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नरेंद्र मोदी कैबिनेट की विस्तार की अटकलें तेज, इन सबकी लग सकती है लॉटरी

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नई दिल्ली, 15 जून: नरेंद्री मोदी मंत्रिपरिषद की इस महीने के आखिर तक विस्तार की अटकलें काफी तेज हो चुकी हैं। इसकी वजह ये है कि हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर कई सारी महत्वपूर्ण मैराथन बैठकें हुई हैं। वैसे बीजेपी का दावा है कि यह सब सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और लंबे वक्त बाद आमने-सामने की मुलाकात हो रही है, इसीलिए इसको लेकर ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन, जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर में देश की हालत बनी और आने वाले महीनों में कुछ बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं, उसको देखकर लगता है कि अब कैबिनेट विस्तार का फैसला और ज्यादा दिन तक टाला नहीं जा सकता है। संभावना है कि इसी महीने कई नए दावेदारों के लिए सत्ता का गलियारा खुल सकता है।

नरेंद्र मोदी कैबिनेट की विस्तार की अटकलें तेज

नरेंद्र मोदी कैबिनेट की विस्तार की अटकलें तेज

पिछले कुछ दिनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाजपा और सरकार के कई बड़े नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा हो चुकी है। शुरुआत यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बहुचर्चित मुलाकात के साथ हुई थी। यूपी के सीएम योगी के अलावा पीएम मोदी ने जिन नेताओं और मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ चर्चा की है, उनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा पार्टी के महासचिव (संगठन) बीएल संतोष जैसे चेहरे शामिल हैं। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सांसद और केंद्री मंत्री जनरल वीके सिंह के साथ ही केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरण जैसे नेता भी पीएम से मिलने वालों में शामिल हैं। इन तमाम नेताओं की प्रधानमंत्री से ये मुलाकात शुक्रवार को उनके साथ हुई गृहमंत्री अमित शाह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से लंबी चर्चा के बाद हुई है। गौर करने वाली बात है कि उस दौरान भी भाजपा अध्यक्ष नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष शामिल थे। पीएम मोदी सरकार और संगठन के लोगों से इतनी गहन चर्चा कर रहे हैं, जिसका सीधा अर्थ यही निकला जा रहा है कि वह अपने मंत्रिपरिषद में विस्तार की तैयारी कर रहे हैं।

मोदी कैबिनेट में कौन से पद हुए हैं खाली

मोदी कैबिनेट में कौन से पद हुए हैं खाली

सिर्फ प्रधानमंत्री ही अपने कैबिनेट सहयोगियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें नहीं कर रहे हैं, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह भी तकरीबन 25 सांसदों और मंत्रियों से अलग से मुलाकात कर चुके हैं। शाह और सांसदों-मंत्रियों की ये मुलाकात पिछले हफ्ते शनिवार और रविवार को उनके आवास पर हुई है, जिसमें उत्तर प्रदेश और गुजरात के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई और राज्यों के सांसद भी शामिल थे। मोदी कैबिनेट का विस्तार काफी वक्त से लंबित पड़ा हुआ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और सुरेश अंगड़ी के असामयिक निधन से इनके पद खाली हुए थे। दूसरी तरफ शिवसेना और अकाली दल के नुमाइंदे इस्तीफा देकर केंद्र सरकार से निकल चुके हैं। आज की तारीख में सिर्फ आरपीआई नेता रामदेश अठावले ही एनडीए के प्रतिनिधित्व के तौर पर बचे रह गए है और वो भी राज्यसभा के सांसद हैं। यानी लोकसभा में सिर्फ भाजपा कोटे के ही मंत्री बचे हुए हैं। इनके अलावा भाजपा कोटे से असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को भी मंत्री बनाया जा सकता है।

अनुप्रिया पटेल के फिर से मंत्री बनने की चर्चा

अनुप्रिया पटेल के फिर से मंत्री बनने की चर्चा

मोदी कैबिनेट के विस्तार की चर्चा का तात्कालिक कारण कोरोना की दूसरी लहर को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों और अगले साल यूपी समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। दोनों ही स्थिति भाजपा के लिए खासकर उत्तर प्रदेश को देखते हुए बेहद अहम है। योगी आदित्यनाथ की पीएम से मुलाकात भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इस बीच अपना दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की भी गृहमंत्री अमित शाह के साथ हाल में हुई मुलाकात इसी की ओर इशारा कर रहा है कि वो मोदी कैबिनेट की नई संभावित चेहरा हो सकती हैं। क्योंकि, यूपी में अपना दल भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रही है।

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जेडीयू और एलजेपी को भी मिल सकता है मंत्री पद

जेडीयू और एलजेपी को भी मिल सकता है मंत्री पद

उधर जानकारी मिल रही है कि केंद्रीय स्तर पर भाजपा के साथ एनडीए का कोई अहम सहयोगी नहीं बचने के चलते जेडीयू भी अबकी बार इसका भरपूर फायदा उठाने की कोशिश में है। जानकारी के मुताबिक पहले उसे 1 कैबिनेट मंत्री पद के ऑफर से संतुष्टि नहीं मिल रही थी, लेकिन अब शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल की जगह कुछ ज्यादा रियायत की उम्मीद दिख रही है। उधर, रामविलास पासवान का निधन बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही हुआ था। और उसी दौरान चिराग पासवान बीजेपी और जेडीयू से अलग होकर चुनाव मैदान में कूद गए थे। उसकी सियासी कीमत वो अपने चाचा के ही हाथों चुका रहे हैं। जदयू के विरोध की वजह से ही पासवान की जगह पर चिराग को एंट्री नहीं मिल पा रही थी। लेकिन, अब लोक जनशक्ति पार्टी की शक्ति पारस के हाथ में जा चुकी है और कहा जा रहा है कि यह सारा खेल नीतीश कुमार के इशारे पर ही हुआ है, इसलिए पशुपति कुमार पारस की सत्ता वाली लॉटरी लगने की संभावना भी बढ़ गई है।

English summary
Speculation of Narendra Modi cabinet expansion intensifies this month, JDU, LJP and Anupriya Patel including Sarbananda Sonowal may become ministers
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