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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मजदूरों से नहीं लिया जाएगा ट्रेन और बस का किराया

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को कहा है कि मजदूरों से बस और ट्रेन का किराया नहीं लिया जाएगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य सरकारें अपने सूबे के मजदूरों का किराया देंगी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जिस परेशानी में मजदूर लौट रहे हैं, उनसे किराया नहीं वसूला जा सकता है। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि जो मजदूर इस गर्मी में पैदल सड़कों पर चल रहे हैं, उनके लिए तुरंत शेल्टर की व्यवस्था की जाए और उनके खाने पीने का भी इंतजाम किया जाए। अदालत ने लॉकडाउन के बाद पैदल घरों को जा रहे लाखों लोगों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है।

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    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टिकट के पेमेंट के बारे में कंफ्यूजन है और मिडिल मैन शोषण कर रहा है। कोर्ट ने पूछा कि प्रवासी मजदूरों को टिकट कौन दे रहा है और कौन उसका भुगतान कर रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें पचा चला है कुछ राज्य ने मजदूरों को प्रवेश से रोका है।

    केंद्र की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल ने कहा कोई भी राज्य प्रवासी के प्रवेश रोक नहीं सकता। वह भारत के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मजदूरों के लिए काम कर रही है लेकिन राज्य सरकारों के जरिए उनतक नहीं पहुंच रही है। केद्र सरकार ने तय किया है कि प्रवासी मजदूरों को शिफ्ट किया जाएगा, सरकार तब तक प्रयास जारी रखेगी। एक भी प्रवासी बचेगा तो ट्रेन चलाई जाएगी।

    लॉकडाउन के बाद देश के बड़े शहरों से भारी परेशानियों का सामना करते हुए गांवों को लौट रहे मजदूरों के मसले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम उन मजदूरों की कठिनाइयों को लेकर चिंतित हैं जो अपने मूल स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि जो इंतजाम सरकारों की ओर से किए गए हैं, उनमें कई खामियां हैं। रजिस्ट्रेशन, ट्रांसपोर्ट से लेकर भोजन और पानी की व्यवस्था तक हर जगह कमिया हैं।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ये एक अभूतपूर्व संकट है और इससे निपटने के लिए सरकार अभूतपूर्व उपाय कर रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कुल प्रवासियों का 80 प्रतिशत उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। अब तक 91 लाख प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाया गया है।

    प्रवासी मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- ट्रेन के रजिस्ट्रेशन से लेकर खाने तक हर जगह खामियां

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    English summary
    supreme court says Migrant cant be charged for travel by train or buses States must give food and water where they are
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