पैसों की कमी से पहले दलित छात्र नहीं भर पाया फीस! अब सुप्रीम कोर्ट ने IIT से कहा- इसका एडमिशन लीजिए
पैसों की कमी से पहले दलित छात्र नहीं भर पाया फीस! अब सुप्रीम कोर्ट ने IIT से कहा- इसका एडमिशन लीजिए
नई दिल्ली, 23 नवंबर: देश के प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में अपनी सीट गंवाने वाले 17 वर्षीय दलित छात्र को सोमवार (22 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली। 17 वर्षीय छात्र प्रिंस जयबीर सिंह के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को आदेश दिया है, इस एक छात्र के लिए अपने संस्थान में जगह बनाइए और इनका एडमिशन लीजिए। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने सोमवार को कहा कि यह "न्याय का उपहास" होगा यदि छात्र प्रिंस जयबीर सिंह को आईआईटी में प्रवेश से वंचित कर दिया जाएगा। असल में पहले दलित छात्र प्रिंस जयबीर सिंह के पास एडमिशन के भुगतान के लिए फीस नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने फीस अरेंज कर लिया तो वेबसाइट पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण वह समय पर फीस नहीं दे पाए थे। इसलिए वह एडमिशन नहीं ले पाए थे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित छात्र को आईआईटी में एडमिशन मिल जाएगा।

15 हजार रुपये का पहले इंतजाम नहीं कर पाया था छात्र
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले प्रिंस का 27 अक्टूबर को आईआईटी बॉम्बे परिसर में सिविल इंजीनियरिंग शाखा के लिए सलेक्शन हो गया था। लेकिन वह 15,000 की स्वीकृति शुल्क का भुगतान करने में असमर्थ थे। सीट को सुरक्षित करने के लिए प्रारंभिक राशि को ऑनलाइन भुगतान किया जाना था। शुरू में उनके पास पैसे की कमी थी, वह पैसों का इंतजाम नहीं कर पाए थे। लेकिन जब वह अपनी बहन की मदद से 15 हजार की व्यवस्था करने में सक्षम हुए तो वेबसाइट पर तकनीकी खराबी से पेमेंट नहीं हो पाया था।

'कितनी कोशिशों के बाद भी मैं फीस नहीं भर पाया'
छात्र प्रिंस जयबीर सिंह की तीन बड़ी बहनें हैं। प्रिंस जयबीर सिंह ने कहा, ''पैसा इकट्ठा करने में कुछ कठिनाई हुई, लेकिन मेरी बहन ने हमारी मदद की। फिर मैंने फीस का भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी खामियां थीं। मैं आईआईटी खड़गपुर (जो सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित कर रहा था) भी गया ताकि मैं फीस का भुगतान कर सकूं। लेकिन वहां भी नहीं हो पया।''

बॉम्बे हाईकोर्ट ने छात्र की याचिका कर दी थी खारिज
छात्र प्रिंस जयबीर सिंह सुप्रीम कोर्ट के पहले बॉम्बे हाईकोर्ट गए थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। निराश होकर उन्होंने फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी से 48 घंटे के भीतर उन्हें एक सीट आवंटित करने को कहा। अदालत ने कहा, "इस छात्र के लिए एक सीट बनाएं... सुनिश्चित करें कि इससे पहले से भर्ती किसी अन्य छात्र को परेशानी न हो।"












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