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2019 में यूपी के 5 समीकरण, पांचवीं परिस्थिति बनी तो बीजेपी सत्‍ता से बाहर

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नई दिल्‍ली। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने उत्‍तर प्रदेश में 2019 लोकसभा चुनाव साथ लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस गठबंधन के बाद राजनीतिक पंडित यूपी में बीजेपी को बड़ा झटका लगने की भविष्‍यवाणी कर रहे हैं। महागठबंधन बनने से यूपी में लोकसभा चुनाव के परिणामों पर क्‍या असर पड़ेगा, इसे लेकर पहले भी कई सर्वे आ चुके हैं। करीब-करीब सभी सर्वेक्षणों में बीजेपी को नुकसान की बात सामने आई है। दूसरी ओर बीजेपी दावा कर रही है कि वह महागठबंधन से उस उत्‍तर प्रदेश में आसानी से निपट लेगी, जहां 2014 लोकसभा चुनाव में उसने 71 सीटें जीतकर चुनावी गेम को उलट-पलट करके रख दिया था। 2019 लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनाम बीजेपी का मुकाबला कैसा होगा? कौन से फैक्‍टर काम करेंगे? सपा-बसपा गठबंधन का वोट ट्रांसफर किस तरह होगा? किस परिस्थिति में किस पार्टी को कितनी सीटें आएंगी? इन सभी सवालों पर द प्रिंट में सैफोलॉजिस्‍ट योगेंद्र यादव ने लेख लिखा है। उन्‍होंने यूपी में पांच परिस्थितियों का अनुमान लगाया है और बताया है कि इनमें बीजेपी और महागठबंधन को आखिर कितनी सीटें मिल सकती हैं।

2019 लोकसभा चुनाव में वोट स्विंग नहीं हुआ, तब क्‍या होगी स्थिति

2019 लोकसभा चुनाव में वोट स्विंग नहीं हुआ, तब क्‍या होगी स्थिति

चुनाव विश्‍लेषक योगेंद्र यादव की नजर में अगर 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी, सपा, बसपा का वोट स्विंग नहीं होता तब नतीजे कुछ इस प्रकार के होंगे: बीजेपी को 37 सीटें मिल सकती हैं। सपा-बसपा को 41 सीटों पर जीत मिल सकती हैं, कांग्रेस को 2 और अन्‍य को कोई सीट नहीं मिलेगी। योगेंद्र यादव ने यह आकलन 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी, सपा और बसपा को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर किया है। पिछले आम चुनाव में यूपी में बीजेपी को 43 प्रतिशत वोट प्राप्‍त हुआ था, जबकि सपा और बसपा का वोट मिलाकर 42 प्रतिशत बनता है। मतलब सिर्फ सपा-बसपा का वोट जुड़ जाए और किसी प्रकार का स्विंग न हो तो भी 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में बीजेपी की 34 सीटें यूपी में कम हो जाएंगी।

दूसरी परिस्थिति में वोट ट्रांसफर सबसे अहम, बीजेपी को होगा

दूसरी परिस्थिति में वोट ट्रांसफर सबसे अहम, बीजेपी को होगा

अब दूसरी परिस्थिति में योगेंद्र यादव ने वोट ट्रांसफर का विश्‍लेषण किया। सपा और बसपा का गठबंधन 25 वर्ष बाद हुआ है। साथ चुनाव लड़ने का ऐलान करते वक्‍त अखिलेश यादव और मायावती ने कांग्रेस को गठबंधन में शामिल न करने के पीछे वोट ट्रांसफर को बड़ी वजह बताया। मतलब कांग्रेस का वोट इन दोनों दलों को ट्रांसफर नहीं होता, क्‍योंकि सपा-बसपा दोनों ही पहले के चुनावों में कांग्रेस के साथ लड़ चुके हैं। मतलब गठबंधन में वोट ट्रांसफर बड़ा अहम फैक्‍टर होता है। अब सपा-बसपा की बात करते हैं, इन दोनों पार्टियों ने फूलपुर, गोरखपुर, कैराना लोकसभा उपचुनाव में हराया। मतलब इन दोनों का दलों का वोट ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन यह कितना ट्रांसफर होगा? सबसे अहम सवाल यही है, आपको याद होगा 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की प्रचंड जीत हुई थी। जेडीयू-आरजेडी, कांग्रेस ने मिलकर बीजेपी को हराया था, लेकिन यहां भी वोट ट्रांसफर की समस्‍या हुई थी। लालू यादव की पार्टी कोर वोटर पर टिकी है, इसलिए उनकी पार्टी का वोट तो जेडीयू को ट्रांसफर हुआ, लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी का वोट आरजेडी को ज्‍यादा ट्रांसफर नहीं हुआ। अब यूपी पर लौटते हैं। योगेंद्र यादव के विश्‍लेषण के अनुसार, बीएसपी का वोटर वफादार है। ऐसे में बसपा का 90 प्रतिशत वोट सपा को ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन सपा का वोट बसपा को कम ट्रांसफर होगा। योगेंद्र यादव का अनुमान है कि सपा का करीब 70 प्रतिशत वोट बसपा को ट्रांसफर हो सकता है। इस स्थिति में बीजेपी 2019 लोकसभा चुनाव में 46 सीटें जीत सकती है, जबकि सपा-बसपा 31, कांग्रेस 2 और अन्‍य को 1 सीट पर जीत मिलने की संभावना बन सकती है।

2019 में बीजेपी के खिलाफ हुआ वोट स्विंग तो आएंगे तो ये तीन नतीजे

2019 में बीजेपी के खिलाफ हुआ वोट स्विंग तो आएंगे तो ये तीन नतीजे

अब तीसरी परिस्थिति बेहद खतरनाक है। योगेंद्र यादव ने थर्ड सिचुएशन में जो अंदाजा लगाया है, अगर वैसी स्थिति बन गई तो बीजेपी का गठबंधन के साथ भी केंद्र की सत्‍ता में आना मुश्किल हो जाएगा। किसी भी चुनाव में वोट स्विंग पर काफी कुछ टिका होता है। आम बोलचाल में इसे हम कहते हैं- 'किस पार्टी की हवा है'। मतलब ऐसे वोटर जो किसी पार्टी के लॉयल नहीं हैं, वे मुद्दे और हवा देखकर वोट दे देते हैं। इसी से बनता है वोट स्विंग। अब अगर 2019 में वोट स्विंग हुआ तो क्‍या होगा? योगेंद्र यादव कहते हैं- नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ अब उस स्‍तर पर नहीं है, जिस जगह 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान या उसके कुछ समय बाद था। यहां तक कि 2017 की तुलना में भी उनकी लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है। ओपिनियन पोल्‍स में योगी आदित्‍यनाथ सरकार का ग्राफ भी गिरा है। अब प्रश्‍न यह है कि 2019 में आखिर वोट स्विंग कितना होता है? अगर 2014 की तुलना में 2019 में बीजेपी का 3 प्रतिशत वोट कम हुआ तो वह 36 सीटें जीत सकती है। मतलब 2014 की तुलना में आधी लोकसभा सीटें। यदि बीजेपी के खिलाफ वोट स्विंग को 6 प्रतिशत तक गया तो यूपी में बीजेपी की लोकसभा सीटों आंकड़ा 2019 में 23 तक गिर सकता है। मतलब 2014 में एनडीए को मिली 73 सीटों से 50 कम। ऐसी स्थिति में सपा-बसपा 54 सीटें जीत सकती हैं। अब अंतिम परिस्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। अुनमान लगाया जाए बीजेपी के खिलाफ वोट स्विंग 9 प्रतिशत हुआ तो मतलब 2014 में मिले 43 प्रतिशत वोट की तुलना में 2019 में उसे 36 प्रतिशत वोट प्राप्‍त हुआ तब क्‍या होगा? यूं तो 36 प्रतिशत वोट यूपी जैसे कई पार्टियों वाले प्रदेश में कम नहीं है, लेकिन ऐसी स्थिति में बीजेपी की सीटें बहुत ज्‍यादा कम हो जाएंगी। योगेंद्र यादव का आकलन कहता है कि 2019 में बीजेपी के खिलाफ अगर 9 प्रतिशत वोट स्विंग हुआ तो पार्टी यूपी में 12 सीटों कि सिमट सकती है। मतलब 2014 लोकसभा में एनडीए को मिली 73 सीटों की तुलना में 65 कम। तीसरी परिस्थिति में सपा-बसपा को 65 सीटों पर जीत प्राप्‍त हो सकती है, जबकि कांग्रेस को 2 और अन्‍य को 1, अगर 2019 में तीसरी परिस्थिति से बीजेपी का सामना हुआ तो 2019 में उसका केंद्र की सत्‍ता में आना लगभग असंभव हो जाएगा, क्‍योंकि यूपी में इतनी कम सीटें मिलने के बाद बीजेपी के लिए 150 सीटों का आंकड़ा छू पाना भी मुश्किल हो जाएगा।

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English summary
SP BSP alliance can defeat BJP’s legendary poll arithmetic of uttar pradesh 2019 lok sabha election
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