गर्मी से बढ़े मियां-बीवी के झगड़े, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा भी ज्यादा, स्टडी में चौंकाने वाली बात आई सामने
Study on temperature rise: एक इंटरनेशनल रिसर्च में यह बताया गया है कि भारत, पाकिस्तान और नेपाल में बढ़ते तापमान की वजह से महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा और यौन हिंसाओं में बढ़ोतरी हुई है। स्टडी में यह भी कहा है कि गर्मी की वजह से पति-पत्नी के बीच झगड़े भी पहले से ज्यादा होने लगे हैं।
अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि अब ग्लोबल वॉर्मिंग का असर रिश्तों और निजी संबंधों पर भी पड़ने लगा है। स्टडी में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ इंटिमेट पार्टनर वायलेंस (IPV) में भी बढ़ोतरी हो रही है। जो भविष्य के लिए एक चिंताजनक विषय है।

यह स्टडी 28 जून को JAMA Psychiatry में छपी है। प्रकाशित स्टडी से पता चला कि औसत वार्षिक तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी की वजह सेएशिया के तीन देशों भारत, नेपाल और पाकिस्तान में शारीरिक और यौन घरेलू हिंसा की घटनाओं में 6.3% से ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है।
रिसर्च में 1 अक्टूबर 2010 और 30 अप्रैल 2018 के बीच भारत, पाकिस्तान और नेपाल की 15 से 49 साल की 1.94 लाख से ज्यादा महिलाओं ने यह शिकायत की है कि उनके साथ भावनात्मक, शारीरिक और यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं।
फिर इस डेटा की तुलना उसी अवधि के दौरान तापमान बढ़ने के बाद की गई है। जिसमें पाया गया है कि आज के वक्त में इसी समय ये घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।
वहीं तीन देशों में से, भारत के आंकड़े सबसे चौंकाने वाले हैं क्योंकि भारत में महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की दर सबसे अधिक दर्ज की गई और दुर्व्यवहार में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई है। तापमान में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी के साथ शारीरिक हिंसा में 8% की वृद्धि और यौन हिंसा में 7.3% की वृद्धि हुई है।
येल विश्वविद्यालय में एनवायरमेंटल हेल्थ के प्रोफेसर और इस रिसर्च के को-राइटर मिशेल बेल ने बताया कि तापमान बढ़ने से महिलाओं के प्रति फिजियोलॉजिकल और सोशियोलॉजिकल दोनों तरह के हिंसा के खतरे बढ़ सकते हैं।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि जब वैज्ञानिकों ने महामारीविज्ञान और ज्यादा तापमान के हिसाब से डेटा देखा तो पता चला कि गर्मी बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के साथ इंटिमेट पार्टनर वायलेंस की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं।
रिसर्च में यह भी कहा गया है कि भीषण गर्मी के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। फसल की विफलता, बुनियादी ढांचे की क्षति, आर्थिक मंदी और घर के अंदर हमेशा रहने की वजह से परिवारों के भीतर तनाव बढ़ जाता है, जो हिंसा को बढ़ावा देता है।
रिसर्च करने वालों ये यह भी पाया कि कम आय वाले परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा हिंसा देखी गई है।












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