'सुप्रीम कोर्ट का आदेश धुआं-धुआं हो गया...', दिल्ली में दिवाली की आतिशबाजी पर क्या बोल रही है पब्लिक?
Delhi Diwali fireworks: दिवाली के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण फिर से एक बार बढ़ गया है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता यानी एयर क्वालिटी इंडेक्श ( AQI) गंभीर प्लस कैटेगरी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक दिल्ली में सम्रग वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में है।
दिल्ली में AQI में उछाल दिवाली की रात हुई जमकर आतिशबाजी की वजह से हुई है। दिल्ली के प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों की खरीद और बिक्री पर बैन लगाया था। लेकिन इसके बावजूद भी दिवाली की रात जमकर आतिशबाजी की गई है। सिर्फ आतिशबाजी ही नहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना भी की गई है।

ट्विटर पर हैशटैग सुप्रीम कोर्ट कल से ट्रेंड कर रहा है। इस ट्रेंड के साथ सोशल मीडिया यूजर लिख रहे हैं कि, 'सुप्रीम कोर्ट का आदेश धुआं-धुआं हो गया।' यूजर ने पटाखे फोड़ने के वीडियो शेयर कर लिखा है कि, 'सुप्रीम कोर्ट क्या बोल रहा था, पटाखे नहीं फोड़े जाएंगे... दिल्ली में पटाखे नहीं मिलेंगे... लेकिन असल में हुआ कुछ और।'
एक यूजर ने लिखा, 'कौन कहता है दिल्ली में पटाखे बैन है, कौन कहता है दिल्ली वालों को सुप्रीम कोर्ट का कोई खौफ है। पटाखे ही पटाखे और वो भी धड़ल्ले से...।'
एक यूजर ने लिखा, 'बच्चे दिवाली पर पटाखे फोड़ने वक्त अपने अपनी मां-बाप की नहीं मानते हैं, तो केजरीवाल और सुप्रीम कोर्ट की क्या मानेंगे।'
हालांकि कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर ये भी पूछा है कि आखिर जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखों की बिक्री और खरीदारी पर बैन लगाया था तो पटाखे लोगों के पास आए कहां से? कई लोगों ने पूछा है कि दिल्ली में पटाखे कैसे खुलेआम बेचे गए हैं?
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने पटाखे जलाने पर क्या कहा?
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि, "दिल्ली में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध था लेकिन पटाखे जले जो उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आए। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अगर सख्ती से प्रतिबंध होता तो वहां भी लोगों को पटाखे नहीं मिलते। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली पुलिस की निगरानी के बीच से एक आम आदमी पटाखों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सप्लाई नहीं कर सकता है। तीनों राज्यों में भाजपा के नियंत्रण वाली पुलिस व्यवस्था है। अगर वह सक्रियता से काम करते तो रातों रात प्रदूषण में 100 अंकों की बढ़ोतरी से हम बच सकते थे। "












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