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पूर्व सैनिक बोले राष्‍ट्रपति को भेजी गई किसी चिट्ठी के बारे में कोई जानकारी नहीं

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नई दिल्‍ली। 100 से ज्‍यादा सैनिकों की ओर से राष्‍ट्रपति को लिखी गई चिट्ठी में एक नया ट्विस्‍ट आ गया है। राष्‍ट्रपति भवन के सूत्रों की ओर से कहा गया है कि राष्‍ट्रपति को वेटरंस की ओर से लिखी किसी भी तरह की चिट्ठी नहीं मिली है। आपको बता दें कि एक चिट्ठी इस समय मीडिया के पास है जिसमें आठ पूर्व सेना प्रमुखों के साइन हैं। इस चिट्ठी में सैनिकों ने वोट मांगने के लिए सेनाओं के नाम के प्रयोग पर खासी चिंता जताई है।

यह भी पढ़ें-आठ सेना प्रमुखों ने मिलिट्री के नाम पर वोट मांगने पर जताई चिंता

चिट्ठी पर विवाद बढ़ने की संभावना

चिट्ठी पर विवाद बढ़ने की संभावना

जनरल रॉड्रिग्‍स ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि यह कैसी चिट्ठी है। अपनी पूरी जिंदगी में मैं राजनीति से दूर रहा हूं। 42 वर्षों तक एक ऑफिसर के तौर पर सेवा देने के बाद भी मेरी सोच में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मैंने हमेशा भारत को पहले रखा है। मुझे नहीं मालूम कि ये कौन लोग हैं और यह फेक न्‍यूज के प्रदर्शन का एक महान उदाहरण है।' उन्‍होंने आगे कहा कि जब वह सेवा में थे तो उन्‍होंने सरकार के आदेश का पालन किया और सेनाओं को देश का एक अभिन्‍न हिस्‍सा बताया। एसएफ रॉड्रिग्‍स ने कहा सेनाएं गैर-राजनीतिक होती हैं। कोई भी कुछ कह सकता है और फिर से फेक न्‍यूज के तौर पर बेच सकता है। जनरल रॉड्रिग्‍स के मुताबिक जिन्‍होंने इस चिट्ठी को लिखा है, वह उस 'जेंटलमैन' को नहीं जानते हैं।

पूर्व एयरफोर्स चीफ ने भी बताया गलत

पूर्व एयरफोर्स चीफ ने भी बताया गलत

पूर्व एयरफोर्स चीफ ने चिट्ठी को बताया गलत वहीं पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने भी इस चिट्ठी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्‍होंने कहा कि इस चिट्ठी को एडमिरल रामदास ने नहीं लिखा है और यह किसी मेजर चौधरी की ओर से लिखा गया है। पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने आगे कहा, 'इस पूरे विवाद को खत्‍म करने के लिए मैंने लिखा था कि सेनाओं का राजनीति से दूर रहना चाहिए और चुनी हुई सरकार की मदद करनी चाहिए। इस तरह की किसी चिट्ठी के लिए मेरी मंजूरी नहीं ली गई थी। जो भी इस चिट्ठी में लिखा है, मैं उससे सहमत नहीं हूं। हमारी बातों को गलत तरह से प्रदर्शित किया गया है।'

एक और आर्मी ऑफिसर ने किया इनकार

वहीं रिटायर्ड वाइस आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एमएल नायडू ने भी इस बात से इनकार कर दिया है कि इस तरह की चिट्ठी के लिए उनसे कोई मंजूरी ली गई थी। उन्‍होंने यह भी कहा कि उनकी ओर से ऐसी कोई भी चिट्ठी नहीं लिखी गई है। जो चिट्ठी रामनाथ कोविंद को लिखने का दावा किया जा रहा है उसके मुताबिक, 'भारत की सेनाओं ने हमेशा मिलिट्री की तुलना में असैन्‍य नियंत्रण पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ऊपर रखा है और लोकतांत्रिक मूल्‍यों के लिए अपनी वफादारी का प्रदर्शन किया।'

सेनाओं के लिए लोकतांत्रिक मूल्‍य सबसे ऊपर

सेनाओं के लिए लोकतांत्रिक मूल्‍य सबसे ऊपर

बताया जा रहा है कि इस चिट्ठी में पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) एसएफ रॉड्रिग्‍स और जनरल दीपक कपूर के अलावा पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी और पूर्व नौसेना प्रमुख सुरेश मेहता समेत कुछ और सेना प्रमुखों के साइन हैं। चिट्ठी में उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की उस टिप्‍पणी का जिक्र खासतौर पर है जिसमें उन्‍होंने सेना को 'मोदीजी की सेना' के तौर पर संबोधित किया था।चिट्ठी में लिखा है, 'यह बहुत ही असाधारण है और बिल्‍कुल भी मंजूर नहीं है कि राजनेता मिलिट्री ऑपरेशंस जैसे सर्जिकल स्‍ट्राइक का श्रेय लें और सेनाओं को 'मोदी जी की सेना' कहने लगें।'

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English summary
Sources at Rashtrapati Bhavan denying from receiving any letter from Armed forces veterans which is circulating in media.
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