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अल्‍लाह की कसम, मैं कभी अजीत डोभाल से नहीं मिला- लश्‍कर से धमकी मिलने पर गुलाब नबी ने बोली ये बात

जम्‍मू कश्‍मीर, 16 सितंबर: कांग्रेस पार्टी का हाथ छोड़ने के बाद गुलाम नबी आजाद सितंबर महीने की शुरूआत में जम्‍मू कश्‍मीर पहुंच चुके हैं। कश्‍मीर में अपनी पार्टी बनाने के ऐलान के साथ वहां अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने में जुट चुके हैं। वहीं कश्‍मीर पहुंचे उन्‍हें अभी एक महीना नहीं हुआ है कि उन्‍हें आतंकी संगठन लश्‍कर ए तैयबा से जान से मारने की धमकी मिली है। इस धमकी पर गुलाम नबी आजाद ने जवाब दिया है।

gulam

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि उन्हें ऐसी खबरें मिलीं कि लश्कर-ए-तैयबा की एक शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है लेकिन वो किसी चीज से नहीं डरते।

गुलाम नबी को क्‍यों लश्‍कर ए तैयबा ने जान से मारने की धमकी दी है

गुलाम नबी ने कहा

लश्कर-ए-तैयबा की एक शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है, ये धमकी इसलिए दी है क्‍योंकि उनका कहना है कि मैं कश्‍मीर आने से पहले अमित शाह और अजीत डोभाल से मिल कर आया हूं। इस पर गुलाम नबी ने कहा कि उन्हें पता है कि आतंकवादियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है लेकिन वह डरते नहीं हैं। उन्‍हें लगता है कि मैं यहां आने से पहले अमित शाह और डोभाल से मिला था। मैं अल्‍लाह की कसम खाता हूं, मैं अपने जीवन में डोभाल से कभी नहीं मिला। हां, मैं शाह से मिला हूं वह गृह मंत्री हैं और मैं संसद में था। यह मेरे काम का हिस्सा था। मैं विभिन्न दलों के लोगों से मिलता हूं।

कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा

पंजाब और जम्मू-कश्मीर में उन पर 50 बार हमला किया गया लेकिन अल्‍लाह ने उनकी जान बचाई। लेकिन अगर अल्‍लाह मेरी जान लेते हैं, तो वह इसे उस जीवन के साथ ले जाएंगे जो मैंने सिद्धांतों पर जिया है, झूठ या छल नहीं जिया। इस रैली में गुलाम ने युवाओं से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की और जम्मू-कश्मीर के लोगों की पीड़ा के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। सीमा पार कुछ ऐसे लोग हैं जो बंटवारे के ठीक बाद अपना देश नहीं बसा पाए हैं, लेकिन हमारे देश और जम्मू-कश्मीर को तबाह करने का संकल्प लिया है।

बंदूक उठाना कोई समाधान नहीं है

बंदूक उठाना कोई समाधान नहीं है। यह केवल आपके जीवन में, आपके परिवार और देश के लिए विनाश लाता है। महात्मा गांधी ने बंदूक या तलवार नहीं उठाई या अंग्रेजों को हराने के लिए मिसाइल नहीं चलाई। कोई भी मुस्लिम देश - अफगानिस्तान से इराक से फिलिस्तीन तक - बंदूकें लीं, उग्रवाद में ले लिया, नष्ट कर दिया गया।

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