फेसबुक पर अंजान दोस्त हो सकता है SIMI का आतंकी
हैदराबाद। फेसबुक पर अकसर लोग अंजान लोगों से दोस्ती कर बैठते हैं। उनमें से आप भी हो सकते हैं। हो सकता है आप सिर्फ इसलिये अंजान व्यक्ति से दोस्ती करते हैं, कि उसके और आपके कई कॉमन फ्रेंड्स हैं, तो भी ऐसा मत करें, क्योंकि वह अंजान आतंकवादी हो सकता है। हम आपको इस बात के लिये इसलिये आगाह कर रहे हैं, क्योंकि स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी सोशल मीडिया पर सक्रिय हो चुका है।

सिमी के पूर्व प्रमुख सलाउद्दीन अहमद के अंतिम संस्कार के समय जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, अब सुरक्षा एजेंसियों ने उनमें अपनी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है। एजेंसियां अब सिमी के नए संगठन जिसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ग्रुप के तौर पर जाना जा रहा है कि पड़ताल में लग गई हैं।
हैदराबाद पुलिस के दावों को आईबी ने नकारा
पिछले दिनों हैदराबाद से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। इन युवकों के बारे में हैदराबाद पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि यह युवक अफगानिस्तान के लिए यहां से रवाना हो रहे थे।
इंटेलीजेंस ब्यूरो, आईबी की ओर से इस दावे से अलग कहा गया है कि यह दोनों ही युवक महाराष्ट्र के उन 10 युवकों के समूह का हिस्सा हैं, जो सिमी के एजेंडे को दुनियाभर में फैलाने के लिए ऑनलाइन माध्यम की तलाश में लगे हैं।
ऑनलाइन होने को बेताब सिमी
ओमरखेद में वर्ष 2009 से कपड़े की दुकान का मालिक मुद्दस्सर और एक छात्र तारिक सिमी का हिस्सा हैं। इन दोनों ने खुद ही यह फैसला किया कि अब वे एक ऑनलाइन ग्रुप की शुरुआत करेंगे जिनकी विचारधारा उनकी ही तरह होगी।
फिर इन दोनों ने एक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ग्रुप को ईजाद कफी डाला। हालांकि अभी तक यह संगठन अभी तक पूरी तरह से शुरू नहीं हुआ है।
ताकि एक दूसरे से जुड़ सकें आतंकी
इस संगठन को शुरू करने का असल मकसद दरअसल कट्टर विचाराधारा वाले लोगों के लिए एक तरह की सोशल नेटवर्किंग ग्रुप की शुरुआत करना था जिसके जरिए ऐसे लोग आपस में एक दूसरे से जुड़े रहें।
साथ ही साथ सिमी के उस एजेंडे को इन लोगों के बीच फैलाना था जिसके बारे में संगठन के समर्थक मानते हैं कि यह एजेंडा अब खत्म होता जा रहा है।
इंडियन मुजाहिद्दीन के साथ संपर्क
यह दोनों लोग इंडियन मुजाहिद्दीन के टेकी मंसूर पीरभाउ के साथ काफी अच्छे से जुड़े हुए थे। मंसूर वही शख्स है जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है और जिसने इन लोगों को इस तरह के नेटवर्क की शुरुआत करने का आइडिया दिया था।
दुनिया के तमाम बड़े आतंकी संगठन इस समय काफी हद तक सोशल मीडिया पर भरोसा करते हैं और इसके जरिए ही वह संगठन में भर्ती प्रक्रिया को पूरा करते हैं।
साथ ही साथ वह इसी सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं दुनिया भर में अपने संगठन की विचारधारा को फैलाने में।
हैदराबाद से गिरफ्तार दोनों ही शख्स पिछले कई दिनों से हैदराबाद में कुछ लोगों से मिलने की कोशिश कर रहे थे और साथ ही वह अपने इस नए माध्यमों के बारे में पूरी दुनिया में जानकारी फैला देना चाहते थे ताकि लोग आपस में जुड़ सकें।
हाल ही में इस बात का खुलासा हो चुका है कि सिमी अब खतरनाक आतंकी संगठन अल कायदा का हिस्सा बन चुका है। अल कायदा ने भी भारत में अपने संचालन का ऐलान कर डाला है। सिमी को अलकायदा की ओर से संसाधन मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
साथ ही सिमी को आदेश भी दे दिया गया है कि वह सिर्फ इसी बात को ध्यान में रखकर आगे बढ़े।
बाकी आतंकी संगठनों की राह पर सिमी
वहीं कई मायनों में सिमी अब इस बात को महससू करने लगा है कि उसे अपनी जिम्मेदारियों में एक बड़ी भूमिका अदा करनी है।
ऐसे में सिमी ने फैसला किया है कि वह अपनी एक नई शाखा की शुरुआत करेगी ताकि वह देश में अल कायदा के संचालनों को पूरा करने के लिए लोगों की एक बड़ी फौज तैयार कर सके।
अभी फिलहाल सिमी सोशल मीडिया पर बाकी आतंकी संगठनों की तरह सक्रिय नहीं है।
इस तरह के संगठन अपने साथियों के साथ मिलकर अपने मूवमेंट को लोकप्रिय बनाने के लिए कई तरह के प्रयोगों को आजमा रहे हैं। साथ ही साथ भारत की
सरजमीं पर खाली पड़े स्थान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए भी काफी कोशिशों में लगे रहते हैं। यह वह जगह है जो पिछले दिनों इंडियन मुजाहिद्दीन के बड़े पैमाने पर असफल होने के बाद खाली हुई है।
आईएसआईएस की राह पर सिमी
हैदराबाद से गिरफ्तार मुद्दस्सर और तारिक उन तमाम युवकों पर करीब से नजर रखते आए हैं जिन्होंने आईएसआईएस में शामिल होने के लिए देश छोड़ा था। इन दोनों ने इस बात को महसूस किया कि आईएसआईएस ने अपना सारा प्रपोगैंडा ऑनलाइन यानी इंटरनेट के जरिए ही लोगों के बीच मशहूर किया है।
यही वह तरीका है जिसके जरिए अल कायदा भारत में अपने कैडर्स के सेलेक्शन के साथ ही साथ उनके साथ अल शहाब जैसे नामों के जरिए कम्यूनिकेट भी करता है।
सिमी इस खाली जगह को भरने के लिए बेताब है। वह जल्द से जल्द एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की कोशिशों में लगा हुआ है। इन दोनों की मानें तो इनका
मकसद सिमी को ऑनलाइन लोकप्रिय बनाना था क्योंकि अल कायदा का तरीके के बारे में एजेंसियों को पता लग चुका है।
इन दोनों ने बताया है कि वह दुनिया को इसके बारे में जानकारी देना चाहते थे और इसे पूरी तरह से संदेशों का आदान प्रदान करने वाला एक बड़ा माध्यम बनाना चाहते थ। इसके अलावा वह ऑनलाइन नेटवर्किंग के जरिए अल कायदा के नेताओं की ओर से लिखे गए साहित्य को लोगों के बीच मशहूर करना चाहते थे।
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