के लिफ्ट में मारपीट करने का आरोप भी लगाया है।
यह मामला उस समय सामने आया जब पीड़िता का कई मेल सामने आया था, जिसमें उसने तरुण तेजपाल की अपने सीनियर से शिकायत की थी। जिस पर तत्कालीन प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने जवाब दिया था, लेकिन यह ईमेल लीक हो गया और मीडिया में चला गया। इसके बाद तरुण तेजपाल ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नवंबर 2013 में पुलिस ने उनको गिरफ्तार किया। फिलहाल तरुण तेजपाल मई 2014 से जमानत से बाहर हैं।
वहीं गोवा फास्ट ट्रैक अदालत में दायर 2684 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने कहा है कि तेजपाल ने महिला पर दो हमला किया और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। वहीं तेजपाल ने कहा है कि आरोप झूठे हैं और गोवा में भाजपा सरकार के राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था लेकिन वहां भी उनको राहत नहीं मिली थी।
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