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Shopian Fake Encounter: आर्मी कैप्टन ने साथियों संग मिल की थी सबूत मिटाने की कोशिश- चार्जशीट

Shopian Fake Eencounter: श्रीनगर। शोपियां फर्जी एनकाउंटर केस में शामिल रहे सेना के एक कैप्टन और दो अन्य लोगों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी। जम्मू कश्मीर पुलिस के द्वारा शोपियां में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र में इसका खुलासा हुआ है।

अपहरण कर मार दी थी गोली

अपहरण कर मार दी थी गोली

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पुलिस ने आरोप पत्र में कहा है 62 राष्ट्रीय रायफल्स के कैप्टन भूपेंद्र सिंह उर्फ मेजर बशीर खान ने अपने अधिकारियों और पुलिस को एनकाउंटर के दौरान मिले हथियारों के बारे में गलत जानकारी दी थी। जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल जांच टीम ने ये आरोप पत्र दाखिल किया है।

शोपियां के असीमपुरा में पांच महीने पहले तीन युवकों के मुठभेड़ में गोली मारे जाने का दावा किया गया था। लेकिन बाद में जांच हुई तो ये मुठभेड़ फर्जी निकली जिस मामले में अब पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप पत्र में पुलिस ने कहा कि तीनों युवकों का अपहरण कर उन्हें ले जाया गया और फिर उन्हें गोली मार दी गई।

आर्मी कैप्टन और दो अन्य आरोपियों ने हथियार मिलने के सोर्स और अन्य सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में लिखा कि "बरामद के गए हथियार के सोर्स के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई क्योंकि आरोपियों ने खुद ही हथियार तीनों युवकों के पास ले जाकर रखे थे।"

20 लाख के इनाम के लिए एनकाउंटर

20 लाख के इनाम के लिए एनकाउंटर

आरोप पत्र के मुताबिक तीनों आरोपियों ने 20 लाख के इनाम की राशि के लिए मुठभेड़ का झूठा प्लाट रचा और इस दौरान उन्होंने जो अपराध किए उसके सबूतों को इरादतन नष्ट कर दिया। तीनों आरोपियों ने इसके बाद साजिश के तहत झूठी सूचनाओं को फैलाया। चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी कैप्टन ने सबूतों को नष्ट कर दिया।

हालांकि सेना ने 20 लाख के इनाम के लिए मुठभेड़ की बात से यह कहते हुए इनकार किया है कि सेना में जवानों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसमें उन्हें किसी मुठभेड़ या भी ड्यूटी के दौरान किसी काम के लिए किसी तरह का नकद पुरस्कार दिया जाता हो।

क्या थी पूरी घटना ?

क्या थी पूरी घटना ?

घटना 18 जुलाई 2020 की है जब शोपियां के असीमपुरा में एक मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। तीनों युवकों की पहचान अबरार अहमद (25), इम्तियाज अहमद (20) और मोहम्मद इबरार (16) के रूप में की गई। बाद में सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल हुईं तो तीनों को मजदूर बताया गया। सोशल मीडिया पर मामला बढ़ने के बाद सेना ने मामले जांच गठित की।

पिछले साल दिसम्बर के शुरुआत में एसआईटी ने प्रधान जिला और सेशन जज की कोर्ट में सेना के कैप्टन और दो अन्य के खिलाफ 1400 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में कहा गया कि तीनों युवकों का अपहरण कर उन्हें ले जाया गया था जहां उन्हें भागने को कहा गया और फिर गोली मार दी। बाद में इसे मुठभेड़ दिखाने के लिए उनके शव के पास हथियार और अन्य सामग्री रख दी गई। मामले की जांच कर रही जम्मू कश्मीर पुलिस की विशेष जांच टीम ने मौके पर जाकर सीन रीक्रिएट भी किया था।

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