कोई घर दिलवा दे रेल मंत्री सुरेश प्रभु को
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) रेलवे विभाग को चुस्त-दुरुस्त करने के काम में लगे रेल मंत्री सुरेश प्रभु का दर्द कोई नहीं सुन रहा है। चूंकि वे अपनी व्यथा किसी को कहना पसंद नहीं करते, इसलिए उनकी कोई निजी समस्या को सुनता ही नहीं।
अब जरा देखिए कि उनके पास दिल्ली में अपना रहने का कोई घर नहीं है। जो 12 अकबर रोड का बंगला उन्हें आवंटित हुआ है, उस पर कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर से संबंध रखने वाले नेता सैफुद्दीन सोज रहते हैं। ये बंगला कांग्रेस मुख्यालय के ठीक पास है।
महाराष्ट्र से हरियाणा तक
सोज साहब बंगले को खाली नहीं कर रहे हैं। वे विभिन्न काऱणों के चलते बंगले में बने हुए हैं। नतीजा यह है कि महाराष्ट्र से संबंध रखने वाले पर हरियाणा से राज्य सभा में पहुंचे सुरेश प्रभु के पास रहने को अपना बंगला नहीं है। वे अभी रेलवे के एक छोटे बंगले में रह रहे हैं।
निवेदन किया
अब खबर है कि सुरेश प्रभु ने संबंधित विभाग से निवेदन किया है कि उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। यानी उन्हें लुटियन जोन में बंगला मिले। अब देखने वाली बात है कि उन्हें कब उनके पद के अनुसार बंगला मिलता है। कैबिनेट मंत्री को आठ बैट रूम का बंगला जनपथ, अकबर रोड, रेस कोर्स रोड वगैरह में मिलता है।
बंदरबाट का दौर
जानकारों का कहना है कि लुटियन जोन में मंत्रियों और सांसदों को मिलने वाले बंगलों को लेकर हर समय बंदरबाट बनी रहती है। ये सभी बेहतर से बेहतर जगहों पर बंगलों पर रहने के जुगाड़ में रहते हैं।
सत्तासीन दल के नेताओं को तो बेहतर बंगले मिल जाते हैं, पर विपक्ष और छोटे दलों के नेताओं को कायदे के बंगले नहीं मिल पाते। इसलिए वे हमेशा असंतुष्ट ही रहते हैं। हां, ज्योतिरादित्य सिंधिया,कमलनाथ,दिग्गिवजय सिंह सरीखे नेता चाहे पक्ष में हों या विपक्ष में, ये बड़े बंगले ले ही लेते हैं।













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