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Farm Laws: किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना ने क्या कहा, जानिए

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नई दिल्ली। Shiv Sena mouthpiece saamana on Farm Laws. केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब डेढ़ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच एनडीए की पूर्व सहयोगी शिवसेना ने मोदी सरकार को घेरा है। पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना ने कहा कि आजादी के बाद देश में पहली बार इस तरह का एक कठोर और अनुशासित आंदोलन देखने को मिला है। शिवसेना ने कहा कि किसानों को खालिस्तानी कहने के बजाय उनकी इस हिम्मत और जज्बे का सम्मान करते हुए तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर देना चाहिए।

'अब सरकार कहेगी कि किसान अहंकारी हैं'

'अब सरकार कहेगी कि किसान अहंकारी हैं'

सामना में लिखे संपादकीय में शिवसेना ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी है, लेकिन अभी भी अपनी मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। अब सरकार की तरफ से कहा जाएगा कि देखो ये किसान कितने अंहकारी हैं, ये लोग सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुन रहे। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाए गई कमेटी के ये चारों सदस्य कल तक कृषि कानूनों की वकालत कर रहे थे और इसीलिए किसानों ने इस कमेटी को अस्वीकार कर दिया है।'

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    'सरकार नहीं चाहती कि आंदोलन खत्म हो'

    'सरकार नहीं चाहती कि आंदोलन खत्म हो'

    शिवसेना ने आगे लिखा, 'सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थक उतर आए हैं। सरकार का यह बयान बहुत ज्यादा चौंकाने वाला है। अगर वाकई इस आंदोलन में खालिस्तान समर्थक शामिल हो गए हैं, तो फिर तो ये केंद्र सरकार की एक और बड़ी विफलता है। सरकार चाहती ही नहीं कि ये आंदोलन खत्म हो, वो इस आंदोलन में राजद्रोह की बात फैलाकर राजनीति करना चाहती है।'

    मोदी जी बड़े बनिए- शिवसेना

    मोदी जी बड़े बनिए- शिवसेना

    पीएम मोदी से कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील करते हुए शिवसेना ने लिखा, 'ऐसा पहली बार है कि आजादी के बाद देश में एक कठोर और अनुशासित आंदोलन हुआ है। पीएम मोदी को किसानों की मांग और उनकी हिम्मत का सम्मान करना चाहिए। कृषि कानूनों को वापस लेने से किसानों का तो सम्मान बढ़ेगा ही, साथ ही पीएम मोदी का कद भी आज के मुकाबले और बड़ा होगा। मोदी जी बड़े बनिए।'

    किसानों की दो टूक- कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं

    किसानों की दो टूक- कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं

    आपको बता दें कि मंगलवार को किसान आंदोलन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने किसानों और सरकार के बीच बातचीत के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी का गठन करते हुए कहा कि उम्मीद है कि अब किसानों का आंदोलन खत्म होगा। हालांकि किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि जब तक ये कानून पूरी तरह से वापस नहीं होंगे, वो आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमेटी में भी हिस्सा लेने से इंकार कर दिया।

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    English summary
    Shiv Sena Mouthpiece Saamana Narendra Modi Farmers Protest
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