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सुनंदा पुष्‍कर केस: कमाल करते हैं कमिश्‍नर साहब...जब मर्डर नहीं तो कहां से '302'?

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नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। मंगलवार की दोपहर दिल्‍ली पुलिस कमिश्‍नर बीएस बस्‍सी अचानक पुलिस हेडक्‍वार्टर से बाहर आते हैं और मीडिया से मुखातिब होते हैं। इससे थोड़ी ही देर बाद हर तरफ हड़कंप मच जाता है। तमाम न्‍यूज चैनलों से अचानक क्रिकेट वर्ल्‍ड कप के लिए टीम इंडिया के चयन की खबर उतार दी जाती है और नयी ब्रेकिंग आ जाती है। ब्रेकिंग ये कि सुनंदा पुष्‍कर की मौत कोई हादसा नहीं बल्कि हत्‍या थी। लेकिन कमाल देखिए ये मर्डर सिर्फ कानून की धाराओं में है। सीधे शब्‍दों में कहें तो 'कानूनी 302'।

Sundnada Pushkar death case

आईए आपको सबसे पहले कमिश्‍नर साहब की उस स्‍टेटमेंट के बारे में फिर से बताते हैं जो कल उन्‍होंने कहा। ''हमने सुनंदा पुष्‍कर की मौत के मामले को आईपीसी की धारा 302 के तहत रजिस्‍टर किया है। हम मामले की अंतिम तह तक पहुंचने के लिए छानबीन कर रहे हैं। कमिश्‍नर साहब की अब ये बात सुन लीजिए- ''डेथ जो है वो नंबर 1 कि अननैचुरल है यानी कि डेथ नैचुरल नहीं है''। कमिश्‍नर साहब की ही अब ये बात सुन लीजिए- ''प्‍वाइजन के क्‍वांटिटि की जांच इंडिया में नहीं हो सकती उसके लिए हमें सैंपल विदेश भेजने पड़ेंगे।

और इसके लिए जरूरी था कि केस दर्ज किया जाए और हमने केस दर्ज कर लिया है''। और अब आखिरी में कमिश्‍नर साहब की इस बात को सुन लीजिए और हां जरा ध्‍यान से सुनिएगा- '' अभी हमारे को मालूम नहीं है कि जो जहर पी गई है वो खुद से पी गई है या किसी ने जबरदस्‍ती इंजेक्‍शन के माध्‍यम से दिया है तो किस तरह दिया है''।

कमाल... करते हैं कमिश्‍नर साहब... अचानक आए, बोला और हंगामा मचा दिया। एक झटके में बोल डाला कि सुनंदा पुष्‍कर की मौत के मामले में पुलिस ने धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 302 यानी की 'मर्डर'। और फिर खुद ही ये भी बोल गये कि पुलिस और डॉक्‍टरों को अभी तक ये नहीं पता चल सका है कि सुनंदा ने जहर खुद खाया या फिर किसी ने जबरदस्‍ती खिलाया। अब आप ही बताईए कमिश्‍नर साहब कि जब यहीं नहीं पता तो फिर 'मर्डर' कैसा। यानी कि आईपीसी की धारा 302 इस केस में कैसे लगा सकते हैं।

तो क्‍या सिर्फ जहर की मात्रा और उसकी क्‍वालिटी जांच के लिए दर्ज किया गया 302?

सुनंदा पुष्‍कर के मौत के जांच अभी तक आईपीसी की धारा 174 के तरत की जा रही थी। धारा 174 के तहत सैंपल जांच के लिए विदेश नहीं भेजा जा सकता। तो क्‍या इसी कानूनी पेंच को दूर करने और सैंपल को जांच के लिए विदेश भेजने के लिए धारा 302 का शगूफा छोड़ा गया। सीधे शब्‍दों में कहें तो क्‍या सिर्फ जिस जहर से सुनंदा की मौत हुई उस जहर की मात्रा कितनी थी और कौन सा जहर था इसका पता लगाने के लिए हत्‍या की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।

कमिश्‍नर साहब ने अपने मुंह से नहीं बोला 'मर्डर'

कमिश्‍नर साहब आपने तो कमाल बोला। सारी बात बोल गये लेकिन एक बार भी अपने मुं‍ह से मर्डर का नाम नहीं लिया। सिर्फ 302-302 की रट लगाए रहे। अपने बचाव का क्‍या नायाब तरीका निकाला आपने ताकि आप पर कोई सवाल उठाए तो आप जवाब दे सकें कि मैंने तो सिर्फ 302 धारा की बात की थी मैंने तो ये नहीं कहा कि सुनंदा की 'हत्‍या' हुई है।

क्‍या जहर की मात्रा पता चलने से सुलझ जायेगा केस

कमिश्‍नर साहब को बोलना था तो बोल दिया कि मौत जहर से हुई है। दिल्‍ली की पुलिस और तमाम डॉक्‍टर 6 जहर की बात को 6 महीने से बोल रहे हैं। तो क्‍या सिर्फ जहर का 'किस्‍म' पता करने के लिए पूरे मामले में धारा को बदल देना कहां तक जायज है। मान लीजिए अगर विसरा विदेश भेजने के बाद जहर की सही मात्रा भी पता चल जाए कि कितना जहर सुनंदा के पेट में या रगों में गया तो भी इससे केस की तफ्तीश में कितना फायदा होगा? क्या महज जहर की मात्रा भर जान लेने से केस सुलझ जाएगा?

सुनंदा पुष्कर मौत मामले में विशेष टीम ने शुरू की जांच

सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले की नए सिरे से जांच के लिए गठित की गई पुलिस की विशेष टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है। दिल्ली के पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि हत्या की जांच-पड़ताल करने के लिए गठित की गई विशेष टीम मामले के हर पहलू पर ध्यान दे रही है और इसके लिए जो जरूरी है, किया जाएगा। क्या थरूर से भी पूछताछ की जाएगी, बस्सी ने इस सवाल पर कहा, "अगर जरूरत पड़ी, तो हम करेंगे।

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English summary
Medical report said that Sunanda Pushkar's death was unnatural and was caused due to poisoning. Than why Delhi Police investigating this case under IPC section 302?
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