• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

देश में बढ़ रही खुदकुशी की घटनाएं, जानिए किस राज्य में सबसे ज्यादा लोग क्यों कर रहे सुसाइड ?

|
Google Oneindia News

बेंगलुरु। आधुनिक जीवनशैली और दौड़-भाग भरी जिंदगी के कारण बढ़ता तनाव, पारिवारिक उलझनें, धोखेबाजी, अकेलापन आदि वजहों से पिछले कुछ वर्षों में देश में खुदकुशी की घटनाएं में इजाफा हुआ है। जिंदगी की जद्दोजहद और गगनचुंबी सपनों के पीछे भाग रही नौजवान पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है। इतना ही नहीं हर दिन मजदूरी करने वाला मजदूर भी जिंदगी से हताश होकर मौत को गले लगा रहा हैं। पिछले कुछ वर्षों में खुदकुशी के मामलों में देश भर में बढ़ोत्तरी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनएसआरबी) ने देश में अपराध के आंकड़ो का संकलन कर विश्‍लेषण कर जो डाटा एकत्र किया उसमें कई दिल दहला देने वाले खुलासे हुए।

    NCRB Report: 2018 में Farmers से ज्यादा Unemployed ने की Suicide | वनइंडिया हिंदी

    Suicide

    महाराष्‍ट्र में सबसे ज्यादा लोगों ने की खुदकुशी

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में सुसाइड के मामलों में 3.6फीसदी की बढोत्तरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में कुल 1, 34, 516 लोगों ने खुदकुशी की जो 2017 के 1, 29, 887 आत्महत्या के मामलों के मुकाबले 3. 6 प्रतिशत अधिक है। आत्महत्या के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र (17, 972) में दर्ज किए गए। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमश: तमिलनाडु (13, 896), पश्चिम बंगाल (13, 255), मध्य प्रदेश (11, 775) और कर्नाटक (11, 561) हैं। इन पांच राज्यों में ही 50. 9 फीसदी खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए। सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश जहां देश की 16. 9 प्रतिशत आबादी रहती है, वहां कुल खुदकुशी में से केवल 3. 6 प्रतिशत मामले ही दर्ज हुए। केंद्रशासित प्रदेश के मामले में सबसे अधिक दिल्ली में 2, 526 खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए। 500 आत्महत्या के मामलों के साथ पुडुचेरी दूसरे स्थान पर रहा। सुसाइड कर मौत को गले लगाने वाले सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबके के लोग थे।

    महाराष्‍ट्र में किसानों ने सबसे ज्यादा की खुदकुशी

    महाराष्‍ट्र में किसानों ने सबसे ज्यादा की खुदकुशी

    ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में 5763 किसानों और 4586 खेतिहर मजदूरों ने खुदकुशी की है। अगर 2018 की बात करें तो किसानों की खुदकुशी में 5457 किसान पुरुष थे, जबकि 306 महिलाएं थी। खेतिहर मजदूरों की बात करें तो खुदकुशी करने वालों में 4071 पुरुष थे, जबकि महिलाओं की संख्या 515 थी। किसानों की खुदकुशी के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। कुल खुदकुशी के 34.7 फीसदी मामले महाराष्ट्र में, 23.2 फीसदी कर्नाटक में, 8.8 फीसदी तेलंगाना में, 6.4 फीसदी आंध्र प्रदेश में और 6.3 फीसदी मध्य प्रदेश में दर्ज किए गये।

    हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार कर रहे खुदकुशी

    हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार कर रहे खुदकुशी

    इस रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्‍या करने वालों में किसानों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2018 में 12,936 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर आत्‍महत्या कर ली। यह आंकड़ा 2017 में 34 और 2016 में 30 लोगों की खुदकुशी का था। वहीं 2018 में 10,349 किसानों ने आत्महत्या की। रिपोर्ट यह भी खुलासा हुआ कि सुसाइड करने वाले 1.3 लाख में से 66 प्रतिशत लोगों की आय प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से कम थी। प्रत्येक पांच में एक दिहाड़ी मजदूर था । बेरोजगारों द्वारा खुदकुशी के जारी किए गए सरकारी आंकड़ों में सुसाइड करने वाले 82 फीसदी पुरुष हैं। एनसीआरबी डाटा के मुताबिक देश में बेरोजगारी की वजह से साल 2018 में औसतन 35 लोगों ने रोजाना खुदकुशी की है। इस तरह से हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार खुदकुशी कर रहे हैं।

    साल दर साल बढ़ रहे सुसाइड

    साल दर साल बढ़ रहे सुसाइड

    2017 में 12,241 लोगों ने बेरोजगारी की वजह से खुदकुशी की थी, जबकि इसी दौरान खेती-किसानी से जुड़े 10,655 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं, 2016 में 11,379 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने जान दी थी, जबकि इसी अवधि में 11,173 बेरोजगारों ने आत्महत्या की थी। बेरोजगारी की वजह से 2015 में 10,912 लोगों ने खुदकुशी की थी, जबकि उस साल किसानों की आत्महत्या के 12,602 मामले दर्ज किए गए थे।

    दुनिया भर में हर 40 सेकेंड में एक व्‍यक्ति कर लेता है सुसाइड

    दुनिया भर में हर 40 सेकेंड में एक व्‍यक्ति कर लेता है सुसाइड

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. यानी हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। डब्लूएचओ की ओर से आत्महत्या पर जारी ग्लोबल डाटा के मुताबिक आत्महत्या करने वालों में 15 से 29 साल के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है।

    इसलिए खुदकुशी को आखिरी विकल्‍प मान लेता है

    इसलिए खुदकुशी को आखिरी विकल्‍प मान लेता है

    खुदकुशी या आत्महत्या के बारे में लोग अक्सर बात करने से हिचकते हैं। ऐसे में होता यह है कि जो लोग खुदकुशी करने के विचारों या जज़्बात से जूझ रहे होते हैं, वो किसी से बात नहीं कर पाते और खुद को अकेला महसूस करते हुए खुदकुशी के विकल्प को आखिरी हल मान बैठते हैं। आत्महत्या के मामलों से जुड़ा एक बड़ा तथ्य यह भी है कि ये रास्ता इख्तियार करने वाले लोगों की बातों या बर्ताव में कुछ लक्षण देखे जाते हैं, जो वास्तव में संकेत होते हैं। लेकिन समाज जिस तरह इस विषय को दरकिनार करता है, ऐसे संकेतों के बारे में भी हम जागरूक नहीं हो पाते।

    ऐसे विचार तो खुलकर बातें करें

    ऐसे विचार तो खुलकर बातें करें

    अगर आपको खुदकुशी करने जैसे विचार आते हैं या आपके किसी करीबी को, जिसे आप ऐसे खयालों से छुटकारा दिलाना चाहते हैं, तो सबसे ज़रूरी यही है कि इस बारे में बातचीत करें। अगर इस बारे में खुलकर बात नहीं की, तो आप अपने खयालों में उलझते जाएंगे। आप अलग थलग या अकेला महसूस करने लगेंगे और आपको मदद मिलने के रास्ते बंद हो जाएंगे।

    दूसरों से ले प्रेरणा

    दूसरों से ले प्रेरणा

    जब आप किसी दुख, तनाव, नाउम्मीदी या हताशा से गुज़र रहे होते हैं तो मन में बार-बार खुदकुशी के खयाल आते हैं। आपको बहुत सारे ऐसे लोग मिल जाएंगे, जो मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन खुदकुशी नहीं की और ये भी एक तथ्य है कि जितने लोगों ने खुदकुशी की है, सभी मानसिक समस्याओं से नहीं जूझ रहे थे।

    काउंसलिंग होती है आवश्‍यक

    काउंसलिंग होती है आवश्‍यक

    खुदकुशी के खयालों से अगर कोई पीड़ित रहा है और हालात बदलने के बाद वह सामान्य हुआ है, तो मुमकिन है कि बाद में फिर ऐसे कदम उठा ले. खुदकुशी के लिए प्रेरित होने वाले खयाल स्थायी नहीं होते, ये हालात पर निर्भर करते हैं और ये भी ज़रूरी नहीं कि इन खयालों के चलते हर हाल में कोई खुदकुशी कर ही ले।

    ज़्यादातर मामलों में कोई संकेत नहीं मिलता

    ज़्यादातर मामलों में कोई संकेत नहीं मिलता

    खुदकुशी करने वाले ज़्यादातर लोगों की बातों या व्यवहार में कुछ हफ्तों पहले से कुछ संकेत साफ दिखे। कुछ मामले ऐसे भी होते हैं, जिनमें खुदकुशी को लेकर कोई विचार नहीं किया जाता, किसी क्षणिक आवेग में जान दे दी जाती है. लेकिन, ऐसे मामलों में भी खुदकुशी से ठीक पहले एक खास किस्म की चिंता, तनाव, हताशा या इस तरह का कोई और लक्षण ज़रूर दिखता है. ऐसे संकेतों को समय रहते समझा जाए और उनका निदान किया जाए।

    समय रहते करें मदद

    खुदकुशी की एक कोशिश के बाद कुछ ने स्पष्ट तौर पर माना कि वो आगे जीना चाहते हैं और ज़्यादातर ने खुदकुशी की एक कोशिश के बाद कभी दूसरी कोशिश नहीं की। अगर सही समय पर मदद मिल जाए, तो इस मुश्किल से छुटकारा संभव है।

    इसे भी पढ़े- दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले BJP को बड़ा झटका, कांग्रेस ने जीतीं सभी 10 सीटें

    English summary
    Suicide Incidents are Increasing in India, know Why in which State Most People are Committing Suicide
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X