Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Shriprakash Shukla: 25 की उम्र में 25 मर्डर, CM की ली थी सुपारी, UP-बिहार तक आतंक! प्रेमिका के चक्कर में अंत

Bahubali Files-Shriprakash Shukla Oneindia Hindi Crime Series: यह कहानी अपराध, सत्ता और पुलिस की लड़ाई की है, जिसमें एक गांव का लड़का पहलवानी से गैंगस्टर बना और पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया। श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम 90 के दशक में यूपी और बिहार में आतंक का दूसरा नाम बन चुका था। उसने न सिर्फ कई नेताओं और व्यापारियों की हत्याएं कीं, बल्कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या की सुपारी लेकर पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती भी दे दी थी।

लेकिन कहते हैं कि अपराध की उम्र लंबी नहीं होती। जिस तेजी से उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा, उतनी ही तेजी से उसका पतन भी हो गया। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 1998 में उसे मुठभेड़ में मार गिराया। उसकी कहानी इतनी सनसनीखेज रही कि उस पर वेब सीरीज 'रंगबाज' और फिल्म 'सहर' तक बनीं। Oneindia Hindi अपनी Crime Series के जरिए आपको बता रहा है, कैसे एक स्कूल टीचर का बेटा प्रदेश का सबसे बड़ा अपराधी बन गया और फिर STF की गोलियों का शिकार हुआ...

Shriprakash Shukla

गांव का पहलवान, जो अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बना

श्रीप्रकाश शुक्ला का जन्म 1973 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के मामखोर गांव में हुआ था। उसके पिता एक स्कूल में शिक्षक थे, लेकिन वह पढ़ाई से ज्यादा अखाड़े और दबंगई में रुचि रखता था।

उसके अपराधी बनने की कहानी 1993 से शुरू होती है, जब उसकी बहन के साथ छेड़खानी हुई। इस घटना से गुस्से में आकर उसने आरोपी राकेश तिवारी को सरेआम गोली मार दी। यह उसका पहला अपराध था, जिसने उसे जुर्म की दुनिया में धकेल दिया।

इस मर्डर के बाद पुलिस उसके पीछे लग गई, इसलिए वह कुछ महीनों के लिए बैंकॉक भाग गया। जब वापस आया, तो वह बिहार के बाहुबली सूरजभान सिंह के गैंग में शामिल हो गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और देखते ही देखते यूपी-बिहार का सबसे बड़ा अपराधी बन गया।

UP Bihar Mafia: बिहार और यूपी में दहशत का दूसरा नाम

श्रीप्रकाश ने रंगदारी, अपहरण और सुपारी लेकर मर्डर करने का काम शुरू कर दिया। 1997 में उसने लखनऊ में बाहुबली विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की हत्या कर दी। इसी के बाद उसका नाम पूरे उत्तर भारत में गूंजने लगा।

इसके बाद 13 जून 1998 को उसने बिहार सरकार के मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी। इस हत्याकांड में उसने AK-47 का इस्तेमाल किया और सुरक्षाकर्मियों के सामने ही मंत्री को गोलियों से छलनी कर दिया। अब श्रीप्रकाश यूपी और बिहार पुलिस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका था। वह अपराध की दुनिया का ऐसा नाम बन गया था, जिसे कोई भी रोक नहीं पा रहा था।

Shriprakash Shukla

मुख्यमंत्री की सुपारी लेकर खुद फंस गया

1998 में उसने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी ले ली। इसके लिए 5 करोड़ रुपये की डील हुई थी। जब यह खबर पुलिस तक पहुंची, तो सरकार हिल गई।

4 मई 1998 को यूपी पुलिस ने उसे खत्म करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया। यह यूपी में बनी पहली ऐसी टीम थी, जिसे कहीं भी जाकर अपराधी को मारने की पूरी छूट दी गई थी।

'STF का पहला और सबसे बड़ा मिशन था - श्रीप्रकाश शुक्ला को जिंदा या मुर्दा पकड़ना।'


Shriprakash Shukla Murder: दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड कैसे बन गई मौत की वजह

उस दौर में पहली बार पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस का इस्तेमाल किया। STF को पता चला कि वह दिल्ली में अपनी गर्लफ्रेंड से फोन पर बात करता था। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल ट्रैक की और जाल बिछाया।

23 सितंबर 1998 को जब वह अपने साथियों के साथ गाजियाबाद की तरफ जा रहा था, तब STF ने उसे घेर लिया। जब पुलिस ने सरेंडर करने को कहा, तो उसने गोली चला दी। जवाबी कार्रवाई में STF ने उसे वहीं ढेर कर दिया।

अपराध की दुनिया का खौफनाक अंत

जिस गैंगस्टर से पूरा यूपी और बिहार डरता था, वह STF की गोलियों का शिकार बन गया। यूपी पुलिस ने उसे मारने के लिए एक करोड़ रुपये का ऑपरेशन चलाया, जो उस समय का सबसे महंगा पुलिस ऑपरेशन था।

STF की टीम ने उसे 142 दिनों की कड़ी निगरानी और सर्विलांस के बाद आखिरकार मौत के घाट उतार दिया। यह पहली बार था जब किसी अपराधी को पकड़ने के लिए मोबाइल ट्रैकिंग का इतना बड़ा इस्तेमाल किया गया था।

Shri Prakash Shukla: श्रीप्रकाश शुक्ला पर बनी फिल्में और वेब सीरीज

  • उसकी कहानी इतनी दिलचस्प और खतरनाक थी कि उस पर बॉलीवुड और वेब सीरीज ने भी ध्यान दिया।
  • फिल्म "सहर" (2005) - अरशद वारसी ने इसमें STF ऑफिसर का रोल निभाया था।
  • वेब सीरीज "रंगबाज" - इस सीरीज को भी श्रीप्रकाश शुक्ला के जीवन से प्रेरित माना जाता है।

श्रीप्रकाश शुक्ला ने अपराध की दुनिया में बहुत तेजी से नाम कमाया, लेकिन उसका अंत भी उतनी ही तेज़ी से हुआ। उसने कई लोगों की हत्या की, बड़े-बड़े नेताओं को चुनौती दी, लेकिन जब पुलिस ने उसे घेरा, तो वह बच नहीं सका। यह कहानी हमें सिखाती है कि अपराध की दुनिया में चाहे जितना भी नाम कमा लो, लेकिन अंत हमेशा बुरा ही होता है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+