राहुल ने बचपन से बहुत दुख झेले हैं, सोनिया गांधी के भाषण की 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली। शनिवार को राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष पद पर ताजपोशी हुई। इस मौके पर बतौर कांग्रेस अध्यक्ष अपना आखिरी भाषण देते हुईं सोनिया गांधी कई बार भावुक हुईं। सोनिया ने इंदिरा गांधी-राजीव गांधी को याद करते हुए राजनीति में अपने आने की वजह और संघर्षों के बारे में बताया। इस दौरान सोनिया ने भाजपा पर भी जमकर निशाना साधा, साथ ही कांग्रेस को नसीहत भी दी। पढ़िए सोनिया गांधी के भाषण की 10 बड़ी बातें ...

हमलों ने राहुल को बनाया निडर इंसान

हमलों ने राहुल को बनाया निडर इंसान

1. राहुल मेरा बेटा है इसलिए उसके तारीफ में कुछ बोलना उचित नहीं होगा लेकिन फिर भी मैं ये कहूंगी कि राहुल को बचपन से हिंसा की आग का सामना करना पड़ा है। राजनीति में आने पर राहुल ने ऐसे भयंकर व्यक्तिगत हमले का सामना किया जिसने उसे और निडर इंसान बनाया है।

2. आज मैं आखिरी बार आपको कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रही हूं। एक नया दौर, एक नए नेतृत्व की उम्मीद आपके सामने है। 20 साल पहले जब आपने मुझे अध्यक्ष पद पर चुना तो मैं इसी तरह आपके सामने संबोधित करने के लिए खड़ी थी। मेरे दिल में घबराहट थी, यहां तक कि मेरे हाथ कांप रहे थे। मैं समझ नहीं सकती थी कि मैं कैसे इस ऐतिहासिक संगठन को संभालूंगी। मेरे सामने मुश्किल चुनौती थी। तबतक राजनीतिक से मेरा नाता नहीं था।

मेरी मां मुझसे छीन ली गई ...

मेरी मां मुझसे छीन ली गई ...

3. राजीव जी से ब्याह के बाद मैं एक ऐसे परिवार में जिस परिवार के लोगों ने देश के लिए धन दौलत और जीवन लुटा दिया। इंदिरा जी ने मुझे बेटी की तरह स्वीकार किया। उनसे मैंने उन उसूलों के बारे में सीखा जिसपर इस देश की नींव बनी है। 1983 में उनकी हत्या हुई थी, मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरी मां मुझसे छीनी गई थीं। इस हादसे ने मेरे जीवन को बदल दिया।

4. उस समय तक राजनीति को मेरा देखने का नजरिया अलग था। मैं खुद को, बच्चों को राजनीति से दूर रखना चाहती थी। लेकिन मेरे पति ने देश की जिम्मेदारी को समझकर प्रधानमंत्री पद ग्रहण कर लिया। उनके साथ मैंने देश के कोने-कोने का दौरा किया, देश की चुनौतियों को समझा।

7 साल बाद मेरे पति की भी हत्या कर दी गई

7 साल बाद मेरे पति की भी हत्या कर दी गई

5. इंदिरा जी की हत्या के सात साल बीते ही थे कि मेरे पति की भी हत्या कर दी गई। मेरा सहारा मुझसे छीन लिया गया। इसके बाद मुझे आप सभी पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाज सुननी पड़ी। मुझे लगा कि इस जिम्मेदारी को नकारने से इंदिरा जी और राजीव जी का बलिदान व्यर्थ जाएगा। इसलिए देश के लिए अपने कर्तव्य को समझते हुए मैं राजनीति में आई।

6. उस वक्त केवल तीन राज्य में हमारी सरकार थी, केंद्र से भी हम दूर थे। आप सबके सहयोग से हमने इस चुनौती का सामना किया, एक के बाद एक दो दर्जन राज्यों में हमारी सरकार बनी। केंद्र में भी 2 बार हमारी सरकार आई।

हम किसी से डरने वाले नहीं

हम किसी से डरने वाले नहीं

7. आज 2014 से ही हम विपक्ष की भूमिका में हैं। हम आज जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं वो सबसे बड़ी हैं। हमारे संवैधानिक मूल्यों पर हमला किया जा रहा है। हमारी पार्टी को कई चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है लेकिन हमारी पार्टी कभी भी घुटने नहीं टेकेगी।

8. हम डरने वालों में से नहीं है। झुकने वाले नहीं हैं। हमारा संघर्ष इस देश की आत्मा के लिए संघर्ष है। हम इस से कभी पीछे नहीं हटेंगे।

अब नए नेतृत्व की उम्मीद आपके सामने है

अब नए नेतृत्व की उम्मीद आपके सामने है

9. हमारी देश के वसूलों, साझा-संस्कृति पर हमला किया जा रहा है। डर का माहौल बनाया जा रहा है लेकिन हम इस देश के वसूलों के रक्षक हैं। कांग्रेस को अपने अंतर्मन में झांककर आगे बढ़ना होगा। आम नागरिकों के हितों की रक्षा करनी होगी। हमें किसी भी तरह के त्याग और बलिदान के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

10. आज इस जिम्मेदारी को छोड़ते हुए आप सभी कांग्रेसजनों और देश के नागरिकों द्वारा दिये गये असीम प्यार और विश्वास के लिए तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं। अब एक नया दौर, एक नए नेतृत्व की उम्मीद आपके सामने है।

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