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प्रशांत भूषण मामले की सुनवाई पूरी, SC ने कहा- अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना में बारीक अंतर

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नई दिल्ली: वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना मामले में मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई। इस दौरान वकील राजीव धवन, कपिल सिब्बल और हरीश साल्वे ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए जस्टिस अरुण मिश्रा के सामने अपना पक्ष रखा। मामले में धवन प्रशांत भूषण के वकील थे जबकि सिब्बल पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल का पक्ष रख रहे थे। तरुण तेजपाल के भी खिलाफ अवमानना का केस है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशांत भूषण को नसीहत देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना में बारीक अंतर है।

    Contempt Case: SC ने Prashant Bhushan से अभिव्यक्ति की आजादी-अवमानना पर क्या कहा ? | वनइंडिया हिंदी

    Supreme Court

    दरअसल वकील प्रशांत भूषण ने तहलका मैग्जीन को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 16 जीफ जस्टिसों को भ्रष्ट बताया था। इसके लिए मंगलवार को उनके वकील ने पक्ष रखा, जबकि संपादक तरुण तेजपाल ने माफी मांग ली। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। बेंच अब ये तय करेगी कि दोनों की माफी स्वीकार की जाए या फिर उन पर अवमानना की कार्रवाई हो।

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    आपको बता दें कि शुक्रवार को प्रशांत भूषण, वरिष्ठ पत्रकार एन राम और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें अवमानना कानून में सेक्शन 2(c)(i) की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें बोलने की आजादी है। जिस पर आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशांत भूषण से कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी और अवमानना के बीच बारीक अंतर है। वहीं इससे पहले 22 जुलाई को बेंच ने न्यायपालिका के कथित अपमान को लेकर किए गए प्रशांत भूषण के दो ट्वीट्स का स्वत: संज्ञान लिया था। उस दौरान बेंच ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनके बयानों से न्यायिक प्रशासन की बदनामी हुई है।

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    English summary
    Supreme Court to Prashant Bhushan- Thin line between free speech and contempt
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