शिवसेना ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, कहा-बर्खास्त CM के साथ बॉर्डर सिक्योरिटी पर चर्चा करना गलत
मुंबई, अक्टूबर 02: शिवसेना ने शनिवार को एक राज्य की समस्याओं पर "बर्खास्त" मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। शिवसेना ने कहा कि, गृह मंत्री को एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ सीमा सुरक्षा पर चर्चा करने का कोई अधिकार नहीं है। शिवसेना की ओर से यह टिप्पणी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के कुछ दिनों बाद आई है।

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में कहा गया है कि अगर सीमा सुरक्षा का मामला इतना महत्वपूर्ण था तो इस पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के बजाय वर्तमान पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से चर्चा की जानी चाहिए थी। क्या किसी ने कश्मीर और लद्दाख की तरह सीमा में घुसपैठ शुरू कर दी है? अगर यह मुद्दा वाकई महत्वपूर्ण है तो गृह मंत्री को इस पर पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री से चर्चा करनी चाहिए।
सामना में कहा गया है कि, बर्खास्त मुख्यमंत्री से राज्य की समस्याओं पर चर्चा का यह क्या तरीका है? केंद्र सरकार इस नई परंपरा की शुरुआत कर रही है, जो उचित नहीं है। शिवसेना के मुखपत्र ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद ही सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर "जागने" के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह की भी खिंचाई की है। सामना ने कहा कि, पाकिस्तान हर दिन घुसपैठ कर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद अमरिंदर की सीमा सुरक्षा को लेकर नींद टूटी है।
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शिवसेना के मुखपत्र ने आगे आरोप लगाया कि हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि अमरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया था कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद ऐसा लगता है कि वह बाहर रहकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएंगे। शिवसेना के मुखपत्र की प्रतिक्रिया पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उस बयान पर आई है। जिसमें उन्होंने कहा था कि, वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से किसानों के आंदोलन पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की है।
इससे पहले शुक्रवार को सामना अपने एक अन्य संपादकीय में अमरिदंर पर निशाना साधते हुए कहा था कि, मुख्यमंत्री रहने के दौरान कैप्टन अमरिंदर तीन कृषि कानूनों के संदर्भ में कितनी बार दिल्ली आए? बल्कि उनकी भूमिका मोदी सरकार परस्त व किसानों में फूट डालनेवाली ही थी, ऐसा कहा जाता है। अब ये महाराज किसानों के मसीहा बन गए हैं। वैसे अमरिंदर, लुईजिन फलेरो आदि को पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री जैसा सर्वोच्च पद देने के बाद भी ये लोग कांग्रेस छोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
सामना ने लिखा था कि, कांग्रेस पार्टी बीमार है। इसके लिए इलाज भी चल रहा है, परंतु यह ग़लत है क्या? इसका विचार किया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी उफान मारकर उठे, मैदान में उतरे, राजनीति में नई चेतना की बहार लाए, ऐसी लोगों की भावना है। इसके लिए कांग्रेस को पहले पूर्ण कालीन अध्यक्ष ही चाहिए। दिमाग ही नहीं होगा तो शरीर का क्या लाभ? सिद्धू, अमरिंदर जैसों की खुशामद करने में कोई लाभ नहीं है।












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