मजदूरों के मसीहा सोनू सूद पर फिदा हुईं ये एक्ट्रेस, बताया रियल लाइफ का हीरो
मुंबई: लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को घर भेजने के लिए सोनू सूद ने दिन-रात एक कर दिया है। उनकी इसी मेहनत की वजह से हजारों प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के बीच मुंबई से सुरक्षित अपने घर पहुंच चुके हैं। सोनू सूद की इस दरियादिली को देखकर बॉलीवुड स्टार भी उनके फैन हो गए हैं। एक्ट्रेस शिल्पा सेट्टी ने सोशल मीडिया पर सोनू सूद की जमकर तारीफ की। साथ ही उन्हें रियल लाइफ का हीरो बताया है।

शिल्पा ने लिखा खास मैसेज
शिल्पा शेट्टी ने दो फोटो डालते हुए लिखा कि सोनू तुम पर हमें गर्व है। इसमें एक फोटो में सोनू सूद के नाम खास मैसेज लिखा था। शिल्पा ने लिखा कि सुपरहीरो हमारे नागरिकों को घर पहुंचाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। उनका स्वभाव सुंदर, विनम्र और निस्वार्थ है, जिस वजह से इस मुश्किल वक्त में लोगों को आराम मिल रहा है। आपने लोगों की मदद करके एक उदाहरण पेश किया है, जो आने वाली पीढ़ी याद रखेगी। आप पर हमें गर्व है सोनू। वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुबरा सैत ने लिखा कि हमारे रियल ऐज के सुपरहीरो को मेरी ओर से ढेर सारा प्यार। बुरे समय में सोनू सूद ही ऐसे हैं जो आपको खुश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं उनको करीब से जानती हूं।

नेताओं ने भी की तारीफ
हाल ही में महाराष्ट्र के राज्यपाल ने फोन और ट्विटर के जरिए सोनू को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी थी। राज्यपाल के ऑफिस ने ट्विटर पर सोनू की तारीफ करते हुए मराठी भाषा में लिखा कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अभिनेता सोनू सूद को फोन किया और प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों तक भेजने के लिए उनके समर्पित कार्य के लिए बधाई दी है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी उनकी तारीफ की थी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि अपने साथी कलाकार के तौर पर मैं तुम्हें 2 दशकों से जानती हूं सोनू। एक एक्टर के तौर पर तुम्हारा सामने आना मैंने सेलिब्रेट किया है। लेकिन आज के इन मुश्किल हालातों में जो दया तुमने दिखाई है उसने मुझे गर्व करने का मौका दिया है। जररूतमंदों की मदद का शुक्रिया।

45 हजार लोगों को खिलाया था खाना
दरअसल लॉकडाउन के पहले चरण का ऐलान होते ही लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई। इस दौरान ना तो उनके पास खाने को कुछ था और ना ही घर जाने का साधन। जिस पर सोनू सूद उनकी मदद को आगे आए। लॉकडाउन की शुरूआत में उन्होंने अपनी संस्था के जरिए 45 हजार लोगों को रोजाना खाना खिलाया। इसके बाद सरकार ने मजदूरों को घर जाने की इजाजत दे दी। फिर सोनू ने उनके लिए बसों की व्यवस्था की। इस दौरान रास्ते का सारा खर्च भी सोनू सूद ने ही उठाया। जिसके बाद अब मजूदर उन्हें अपना मसीहा मानने लगे हैं। किसी ने अपने बच्चे का नाम सोनू सूद रखा दिया, तो कोई उनकी मूर्ति बनवाना चाहता है।












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