प्रियंका गांधी के यूपी छोड़ कर असम के सिलचर में रोड शो करने की वजह का हुआ खुलासा!
नई दिल्ली: कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के पास पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी है। कांग्रेस को पूर्वाचंल में दोबारा खड़े करने के लिए वो जमकर चुनाव प्रचार कर रही है। यूपी के बाहर वो अपने भाई और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के नामांकन के समय केरल के वायनाड पहुंची थी। लेकिन असम के सिलचर में रोड शो और चुनावी रैली कर प्रियंका ने सबको चौंका दिया था। 14 अप्रैल को प्रियंका ने सिलचर लोकसभा सीट से खड़ी कांग्रेस उम्मीदवार सुष्मिता देव के पक्ष में रोड शो किया। कांग्रेस की उम्मीदवार सुष्मिता ने इसे 'गर्ल पावर' बताया।

'राहुल से की थी गुजारिश'
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सुष्मिता देव ने खुलासा किया कि जब कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी हाल में असम के दौरे में आए थे। उन्होंने राहुल गांधी से गुजारिश की थी कि प्रियंका गांधी उनके लोकसभा क्षेत्र में रोड शो करें। उस समय राहुल ने कहा कि वो(प्रियंका गांधी यूपी में व्यस्त हैं लेकिन महिला कांग्रेस की चेयरपर्सन के मामले में ये अपवाद हो सकता है।

'नागरिकता संशोधन बिल बनी वजह'
सुष्मिता देव ने इसे एक महिला का दूसरी महिला का सहयोग बताया है। लेकिन कांग्रेस के सूत्र इसकी वजह नागरिकता संशोधन विधेयक को बता रहे हैं। नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ कांग्रेस के मजबूत स्टैंड होने की वजह से सुष्मिता देन को दोबारा चुनाव जीतने में कठिनाई हो सकती है। इसी वजह से प्रियंका उनकी जीत की संभावना को बढ़ाने और दोबारा चुनने में मदद के लिए सिलचर पहुंची। कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि वो अच्छी उम्मीदवार हैं। लेकिन पार्टी के नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ होने की वजह से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है। पार्टी को युवा उम्मीदवार को बचाने के लिए पार्टी को अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए। प्रियंका गांधी का यूपी से बाहर निकलना उनके हाथ मजबूत करना है।

'बराक घाटी और ऊपरी असम में जनसांख्यिकीय विरोधाभास'
यहां समस्या की मुख्य वजह बराक घाटी और ऊपरी असम के बीच जनसांख्यिकीय मतभेद है। हिंदू बंगाली निवासी सिलचर सीट पर नागरिकता संशोधन बिल के साथ खड़े हैं। ये बिल बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने के पक्ष में हैं। इसके विपरीत असम के ऊपरी हिस्सों और पूर्वोत्तर में इसका विरोध है। ये लोग इस बिल को "स्वदेशी जातियों के खिलाफ मानते हैं। कांग्रेस ने काफी मंथन के बाद इस बिल का विरोध करने का फैसला लिया है। इसलिए सुष्मिता देव दोनों के बीच में फंस गईं हैं।
ये भी पढे़ं- सिलचर लोकसभा सीट की विस्तृत जानकारी

सुष्मिता देव को जीत पर विश्वास
सुष्मिता देव अपनी जीत की संभावना को लेकर आश्वस्त है। सुष्मिता देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अप्रैल को सिलचर में अपने दूसरे दौरे में कांग्रेस की तरह नागरिकता संशोधन बिल पर स्टैंड लिया। पीएम मोदी ने कांग्रेस की तरह ही बिल पर असम के लोगों से सलाह लेने की बात कही । इसके साथ ही ये यह हास्यास्पद है कि एक ओर आप बिल के समर्थन में हैं तो दूसरी ओर आपने उस एजीपी से समर्थन लिया है जो लगातार इस बिल को विरोध करती है। जब प्रियंका गांधी जैसी शख्सियत यहां आती हैं और इंदिरा गांधी के बारे में बताती है, कैसे उन्होंने शासन किया। वो उन यादों को फिर से जोड़ती हैं। लोग याद करते हैं कि इंदिरा गांधी ने बराक घाटी को 'शांति की घाटी' कहा था।

नागरिकता (संशोधन) बिल क्या है?
ये विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के लिए है। इस बिल के कानून बन जाने पर इन तीन देशों से भारत आने वाले शरणार्थियों को 12 साल की जगह छह साल बाद ही भारत की नागरिकता मिल सकती है। वहीं अगर असम की बात करें तो साल 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे। लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है।












Click it and Unblock the Notifications