खौफ बरकरार रखने के लिए नाबालिग लड़कियों के ब्रेस्‍ट पर मिर्च पाउडर रगड़वाती थी सोनू पंजाबन

नई दिल्‍ली। पहले खुद कॉलगर्ल फिर दलाल और उसके बाद एशिया भर में जिस्‍मफरोशी की सिंडकेट चलाने वाली सोनू पंजाबन उर्फ गीता अरोड़ा को दिल्‍ली के द्वारका कोर्ट ने 24 साल की सजा सुनाई है। यह सजा उसे साल 2009 में 12-वर्षीय बच्ची को देह व्यापार में धकेलने के संबंध में हुई सुनवाई को लेकर दी गई है। सोनू पंजाबन ने जब अपराध की दुनिया में पैर जमाया तो उसे खूबसूरत विषकन्‍या के नाम से जाना जाता था। ऐसा इसलिए क्‍योंकि उसके खूबसूरत चेहरे के पीछे बदसूरत दरिंदगी छिपी हुई थी। सोनू पंजाबन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस की छानबीन जैसे-जैसे आगे बढ़ी उसके ऐसे ऐसे कारनामे सामने आए जिसे जानकर हर कोई हिल गया। वो देह व्यापार के नशे में इतनी चूर थी कि इंसानियत और महिला होने का सबक तक भूल गई थी। वो नाबालिग लड़कियों को नशा तक कराती थी और धंधा करने से मना करने पर शरीर पर लाल मिर्च छिड़क देती थी।

12 साल की बच्‍ची के सीने पर लाल मिर्च रगड़ा गया

12 साल की बच्‍ची के सीने पर लाल मिर्च रगड़ा गया

11 सितंबर 2009 को संदीप ने 12 साल की बच्ची का अपहरण किया और उसे कई बार बेचा गया और अंत में वह सोनू पंजाबन के चंगुल में फंस गई। पीड़िता को सोनू पंजाबन ऐसी दवाइयां देती थी जिससे कि वह बहुत ज्यादा विरोध नहीं कर सके। उसके शरीर पर लाल मिर्च डाली जाती थी। सफेद रंग का पाउडर सूंघने के लिए मजबूर किया जाता था।

नाबालिग लड़कियों से करवाती थी गंदा काम

नाबालिग लड़कियों से करवाती थी गंदा काम

ग्राहक के पास भेजने के एवज में सोनू पंजाबन 1500 रुपये लेती थी। अपहरण के करीब पांच वर्ष बाद पीड़िता किसी तरह नजफगढ़ थाना पहुंची और यहां पुलिस को अपने बयान दिए। अपने बयान में उसने संदीप पर अपहरण का आरोप लगाया। उसने पुलिस को बताया कि संदीप ने उसे कहा था कि वह उससे प्यार करता है। शादी करने का झांसा देते हुए संदीप नाबालिग को लेकर सीमा नामक महिला के घर पहुंचा और दुष्कर्म किया। इसके बाद नाबालिग चार बार बेचे जाने के बाद सोनू पंजाबन के हाथों बेची गई। सोनू पंजाबन ने नाबालिग को देह व्यापार में धकेल दिया। उसने भी नाबालिग को तीन शख्स के हाथों बेचा।

स्‍कूल-कॉलेज की लड़कियों को भेजती थी क्‍लाइंट के पास और लेती थी कमिशन

स्‍कूल-कॉलेज की लड़कियों को भेजती थी क्‍लाइंट के पास और लेती थी कमिशन

पुलिस अफसरों के मुताबिक, सोनू जिस्मफरोशी का धंधा संगठित तरीके से करती रही है। वह फ्रीलांस कॉल गर्ल्स को क्लाइंट्स के पास भेजती, जिनमें ज्यादातर स्कूल-कॉलेज स्टूडेंट्स रहती थीं। वह वॉट्सऐप मेसेज और विडियो कॉल के जरिए कॉन्टैक्ट में रहती थी। लड़कियों को क्लाइंट के पास भेजने का 30 फीसदी कमिशन लेती थी, जो आमतौर पर 20 से 25 हजार रुपये होता था। वह ज्यादातर लेन-देन ई-वॉलेट के जरिए करती थी, ताकि पुलिस को सबूत न मिल सके।

2014 में दिल्‍ली पुलिस के हत्‍थे चढ़ी थी सोनू पंजाबन

2014 में दिल्‍ली पुलिस के हत्‍थे चढ़ी थी सोनू पंजाबन

दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2014 में सोनू पंजाबन उर्फ गीता अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ में पता चला था कि नजफगढ़ की किशोरी को दिल्ली, उत्तर प्रदेश (यूपी) और हरियाणा में अलग-अलग जगहों पर बेचा गया था। वहां उसके साथ अलग-अलग लोगों ने दुष्कर्म किया था। इसी दौरान पीड़िता उनके चंगुल से निकल कर घर पहुंची थी।

कौन है सोनू पंजाबन

कौन है सोनू पंजाबन

सोनू पंजाबन उर्फ गीता अरोड़ा मूल रूप से हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली है। अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले वो एक साधारण कॉलेज जाने वाली लड़की थी। लेकिन आज से 11 साल पहले गीता का नाम एक हत्या के मामले से जो जुड़ा तो आज तक अपराध से दूर नहीं जा पायी। गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन का जन्म 1981 में दिल्ली की गीता कॉलोनी में हुआ। उसके पिता ओम प्रकाश अरोड़ा पाकिस्तान के रेफ्यूजी थे, जो बंटवारे के बाद हरियाणा के रोहतक में आकर बसे थे। ओम प्रकाश अरोड़ा रोजगार की तलाश में रोहतक से दिल्ली आए थे। वे ऑटोरिक्शा चलाकर अपना गुजारा करते थे।

सोनू पंजाबन का हमसफर मरता गया

सोनू पंजाबन का हमसफर मरता गया

बताया जाता है कि, सोनू पंजाबन ने हत्या में अपना जुड़ने के बाद रोहतक के नामी गैंगस्टर विजय सिंह से प्रेम विवाह किया था। उस वक्त विजय सिंह का नाम जोरो पर था। विजय सिंह उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्री प्रकाश शुक्ला गैंग का सदस्य था। जिसे सन 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टीम एसटीएफ ने मार गिराया था। कुछ दिनों के बाद ही विजय सिंह को भी एसटीएफ ने गढ़ मुक्तेश्वर में एक एन्काउंटर में ढेर कर दिया।

फिर दीपक के संपर्क में आई सोनू और वो भी मर गया

फिर दीपक के संपर्क में आई सोनू और वो भी मर गया

विजय की मौत के बाद सोनू पंजाबन अकेली पड़ गयी थी। अपराध की दुनिया में जिंदा रहने के लिए उसे एक नये साथी की जरूरत थी। उधर विजय के एनकाउंटर के बाद नजफगढ़ के दीपक नाम के एक वाहन ​चोर का सोनू पंजाबन के संपर्क में आया। थोड़े ही दिनों में अच्छी दोस्ती भी हो गयी। लेकिन ये साथ ज्यादा दिन नहीं चल सकता सन 2003 में असम पुलिस ने दीपक को भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया।

दीपक के भाई से शादी कर गीता बनी सोनू पंजाबन

दीपक के भाई से शादी कर गीता बनी सोनू पंजाबन

विजय के बाद दीपक का भी वही हश्र हुआ और एक बार फिर से गीता अकेली पड़ गयी। लेकिन इस बार उसने देर न करते हुए दीपक के भाई हेमंत सोनू से शादी कर लिया। हेमंत से शादी होने के बाद ही गीता को नया नाम सोनू पंजाबन मिला। लेकिन जैसे सोनू पंजाबन की किस्मत में हमसफर का साथ लिखा ही न हो, इसी तर्ज पर सन 2006 में गुड़गांव पुलिस ने हेमंत को भी एक मुठभेढ़ में ढ़ेर कर दिया।

उसके बाद उतरी जिस्‍मफरोशी के धंधे में

उसके बाद उतरी जिस्‍मफरोशी के धंधे में

इसके बाद तो जैसे सोनू पंजाबन की दुनिया ही खात्मे के कगार पर पहुंच चुकी थी। लेकिन इसी बीच अशोक बंटी नाम का एक अपराधी सोनू पंजाबन के संपर्क में आया और उसने सोनू को जिस्मफरोशी के धंधे में उतारा। दीपक और हेमंत के पुराने संपर्को का सोनू पंजाबन ने खुब इस्तेमाल किया और ब्यूटी पॅार्लर के धंधे की आड़ में देह व्यापार को शुरु किया। लेकिन इसी बीच एक ​बार फिर से सोनू की किस्मत ने अपना असर दिखाया और दिलशाद गार्डन पुलिस ने अशोक बंटी को एक एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिया।

जिस्म के कारोबार में सोनू पंजाबन ने यूं फैलाया साम्राज्‍य

जिस्म के कारोबार में सोनू पंजाबन ने यूं फैलाया साम्राज्‍य

एक वक्त सोनू खुद कॉलगर्ल थी। लेकिन वक्त बीतने के साथ साथ सोनू का साम्राज्य बढ़ता चला गया। दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में भी सोनू का जाल फैला हुआ है। वो दलालों की मालकिन है। अलग-अलग इलाकों में फैले हुए दलाल उसके संरक्षण में काम करते हैं। सोनू इन दलालों का इलाका भी तय करती है और मोटे पैसे भी वसूलती है।

करोड़ों की मालकिन सोनू पंजाबन

करोड़ों की मालकिन सोनू पंजाबन

धीरे -धीरे सेक्स रैकेट के कारोबार से सोनू पंजाबन करोड़ों की संपत्ति की मालकिन बन गई। किसी वक्त ठोकरें खाने को मजबूर पंजाबन ने देखते ही देखते कई फ्लैट खरीद लिए। बाद में सोनू पंजाबन ने दिल्ली के सभी दलालों से हाथ मिलाना शुरु कर दिया। जिसने सोनू का साथ देने से मना किया वो दोबारा कभी सुबह का सूरज नहीं देख पाया देखते ही देखते सोनू का सेक्स रेकेट कारपोरेट में बदल गया। उसने लड़कियों को फिक्स सैलेरी पर रखा। वो ग्राहक के पैसे में से लड़कियों को पैसे नहीं देती थी। धीरे-धीरे सोनू दलालों की मालकिन बन गई। अलग-अलग इलाकों में फैले हुए दलाल उसके संरक्षण में काम करते हैं। सोनू इन दलालों का इलाका भी तय करती है और मोटे पैसे भी वसूलती है।

कोई विषकन्‍या कहता तो कोई शहजादी

कोई विषकन्‍या कहता तो कोई शहजादी

फर्राटेदार अंग्रेजी और तन पर सजे महंगे कपड़े पहने सोनू पंजाबन को जो देखता है, देखता ही रह जाता है। छरहरा बदन, तीखे नैन नक्श, गोरा रंग, कद 5 फुट 4 इंच और बेबाक तेवरों से वह कॉलेज जाने वाली किसी लड़की जैसी ही दिखती है। लेकिन इस हसीन चेहरे के पीछे की सचाई कुछ और ही है। कोई इसे विषकन्या कहता है तो कोई शहजादी। माना जाता है कि सोनू पंजाबन का जीवन हमेशा से चकाचौंध भरा रहा। वो कोर्ट में पेशी के लिए भी जाती थी तो बाकी लड़कियां चेहरा छुपाती थीं जबकि वह ऐसा नहीं करती थी। टीवी पर, अखबार में वो खुद को देख कर खुश होती थी। कहा जाता है कि फिल्म फुकरे में भोली पंजाबन का किरदार उसी से मिलता-जुलता है।

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