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नाबालिग रेप पीड़िता की धुंधली तस्वीर को भी छापने या दिखाने पर SC ने लगाई रोक

By Ankur Singh
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    नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने तमाम मीडिया हाउस पर नाबालिग रेप पीड़िता की किसी भी तरह की तस्वीर को पब्लिश करने या टेलीकास्ट करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नाबालिग रेप पीड़िता की धुंधली तस्वीर को भी नहीं छापा जा सकता है, जिससे कि पीड़िता की व्यक्तिगत निजता बनी रहे। बिहार के शेल्टर हाउस में जिन बच्चियों के साथ कथित रूप से बलात्कार किया गया उसके बाद उनकी तस्वीर या वीडियो को टेलीकास्ट करने पर कोर्ट ने पूरी तरह से रोक लगा दी है, साथ ही उनका इंटरव्यू भी नहीं करने का आदेश दिया है।

    sc

    बिहार की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस दीपक गुप्ता बिहरा की नीतीश सरकार से इस मामले में जवाब मांगा और इस घटना पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। जिस तरह से इस घटना की मीडिया रिपोर्टिंग की गई है उसपर भी कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि रेप पीड़िताओं का साक्षात्कार किया है वह पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। यह मामला कोर्ट के संज्ञान में पटना के एक्टिविस्ट रणविजय कुमार लेकर आए थे, जिसके बाद कोर्ट ने यह अहम आदेश दिया है।

    कोर्ट ने कहा कि मीडिया रेप पीड़िताओं को एक बार फिर से उस पीड़ा को महसूस करा रहा है जिसे वह पहले झेल चुके हैं, यह पूरी तरह से रुकना चाहिए। साथ ही सरकारी तंत्र को इस मामले में ध्यान देना चाहिए कि मीडिया पीड़िताओं से सीधे संपर्क स्थापित नहीं करे। अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील अपर्णा भट जोकि कोर्ट में इस मामले में एमिकस क्यूरी थे ने कोर्ट की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि कोर्ट को नाबालिगों के अधिकार के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

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    English summary
    Supreme court says Media must not publish even morphed image of rape survivors.

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