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ग्राउंड रिपोर्ट: मज़दूर की टॉपर बेटी की कहानी जिसने चूहे मारने की दवा से की आत्महत्या

By Bbc Hindi
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    प्रदीपा
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    प्रदीपा

    19 साल की प्रदीपा का जन्म तमिलनाडु के विल्लीपुरम ज़िले के पेरुवलुर पंचायत के एक गांव में हुआ था. 27 जुलाई 1999 को जन्मी प्रदीपा के पिता शनमुघम मज़दूरी करते थे. उनका मां, अमुधा घर के कामकाज के साथ-साथ जानवरों की देखभाल करती थी.

    4 जून की शाम सात बजे के आसपास पड़ोस में रहने वाली जयंति ने देखा कि प्रदीपा को उसके माता-पिता साइकिल पर बैठा कर कहीं ले जा रहे हैं. उन्हें लगा कि वो शायद किसी काम से कही कहीं जा रहे हैं.

    लेकिन रात के 11 बजे प्रदीपा की मौत की ख़बर आई जिसके बाद से उनके पड़ोस में रहने वाले सभी लोगों को आश्चर्य हुआ.

    जयंति कहती हैं, "घर पर हम उसे अम्मू कहते थे, वैसे तो वो देखने में शांत स्वभाव की थी लेकिन घर में वो हंसी मज़ाक करती रहती थी."



    प्रदीपा के माता-पिता, शनमुघम और अमुधा
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    प्रदीपा के माता-पिता, शनमुघम और अमुधा

    प्रदीपा, शनमुघम और अमुधा की तीसरी संतान थी. प्रदीपा की बड़ी बहन उमा प्रिया वेल्लूर में एमसीए की पढ़ाई कर रही हैं और उनके भाई प्रवीन राज इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं.

    प्रदीपा ने दसवीं तक की पढ़ाई पेरुवलुर में की. दसवीं में उनके 500 में से 490 नंबर आए और वो ज़िले में अव्वल आईं थीं. उसके बाद ज़िलाधिकारी की मदद से उनका दाखिला दूसरी जगह के एक प्राइवेट स्कूल में करा दिया गया.

    साल 2016 में प्रदीपा ने बारहवीं कक्षा की परीक्षा दी और इसमें उन्हें 1200 में से 1125 नंबर मिले. प्रदीपा अपने नंबरों से दुखी थीं क्योंकि नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के बिना भी इन नंबरों के सहारे उन्हें प्राइवेट कॉलेज में ही दाखिला मिल सकता था.

    प्रदीपा का घर
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    प्रदीपा का घर

    साल 2017 में नीट व्यवस्था लागू की गई थी और प्रदीपा ने इसी व्यवस्था के तहत फिर से एक बार परीक्षा देने का फ़ैसला किया था.

    उनके पिता कहते हैं, "उसे इसकी कोई चिंता नहीं थी. उसे पूरा यकीन था कि वो ये परीक्षा पास कर लेगी. उसने किसी और बात के बारे में नहीं सोचा और अपनी पढ़ाई में लग गई."

    साल 2017 में प्रदीपा ने नीट की परीक्षा अंग्रेज़ी में दी और इसमें उनके 155 नंबर आए. इस नंबर के साथ भी उन्हें केवल प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में ही दाखिला मिलता. इसीलिए उन्होंने तय किया कि एक बार फिर को नीट परीक्षा देंगी.

    इस बार इसके लिए उन्हें राज्य सरकार से मदद मिली. सरकार से मिली आर्थिक मदद के सहारे उन्होंने सत्यभामा विश्वविद्यालय में नीट कोचिंग क्लासेस में दाखिला लिया.

    प्रदीपा का स्कूल
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    प्रदीपा का स्कूल

    2018 में उन्होंने तमिल में नीट की परीक्षा दी लेकिन उन्हें इस बार केवल 39 नंबर आए. नतीजे सुनने के बाद प्रदीपा का दिल ही टूट गया.

    उनके पिता शनमुघम बताते हैं, "उन्होंने पहले कहा था कि परीक्षा का नतीजे 5 जून 2018 को आएगी, लेकिन ये एक दिन पहले ही आ गया. उसकी मां को इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था. जैसे की प्रदीपा को पता चला कि वो परीक्षा में फेल हो गई है उसने चूहे मारने वाली दवा पी ली."

    इस वक्त प्रदीपा की मां घर पर ही मौजूद थी लेकिन उन्हें इस बात का आभास नहीं हुआ. कुछ देर बाद शनमुघम ने देखा कि प्रदीपा को उल्टियां हो रही हैं. इसके बाद उन्हें पता चला कि प्रदीपा ने जान देने के इरादे से चूहे मारने वाली दवा पी ली है.

    प्रदीपा का घर
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    प्रदीपा का घर

    वो प्रदीपा को ले कर तुरंत चेटपेट में मौजूद सरकारी अस्पताल गए. प्रदीपा को फ़र्स्ट-एड दिया गया और इसके बाद उन्हें तुरंत एंबुलेंस में तिरुवनमलाईल सरकारी अस्पताल भेज दिया गया. लेकिन अस्पताल जाने के रास्ते प्रदीपा की मौत हो गई.

    प्रदीपा की मां, अमुधा को जब उनकी मौत की ख़बर मिली तो वो अपना सिर पीटने लगीं. उन्हें सदमा लगा और कुछ वक्त के लिए उनकी याददाश्त चली गई.

    शनमुघम कहते हैं, "वो मुझे नहीं पहचान पा रही थी. उसकी आंख से एक आंसू तक नहीं निकला."

    प्रदीपा की बहन उमा प्रिया कहती हैं "उसे यकीन था कि उसकी पढ़ाई और उसके नंबर की मदद से वो डॉक्टर ज़रूर बन जाएगी. उसने बचपन से ये सपना नहीं देखा था लेकिन जब वो दसवीं में पूरे ज़िले में अव्वल आई थी तो उसने डॉक्टर बनने को अपना लक्ष्य बना लिया."

    प्रदीपा के भाई प्रवीण राज अपनी मां अमुधा के साथ
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    प्रदीपा के भाई प्रवीण राज अपनी मां अमुधा के साथ

    प्रदीपा के पिता कहते हैं, "प्रदीपा को फ़िल्में दखना पसंद था. वो ऐसी छात्रा नहीं थी कि सारी रात जाग कर पढ़ाई करे. वो पढ़ाई को साधारण वक्त देती थी और अच्छे नंबर लाती थी."

    उनके पिता कहते हैं कि प्रश्नपत्र में तमिल से हुए अंग्रेज़ी अनुवाद में कई ग़तलियां थीं और प्रदीपा को इस बात का पता था. उसके बारे में उन्होंने सीबीएसई को भी लिखा था.

    वो कहते हैं, "उसे यकीन था कि वो 500 नंबर ले कर आएगी, लेकिन उसके 39 नंबर ही आए जो वे बर्दाश्त नहीं कर सकी."

    द्विड़ मुन्नेत्रकज़गम के अधायक्ष एमके स्टालिन प्रदीपा के माता-पिता से मिलने पहुंचे
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    द्विड़ मुन्नेत्रकज़गम के अधायक्ष एमके स्टालिन प्रदीपा के माता-पिता से मिलने पहुंचे

    उमा प्रिया कहती हैं "मैं, और मेरा भाई- हम उसे अपने दोस्त की तरह ही देखते थे लेकिन उसने कभी भी हमारे साथ पढ़ाई से जुड़ी मुश्किलों के बारे में बात नहीं की. वो इस सिलसिले में अपने टीचरों से ही बात करती थी."

    प्रदीपा की मौत के बाद से नीट का विरोध करने वाले कई कार्यकर्ता उनसे माता-पिता से मिलने उनसे घर पहुंचे हैं.

    बीते साल नीट परीक्षा के नतीजे आने के बाद अनीता नाम की एक लड़की ने खुदकुशी कर ली थी.

    अनीता
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    अनीता

    दिहाड़ी मजदूर की बेटी अनिता अरियलुर जिले की रहने वाली थीं. तमिलनाडु स्टेट बोर्ड से बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 अंक के साथ 98 फीसदी नंबर पाने के बावजूद अनिता को नीट में कम नंबर मिले थे. कम अंकों की वजह से उनका मेडिकल में चयन नहीं हुआ.

    अनिता ने मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए नीट को वापस लेने की मांग की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी थी. बीते साल इस पर फैसला आने के बाद आत्महत्या कर ली थी.



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    English summary
    Tamil Nadu girl commits suicide after alleged failure to clear NEET .

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