उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा- देश में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से एलर्जी है, जो बिल्कुल सही नहीं
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से अलर्जी है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए है। वेंकैया ने स्वामी विवेकानंद को एक समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने पश्चिम से हिंदुत्व का परिचय कराया था।
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श्री रामकृष्ण मठ द्वारा प्रकाशित तमिल मासिक श्री रामकृष्ण विजयम के शताब्दी समारोह और स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में वेंकैया ने कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिंदू शब्द से एलर्जी है, और यद्यपि यह ठीक नहीं है, फिर भी उन्हें इस तरह का दृष्टिकोण रखने का अधिकार है। नायडू ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब दूसरे धर्मो का अपमान नहीं है, जबकि धर्मनिरपेक्ष संस्कृति भारतीय लोकाचार का एक हिस्सा है।
नायडू ने कहा कि देश ने हमेशा पीड़ित लोगों को शरण प्रदान किया है। स्वामी विवेकानंद एक सामाजिक सुधारक थे और उन्होंने पश्चिम में हिंदुत्व से परिचय कराया। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि वह ऐसे देश से हैं, जिसने विभिन्न देशों में प्रताड़ित लोगों और शरणार्थियों को शरण दी है। नायडू ने सीएए का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब प्रताड़ित लोगों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, जबकि कुछ तत्व इसके बारे में विवाद पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''हम सर्वधर्म सद्भावना का अनुसरण करते हैं, जो हमारे खून में है और हमारी तहजीब का हिस्सा है। हम सभी को हिंदू धर्म से जुड़ी अवधारणाओं, उपदेशों और परंपराओं को एक सही परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए।'' उपराष्ट्रपति ने कहा, ''वास्तव में हिन्दुत्व क्या है। यह एक सवाल है और इसे समझना है और इसका समुचित ढंग से विश्लेषण किया जाना है।''












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