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दक्षिण रेलवे की शानदार पहल, हवा और धूप से बनाई बिजली, बचाए 55 करोड़

नई दिल्ली, 05 अगस्त। दक्षिण रेलवे ने परंरागत उर्जा के स्रोतों से हटकर गैर परंपरागत ऊर्जा के स्रोत का इस्तेमाल किया। रेलवे के लिए ये एक शानदार अनुभव रहा। पहले के मुकाबले इस बार रेलवे ने अकेले बिजली खपत के नए प्रयोग के जरिए कम करके 55 करोड़ रुपए बचा लिए हैं।

Power from Wind an Solar Energy

दक्षिण रेलवे ने शुक्रवार को कहा कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग किया गया और इससे 54.99 करोड़ रुपये बचत रेलवे को हुई। दक्षिण रेलवे ने अपने जोन के स्टेशनों में 2017-18 में सौर संयंत्र की स्थापित किए थे। इससे जून 2022 तक 16.30 मिलियन यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता था। जिससे ₹ 6.45 करोड़ की बचत हुई। जबकि 91.56 मिलियन यूनिट पवन ऊर्जा के उत्पादन किया गया। इससे 48.54 करोड़ रुपए की बचत की गई।

सौर ऊर्जा से ₹6.45 करोड़ की बचत
दक्षिण रेलवे ने कहा कि सौर ऊर्जा के माध्यम से वह 2017 से जुलाई 2022 तक 16.30 मिलियन यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन करके ₹ 6.45 करोड़ बचाने में सफल रहा। ये सब पवन चक्कियों के निर्माण के बाद संभव हुआ। रेलवे यहां अपने पूरे परिसर में विभिन्न स्थानों पर सौर ऊर्जा पैनल स्थापित किए।

पवन ऊर्जा से बचे 48.54 करोड़ रुपए
दक्षिण रेलवे ने कहा कि वह सौर संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन दिन में पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर रहने वाला दक्षिण रेलवे का पहला स्टेशन बन चुका है। जबकि तूतीकोरिन डिवीजन के जिलों में स्थापित पवन चक्की संयंत्रों के माध्यम से दक्षिण रेलवे 48.54 करोड़ की बचत की है।

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