सोहराबुद्दीन केस में हत्यारों को नहीं, नेताओं को फंसाना चाहती थी CBI: स्पेशल कोर्ट
नई दिल्ली। बहुचर्चित सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर में 13 साल बाद फैसला आया था। स्पेशल सीबीआई अदालत ने इस केस में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में पेश किए गए दस्तावेजों को असंतोषजनक करार देते हुए कहा कि इसे षड़यंत्र और हत्या करार देने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने इस केस में सीबीआई जांच पर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मुठभेड़ की जांच सोची समक्षी रणनीति के तहत नेताओं को फंसाने के लिए की गई थी।

'सीबीआई के पास पूर्व निर्धारित सिद्धांत और पटकथा थी'
स्पेशल कोर्ट के जज एस. जे. शर्मा ने इस मामले में 22 आरोपियों को बरी करते हुए 350 पेज के फैसले में यह टिप्पणी की है। जज ने कहा, 'मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं है कि सीबीआई जैसी शीर्ष जांच एजेंसी के पास एक पूर्व निर्धारित सिद्धांत और पटकथा थी, जिसका इरादा नेताओं को फंसाना था।'

'सच सामने लाने के बजाय कुछ चीजों पर काम किया'
फैसले में कहा गया है कि सीबीआई द्वारा मामले की जांच के दौरान सच सामने लाने के बजाय कुछ चीजों पर काम किया जा रहा था। इससे साफ जाहिर होता है कि सीबीआई पहले से सोची समक्षी रणनीति और पूर्व निर्धारित स्क्रिप्ट को सच साबित करना चाहती थी। सीबीआई कानून के मुताबिक जांच ना कर अपने लक्ष्य को पाने के लिए काम कर रही थी।

'राजनीति से प्रेरित थी जांच'
कोर्ट ने कहा कि पुलिस टीम ने तीन लोगों को अगवा किया, इसका कोई सबूत नहीं है। सीबीआई ये भी साबित करने में नाकाम रही कि कथित घटना के वक्त आरोपी पुलिसकर्मी मौजूद थे। कोर्ट ने कहा है कि कई गवाह कोर्ट में टूट गए थे और उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उनपर दबाव बनाया था। जज एस. जे. शर्मा ने कहा कि उनके पूर्वाधिकारी (जज एमबी गोस्वामी) ने आरोपी संख्या 16 भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बरी करने का आदेश जारी करते हुए कहा था कि ये जांच राजनीति से प्रेरित थी।

'नेताओं को फंसाने के लिए तैयार की स्क्रिप्ट को सच साबित करना चाहती थी सीबीआई'
फैसले में ये भी कहा गया है कि पूरी जांच का लक्ष्य उस मुकाम पर पहुंचने के लिए एक स्क्रिप्ट पर काम करना था। नेताओं को फंसाने के लिए सीबीआई के साक्ष्य गढ़े और आरोपपत्र में गवाहों के बयान दर्ज किए। स्पेशल कोर्ट ने फैसले में कहा है कि सीबीआई ने आनन-फानन में जांच पूरी की और लापरवाही बरती। अदालत ने फैसले में कहा है कि तीन लोगों के मारे जाने का दुख है कि इसके लिए सजा नहीं मिल पाई। लेकिन कोर्ट के पास आरोपियों को बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।












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