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Suryastra Rocket launcher: रॉकेट दागते ही 'गायब' हो जाता है यह लॉन्चर, भारत के नए हथियार से चीन-पाक में हड़कंप

Suryastra Rocket launcher: गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर दिल्ली का 'कर्तव्य पथ' भारत की सैन्य ताकत का गवाह बना। इस बार की परेड में सबसे ज्यादा चर्चा 'सूर्यास्त्र' की रही, जो भारत का पहला स्वदेशी मल्टी-कैलिबर लॉन्ग-रेंज रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। पुणे की NIBE लिमिटेड ने इसे इजरायल की एल्बिट सिस्टम्स की तकनीकी मदद से भारत में ही तैयार किया है।

आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा चलता-फिरता लॉन्चर है जो 300 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को भी पल भर में खाक कर सकता है। 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में इसे एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं कि यह रॉकेट लॉन्चर कितना खास है और सेना के लिए 'गेम-चेंजर' क्यों है।

Suryastra rocket launcher

India first indigenous multi-caliber launcher: क्या है सूर्यास्त्र और इसे किसने बनाया?

सूर्यास्त्र एक 'मेड-इन-इंडिया' हथियार है। इसे पुणे की कंपनी NIBE लिमिटेड ने इजरायली तकनीक (एल्बिट सिस्टम्स) के साथ मिलकर भारत में ही बनाया है। भारतीय सेना को इसकी सख्त जरूरत थी, इसलिए इसे 'इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट' यानी आपातकालीन खरीद के तहत सेना में शामिल किया गया है। यह सिस्टम इजरायल के मशहूर 'पल्स' (PULS) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसका मतलब है कि यह दुनिया के सबसे आधुनिक रॉकेट सिस्टम्स में से एक है।

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Republic Day parade 2026 weapons: 300 किमी की मारक क्षमता और अचूक निशाना

इस रॉकेट लॉन्चर की सबसे बड़ी खासियत इसकी रेंज और सटीकता है। यह 150 किमी से लेकर 300 किमी की दूरी तक जमीन से जमीन पर हमला कर सकता है। इसकी सटीकता इतनी जबरदस्त है कि यह अपने टारगेट से महज 5 मीटर के दायरे में गिरता है। इतना ही नहीं, यह 100 किलोमीटर तक 'लोइटरिंग मुनिशन' (हवा में तैरने वाले आत्मघाती ड्रोन) भी दाग सकता है, जो दुश्मन के ठिकानों को ढूंढकर तबाह कर देते हैं।

Indian Army latest technology: एक लॉन्चर, कई तरह के रॉकेट

सूर्यास्त्र को 'मल्टी-कैलिबर' कहा जाता है क्योंकि यह एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग आकार और मारक क्षमता वाले रॉकेट दाग सकता है। युद्ध के मैदान में इससे रसद का बोझ कम हो जाता है क्योंकि आपको अलग-अलग रॉकेटों के लिए अलग-अलग गाड़ियों की जरूरत नहीं पड़ती। इसे BEML की हाई-मोबिलिटी गाड़ी पर फिट किया गया है, जिससे यह पहाड़ों और रेगिस्तान जैसे मुश्किल रास्तों पर भी बहुत आसानी से और तेजी से दौड़ सकता है।

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दुश्मन के लिए 'दागो और छिपो' की चुनौती

यह सिस्टम 'शूट-एंड-स्कूट' तकनीक पर काम करता है। इसका मतलब है कि यह रॉकेट दागने के तुरंत बाद अपनी जगह बदल लेता है। इससे दुश्मन के लिए यह पता लगाना नामुमकिन हो जाता है कि हमला ठीक किस जगह से हुआ था और वे जवाबी कार्रवाई नहीं कर पाते। भारतीय सेना के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि अब हमारे पास सीमा के बहुत पार तक सटीक हमला करने की ताकत आ गई है।

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