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...तो हमारे ज़माने की लड़कियाँ ऐसा 'राजकुमार' चाहती हैं

By नासिरुद्दीन

EPA/SANJEEV GUPTA

हाल ही में व्हाट्सऐप और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शादी का एक विज्ञापन खूब घूमा. अंग्रेजी का विज्ञापन बेरोज़गार दूल्हे की तरफ से था.

लड़के ने बताया था कि मुझे ऐसी दुल्हन चाहिए-

समान धर्म, जाति की तो हो ही, 'बेहद गोरी, सुंदर, अत्यंत वफ़ादार, अत्यंत भरोसेमंद, प्यार करने वाली, देखभाल करने वाली, बहादुर, ताकतवर, धनी… भारत के प्रति अत्यंत देशभक्त… भारत की सैन्य और क्रीड़ा क्षमता को बढ़ाने की उत्कृष्ट इच्छा रखने वाली… कट्टर लेकिन सहृदय, बच्चों के लालन-पालन की विशेषज्ञ और बेहतरीन खाना बनाने वाली, नौकरीपेशा लड़की…' ये सब हो तब भी 'सम्पूर्ण कुंडली मिलान और 36 गुणों का मेल होना अनिवार्य है.'

इस विज्ञापन की खूब चर्चा हुई. मजाक भी उड़ाया गया. मुमकिन है यह सच हो. यह भी मुमकिन है कि सच न हो. मगर जो बात सच है, वह है दुल्हन के लिए लड़कों का लम्बा-चौड़ा पैमाना. ये पैमाने हर इतवार के अखबारों में आसानी से दिख सकते हैं.

यानी, सुंदर, सुशील, गृहकार्य में दक्ष, संस्कारी, मजहबी, रोज़ा नमाज की पाबंद, स्लिम, पढ़ी-लिखी, अक्षत कौमार्य वाली, अविवाहित, नारीवादी नहीं, लम्बी, पवित्र, शाकाहारी वगैरह… वगैरह.

हाथ पकड़कर बैठे दो लोग
Getty Images
हाथ पकड़कर बैठे दो लोग

ख्वाहिश का पैमाना

इस पैमाने का कोई अंत नहीं है, ज्यादातर भारतीय लड़कों और उनके घरवालों की ख्वाहिश का पैमाना इसी तरह लबालब रहता है. यही नहीं उससे सिर्फ लड़के या उसके घरवालों की अपेक्षा पर खरा नहीं उतरना है बल्कि उससे पुत्र जैसा रत्न पैदाकर राष्ट्र सेवा के पैमाने पर खरा उतरने की उम्मीद पाली जाती है.

यही नहीं, इतना सब लिखने के बाद भी एक सबसे अहम बात छिपा ली जाती है. दहेज की माँग. दहेज की उम्मीद. इसलिए कई बार ढेर सारे पैमाने पर कामयाब होने के बाद भी फैसला यहीं आकर अटल हो जाता है.

खैर, आज बात लड़कों की नहीं, लड़कियों की होगी. तो क्या शादी के लिए हमें इसी तरह के विज्ञापन लड़कियों की तरफ से नज़र आते हैं? या ज्यादातर लड़की या लड़की वाले इसी तरह की उम्मीद पाले सर्वगुण सम्पन्न लड़कों को तलाशते हैं?

क्या लड़कियों की शादी तय करते वक़्त लड़की वाले उसी तरह ऐसी शर्त रखते और मनवाते हैं, जिस तरह लड़के वाले रखते हैं?

जाति और धर्म को छोड़, क्या लड़कियों के लिए शादी में कुछ ऐसी शर्त भी होती है, जिस पर किसी तरह का समझौता मुमकिन नहीं? यहाँ हम भारत में रहने वाली सभी धर्मों की लड़कियों की ज़िंदगी की बात कर रहे हैं.

दुल्हन
AFP
दुल्हन

क्या चाहती हैं लड़कियां

कभी हमने जानने की कोशिश की कि हमारे ज़माने की लड़कियों के सपनों का राजकुमार कैसा है?

कैसा पति/पार्टनर चाहती हैं? नहीं न. तो आइए हम आपको बताते हैं कि लड़कियाँ अपने 'दूल्हे' में कौन-कौन सा गुण देखना चाहती हैं? कैसे पार्टनर की ख्वाहिशमंद हैं/होती हैं.

बकौल लड़कियाँ, मेरा पार्टनर ऐसा होना चाहिए--

जो मुझे इज्जत दे. मुझे भी अपने जैसा इंसान समझे. इंसान का दर्ज़ा दे. इंसान अच्छा होगा तो पति भी अच्छा होगा. हर मामले में बराबरी में यकीन रखता हो. प्रोगेसिव हो. केयरिंग हो पर पॉजेसिव न हो.

जो बात वह अपने लिए सही मानता हो, वह सब मेरे लिए भी सही हो. जो बात मेरे लिए गलत माने, वह बात अपने लिए भी गलत माने. सच्चा, ईमानदार और भरोसेमंद हो.

शांत, समझदार, संवेदनशील, मन-वचन-कर्म से समानता में यकीन करने और इस पर चलने वाला हो. दिमागी तौर पर बेहतर तालमेल वाला हो.

मोबाइल देखती एक लड़की
Getty Images
मोबाइल देखती एक लड़की

नैहर जैसी आज़ादी

महज डिग्रीधारी पढ़ा-लिखा न हो बल्कि नज़रिए में खुलापन हो. दोस्त जैसा हो. अपने विचार मुझ पर थोपे नहीं. मुझे अपनी शख्सियत और पहचान बनाने से रोके नहीं. हर काम में सपोर्ट करे. मुझे आगे पढ़ने से न रोके. जॉब करने से नहीं रोके. ये कभी न बोले- तुम केवल घर के काम पर ध्यान दो.

किसी भी बात या काम के लिए जोर-जबरदस्ती न करे.

मुझे अपने घर यानी नैहर जैसी आज़ादी दे. कहीं आने-जाने पर रोक न लगाए. हमारे भी शौक़, सपने और दोस्त होते हैं. बहुत पूछताछ न करे. बेवजह की दखलंदाजी न करे. प्यार के नाम पर रोकटोक न करे. अकेले मत जाओ कह कर, आने-जाने से न रोके.

पुरुष दोस्तों से जोड़कर कभी ताना न मारे. मैं क्या करती हूँ और क्या नहीं, हर सेकेंड का हिसाब न माँगे. शक न करे. किसी पुरुष दोस्त या साथ काम करने वाले से बात करने या मिलने-जुलने पर चिकचिक न करे. 'मैंने तुमसे ज्यादा दुनिया देखी है' कह कर हर बात मनवाने की कोशिश न करे.

घर के बारे में फैसला दोनों मिलकर लें. पार्टनर समझे, घर के काम के लिए रखी गई कोई महिला नहीं. हमेशा यह उम्मीद न करे कि मैं 'सुपर वुमन' की तरह घर के सारे काम अकेले कर लूँगी. खाना बनाता हो. घर के काम में बराबर से हाथ बँटाने वाला हो. मेरे काम को भी काम माने. हमेशा हर काम के लिए मुझसे उम्मीद न लगाए.

लिस्ट देखतीं लड़कियां
Getty Images
लिस्ट देखतीं लड़कियां

गलत बात का सपोर्ट न करे...

संतान कब होगी, यह फैसला दोनों का हो. संतान की देखभाल और परवरिश में बराबर की शिरकत करे. घर में कोई बुजुर्ग है तो उनकी देखभाल भी सिर्फ मेरी जिम्मेदारी न हो.

हमें अपनी माँ, बहन, चाची, या मामी जैसा बनने/ बनाने की उम्मीद न करे. अपने घरवालों की हर उम्मीद पूरा करने के लिए दबाव न डाले. अपने माता-पिता और समाज की आड़ में गलत बात का सपोर्ट न करे.

अगर दोनों नौकरी करते हैं, तो दोनों बराबर तरीके से घर के खर्च में हिस्सा बंटाएं.

मेरी ही नहीं, मेरे घर वालों की भी इज्जत करे. अगर पत्नी अपने सास-ससुर या बाकी ससुरालियों को अपना मान कर सेवा करती है, वैसे ही पति को भी पत्नी के माँ-बाप या अपने ससुराल वालों की करनी चाहिए. दहेज़ के सख़्त खिलाफ हो.

मैं जो कहूँ, उसे भी ध्यान से सुने. मैं जैसी हूँ, मझे वैसे ही स्वीकार करे. मेरी भावनाओं को समझे और मुझसे पूछे कि मैं क्या करना चाहती हूँ. मैं जैसी हूँ, वैसे ही अपनाए.

(सच्चाई के साथ) ढेर सारा प्यार करे.

कपल
AFP
कपल

गलतियाँ मानने की हिम्मत रखता हो...

जो हमें समझे. मतलब मेरी खुशियों की वजह, मेरे छोटे-छोटे शौक... वगैरह. रेस्तरां में मेन्यू मुझे डिसाइड करने दे.

जिसमें साथ चलने की हिम्मत हो... आगे भागने की नहीं. अपनी गलतियाँ मानने की हिम्मत रखता हो.

पति काफ़ी कुछ है लेकिन सब कुछ नहीं. मेरी व्यक्तिगत दुनिया भी होगी, उसमें द़खल न दे. पार्टनर से पहले भी मेरा वजूद था और हमारी दुनिया थी, वह कायम रहनी चाहिए.

हमारे समाज में ज़्यादातर लड़कियों के बचपन के ढेर सारे सपने पूरे नहीं हो पाते. कई सपने वह मन में सँजोए आती है.

पार्टनर ऐसा हो जो उन अधूरे ख़्वाब को पूरा करने में मदद करे. उन्हें पूरा करने के लिए बढ़ावा दे. संतान के नाम के साथ मेरा नाम भी जुड़े.

शादी, रिश्ते
EPA/SANJEEV GUPTA
शादी, रिश्ते

शादी के विज्ञापन

ज़मीन- जायदाद कहाँ खरीदेंगे? ये किनके नाम होंगी? इंवेस्टमेंट कहाँ और कैसे करेंगे?

इन मामलों में मेरी भी राय ली जाए. कमाने वाला हो. ठीक-ठाक पैसा हो.

अब लड़कियों के गुण तलाशने वाले शादी के विज्ञापनों से इन छोटी-छोटी उम्मीदों को मिलाते हैं.

क्या लगता है कि ऊपर जैसा विज्ञापन देने वाले लड़के, लड़कियों की ऐसी उम्मीद पूरी कर पायेंगे?

लड़कियाँ क्या चाह रही हैं? चाँद-तारे? हीरा-मोती? नहीं न?

खुशी मनातीं लड़कियां
Getty Images
खुशी मनातीं लड़कियां

कितनी बदली हैं लड़कियां

हमारे समाज में शादी को लड़कियों के जीवन का अहम मकसद बना कर रखा गया है. शादी के मौजूदा चलन में उनके मन की बात की शायद ही कोई जगह रहती है.

शादी के मामले में लड़की के हर 'लेकिन' का जवाब गार्जियन के पास मौजूद रहता है.

हमारे वक़्त में भी बहुत कुछ नहीं बदला है. हालाँकि, अब अनेक लड़कियाँ सब कुछ नियति पर छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

महज भाग का लेखा मानकर अपनी ख्वाहिशों को दफन कर देने को राजी नहीं हैं.

इसलिए जैसे-जैसे लड़कियाँ पढ़-बढ़ रही हैं, अपनी शख्सियत की पहचान कर रही हैं, अपने पाँव पर खड़ी हो रही हैं, उनकी ख्वाहिशों का पैमाना भी बन रहा है.

पहले वो दबी रहती थीं. अब वे इसे बताने का हौसला इकट्ठा कर रही हैं.

ऐसा अंदाजा लगता है कि आज की इन लड़कियों के लिए सबसे अहम उनकी शख़्सियत है. खुद की पहचान की ललक है.

आज़ादी को पाने और बरकरार रखने की छटपटाहट है. इज़्ज़त और बराबरी की चाह है. भागीदारी की ख्वाहिश है. घर के काम में साझेदारी की माँग है.

खासतौर पर खाना बनाने-पकाने और संतान लालन-पालन में मर्द की साझेदारी की चाह है.

एक पुरुष और दो बच्चों का छायाचित्र
Getty Images
एक पुरुष और दो बच्चों का छायाचित्र

मोहब्बत गैरहाज़िर रहेगी...

सवाल है, क्या आज के हम मर्द इसके लिए तैयार हैं? खासतौर पर शादी के पहले बराबरी और आजादी की बातें करने वाले नौजवान लड़के इसके लिए तैयार हैं?

या वे शादी के बाद अपने पुरखों की ही तरह मर्दाना मर्द बन जाना चाहते हैं? अगर नहीं तैयार हैं तो ऊपर से सुख तो दिख जाए लेकिन मोहब्बत गैरहाज़िर रहेगी. इतना तय है.

यही नहीं, आप पहले ही पुरखों की तरह मर्द बन जाएँ लड़कियाँ अब पुरखिनों की तरह स्त्री बने रहने को तैयार नहीं हैं.

तैयार होतीं तो इन ख्वाहिशों का इस रूप में इजहार न कर पातीं. कहा जा सकता है कि कुछ लड़कियों की राय को अहम कैसे मान लिया जाए?

हम न मानें तो अपने घर की किसी लड़की को एक कागज़ देते हैं और कहते हैं कि वह लिख कर बताए कि अपने पार्टनर में कौन-कौन से गुण देखना चाहती है.

देखिए जवाब क्या आता है? साँच को आँच क्या!

(हमने लगभग 25 लड़कियों से अलग-अलग जानने की कोशिश की थी कि वे अपने पार्टनर, पति, शौहर में कैसा गुण देखना चाहती हैं. इनमें लगभग आधी संख्या उनकी है, जिनकी शादी नहीं हुई है. काम करती हैं. अपने शहर से दूर रहती हैं. स्त्री और पुरुष दोनों मित्र हैं. इनमें से कोई दिल्ली-मुम्बई का नहीं है. कोई आर्थिक पैमाने पर उच्च वर्ग का नहीं है.)

BBC Hindi
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English summary
so girls of our day want such a prince like this
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