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सोनिया के इस खास दिग्गज कांग्रेसी नेता ने उठाए राहुल गांधी पर सवाल

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नई दिल्ली- एक समय सोनिया गांधी के बेहद खास रहे कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी में जारी मौजूदा संकट को लेकर राहुल गांधी पर ही सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने एक तरह से ये भी नसीहत देने की कोशिश की है कि पार्टी की हार का कारण भीतर ही तलाशा जाना चाहिए, बाहर नहीं। उन्होंने पार्टी के नए अध्यक्ष का नाम फाइनल करने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक जल्द से जल्द बुलाने की भी मांग की है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही एक और दिग्गज कांग्रेसी ने डॉक्टर कर्ण सिंह ने भी अध्यक्ष का नाम जल्द तय किए जाने की मांग की थी।

राहुल के ऐक्शन पर सवाल

पूर्व कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी से जब सीडब्ल्यूसी से बाहर कांग्रेस के नए अध्यक्ष के लिए नाम तय करने को लेकर हो रही चर्चा के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे राहुल गांधी की ओर उंगली उठाते हुए कहा कि, "पार्टी अध्यक्ष द्वारा कोई संवैधानिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी, जिसके तहत वर्किंग कमिटी के सदस्यों की राय ली जानी चाहिए थी।" उन्होंने साफ कहा है कि वर्किंग कमिटी की बैठक बुलाकर नाम पर फैसला जल्दी लिया जाना चाहिए। जाहिर है कि कांग्रेस में जारी संकट ने द्विवेदी और कर्ण सिंह जैसे नेताओं को बहुत ही आहत कर रखा है।

सोनिया के फैसले का हवाला देकर दिखाया आईना

सोनिया के फैसले का हवाला देकर दिखाया आईना

द्विवेदी ने यह सवाल भी उठाया है कि कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर पार्टी के भीतर जो ‘बैठकें' चल रही हैं, उसके लिए किसने अधिकृत किया है? उन्होंने कहा है कि, "यह कैसी कमिटी है, जिसमें एके एंटनी शामिल नहीं हैं? अगर कोई औपचारिक गठन होता, तो वह ज्यादा विश्वसनीय होता।" गौरतलब है कि द्विवेदी ने पहले काफी सारे कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों को संचालित किया है। उन्होंने राहुल गांधी के रवैये पर सवाल उठाने के लिए बिना नाम लिए 2012 का एक उदाहरण भी दिया है। उन्होंने बताया है कि कैसे जब पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इलाज के लिए अमेरिकी जा रही थीं, तब उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों के संचालन के लिए नेताओं के एक ग्रुप को खुद ही नियुक्त किया था।

सोनिया के समय था खास दबदबा

सोनिया के समय था खास दबदबा

जनार्दन द्विवेदी सबसे लंबे समय तक कांग्रेस महासचिव रहे हैं। उन्होंने 2018 में अपनी इच्छा से सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट ली थी। उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और सोनिया गांधी की अध्यक्षता में भी काम किया है। लेकिन, राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले से ही उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर होना पड़ा है। माना जाता है कि जबसे पार्टी में राहुल गांधी के नजदीकियों का दबदबा बढ़ना शुरू हुआ,उसके बाद से ही द्विवेदी की सक्रियता कम होनी शुरू हो गई। सोनिया गांधी के समय कांग्रेस के मीडिया का जिम्मा भी वही संभालते थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे वो सभी जिम्मेदारियों से किनारे होते चले गए।

कर्ण सिंह ने भी जताई थी चिंता

कर्ण सिंह ने भी जताई थी चिंता

द्विवेदी का ये नजरिया 88 वर्षीय कांग्रेस नेता कर्ण सिंह की ओर से सोमवार को दिए गए बयान के बाद सामने आया है। कर्ण सिंह ने भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक जल्द बुलाकर अध्यक्ष के नाम पर जल्द फैसला लेने की वकालत की है। उन्होंने 25 मई को अध्यक्ष पद से राहुल के इस्तीफे की पेशकश के बाद कांग्रेस नेताओं के रवैये पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि 25 मई को राहुल की इस्तीफे की पेशकश के बाद पार्टी के नेताओं ने उन्हें अपना फैसला बदलने के निवेदन पर ही समय बर्बाद किया। राहुल के इस्तीफे की पेशकश के बाद 6 हफ्तों में भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी। कर्ण सिंह ने राहुल के कांग्रेस पद से इस्तीफे को साहसिक कदम बताते हुए कहा कि इसका सम्मान किए जाने की जगह एक महीना उन्हें मनाने में ही समय बर्बाद कर दिया गया।

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English summary
Some constitutional mechanism should have been constituted by the party president:Janardan Dwivedi
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