भारत की महिलाओं की स्थिति सोमालिया से भी बदतर
भारत में महिला सशक्तिकरण को लेकर बहुत बहस होती है। लेकिन भारतीय महिलाओँ के वर्तमान स्थिति के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ हो जाता है कि भारत की महिलाओँ की स्थिति सोमालिया की महिलाओं से भी बदतर है। नौकरीपेशा महिलाओं की की सूचि में सोमालिया भारत से कहीं आगे है।

भारत में महिलाओं की स्थिति आंकड़ों में
- नौकरीपेशा और कार्यक्षेत्र में भागीदारी के मामले में भारत ब्रिक्स देशों से काफी पीछे है।
- कायर्बल भागीदारी दर 2011(WPR) के अनुसार महिलाओं की भागीदारी महज 25.4 फीसदी है जबकि सोमालिया में यह 37 फीसदी है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में भारत की महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 30 फीसदी जबकि शहरों में यह महज 15.4 फीसदी है।
- ग्रामीण इलाकों में पुरुषों की भागीदारी 53 और शहरों में यह 53.8 फीसदी है।
शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी
- बीए पाठ्यक्रम में महिलाओं की आवेदन 37 फीसदी जबकि पुरुषों का 28.2 फीसदी है।
- पीएचडी और डिप्लोमा में महिलायों 14.7 जबकि पुरुष 20.2 फीसदी हैं।
- बीएससी करने वाली महिलायें 12.1 वहीं पुरुष 10.4 हैं।
- बीकॉम में प्रवेश लेने वाली महिलाओं का प्रतिशत 11.3 व पुरुषों का प्रतिशत 11.5 हैं।
- एमबीबीएस में प्रवेश लेने वाली महिलायें सिर्फ 0.5, एलएलबी में 0.5, एमटेक और एमई में 0.6, एमसीए में 0.7, एमकॉम में 1.2 फीसदी ही महिलायें प्रवेश लेती हैं।












Click it and Unblock the Notifications