'बचपन से ही मैं ऐसे मर्दों को सबक सिखाना चाहती थी', पिता को भी नहीं बख्शा था, जानती हैं अकेले लड़ना

Swati Maliwal: राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल अपने खिलाफ हुए जुल्म को लेकर अब अकेले ही आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ मोर्चा खोल दी है। महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वालीं स्वाति मालीवाल अब अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं।

सीएम अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी और पूर्व पीएस बिभव कुमार पर स्वाति मालीवाल ने मारपीट और बदसलूकी का आरोप लगाया है।

Swati Maliwal

FIR के मुताबिक 13 मई को सीएम आवास में स्वाति मालीवाल के साथ बिभव कुमार ने मारपीट की है। दूसरी ओर बिभव ने भी स्वाति पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।

लेकिन स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाकर ये दिखा दिया है कि वो किसी से डरने वाली महिला नहीं हैं। स्वाति ने इस मुद्दे पर किए अपने एक ट्वीट में भी लिखा है कि, ''पूरे देश की महिलाओं के लिए अकेले ही लड़ती आई हूं, अपने लिए भी लड़ूंगी। जमकर कैरेक्टर असेसिनेशन करो, वक्त आने पर सब सच सामने आएगा!''

स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुए अन्याय पर पहले भी बात की है। स्वाति ने अपने पिता को भी नहीं बख्शा था। स्वाति ने अपने पिता पर शोषण का आरोप लगाया था। स्वाति मालीवाल ने कहा था कि बचपन में उनके पिता ने चौथी कक्षा तक उनका शोषण किया था।

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जब स्वाति मालीवाल ने पिता पर लगाया था शोषण का आरोप

दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख के पद पर रहते हुए स्वाति मालीवाल ने साल 2023 अपने ही पिता पर शोषण का आरोप लगाया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक स्वाति मालीवाल ने कहा था कि, जब वह बच्ची थीं तो उनके पिता ने उनका यौन शोषण किया था। स्वाति मालीवाल ने कहा कि एक समय था जब वह डर के मारे अपने बिस्तर के नीचे छिप जाती थीं।

स्वाति मालीवाल ने कहा था,

''जब मैं बच्ची थी, तो मेरे पिता ने मेरा यौन शोषण किया था। वह मुझे मारते-पीटते थे। मैं बिस्तर के नीचे छिपी रहती थी। एक बच्ची के रूप में, मैं हमेशा बचपन से सोचती थी कि मैं ऐसे मर्दों को कैसे सबक सिखाऊंगी जो महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। मैं महिलाओं को मदद कैसे कर सकती हूं...इसके लिए हमेशा सोचती थी...जिसी वो हकदार हैं।''

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स्वाति मालीवाल ने कहा था- उनके पिता बाल पकड़कर दीवार पर पटक देते थे

स्वाति मालीवाल ने कहा था कि, मेरे पिता, मेरा बाल पकड़कर, मुझे दीवार पर पटक देते थे। जिससे मुझे गंभीर चोटें आती थीं। यह तब तक हुआ जब तक मैं कक्षा 4 में थी, उसके बाद हमने उसे छोड़ दिया था।''

स्वाति मालीवाल ने कहा कि था उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति जीवन में ऐसी चुनौतियों से गुजरता है, तो वह दूसरों के दर्द को समझने में सक्षम होता है और व्यवस्था को बदलने के लिए भावुक हो जाता है। स्वाति मालीवाल ने आगे कहा था कि, ''मुझे लगता है कि मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ और मेरे जैसी कई महिलाओं की ऐसी कहानी है।''

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